
सुक्खा पाना
अकती के दिन रमेसर अउ कमला ह दाई-ददा के बात ल मान के एक-दूसर ल अपन जिनगी के जोड़ी मान लिन। फेर, बिधना ल उंकर सुख देख नइ सुहाइस। पाके फर अउ सुक्खा पाना जइसे पेड़ ले बिलगा जाथे, वोइसने ये बछर के अकाल ह वोमन ल घर छोड़े बर मजबूर कर दिस। दूनोंझन एक-दूसर के संग अउ बल धर के गांव ले पच्चीस कोस दूरिहा पहाड़ी तीर जंगल गांव म आ गिन। गांव के मनखेमन अपन गांव म बाहिर ले आय मनखे ल बसन नइ दीन। तब गांव ले आधा कोस दूरिहा म जंगल भीतरी डारा-पाना ल रूंध-बांध के रहे लइक झाला बनाइन। घर के समसिया तो हल होगे, फेर खाय- पिये अउ बुता-काम के समसिया रहय। अपन संग लाय ठोमा खोंची चाउर दार ह के दिन पुरय। जंगल गांव म रहे के अलग समसिया। गांव वालेमन कना काम मांगे बर जावंय तब काम नइ देवंय।
फेर अंधियार कब तक रहही। सूरुज निकले के पहिली पहाय बर सुकवा उथे। पहाड़ी म खदान चालू होय के गोठ-बात होय लागिस। रमेसर अउ कमला घलो कमइयामन म अपन नाव लिखाइन। पाके फर के भीतरी म बीजा रहिथे। जउन बेरा आय म पिकियाथे अउ नवा पेड़ बने बर तियार होथे। रमेसर के जिनगी म घलो सूरुज देव के दरसन होइस। खदान कमइया म वोकर नाव आ गे अउ कमला ल पानी पियाय बर घलो राख लिन।
दूनोंझन बिहनिया ले उठय घर के बूता-काम निपटा के बासी धर के अपन-अपन बूता म चल देवंय। आन -आन गांव ले आय मनखे संग मिलजुर के कमाय लगिन। दू-चारझन संगवारीमन ल अपन परोस म रहेबर खंधो डरिन। उंकर देखी-सिखा अउ संगवारीमन तीर-तार के रुख-राई ला कांट-छोप के झाला बना लीन। देखते -देखत गांव के एकठन पारा बनगे। खदान के मालिक ह हफ्ता म चुकारा देवय। रमेसर अउ कमला के खरचा कतिक। कमला ह दू बछर पाछू जावर जियर नोनी-बाबू होइस। इही बखत डारा-पाना के घर ल सबो संगवारीमन सपरिहा कमा-कमा के माटी अउ खपरा छानी के बना डारिन। खदान मालिक ह उंकर पारा म बिजली अउ पानी के सुभीता दे दिस।
लइकामन बाढि़स अउ गांव के इस्कूल म पढ़ेबर जाय लगिन। ऐती कमला अउ रमेस के चुकारा घलो बाढग़े। घर म टीवी, पंखा, पलंग, सुपेती सबो जिनिस आय लगिस। लइकामन पढ़-लिख के तियार होगे। बेटा ल नौकरी कराय के सपना बनिहारिन कमला देखे लगिस। बेटी के बिहाव बर बने सगा मिलगे। अपन हैसियत के मुताबिक उछाह मंगल अउ दाईज देके बिहाव करिन। बेटी के बिदा करत कमला ल अइसे लगिस जइसे आज पेड़ म पाके फर ला कोनो टोर के लेग गे।
रमेसर के बेटा घलो बैंक म क्लर्क (बाबू) बर परीक्छा देवाय रहिस। वोला ग्रामीन बैंक म नौकरी मिलगे। फेर रमेसर अउ कमला वोला भेजे बर नइ धरत रहिस। काबर कि दाई-ददा ले बिलगाय के पीरा कइसे होथे तेला जान डरे हे। फेर, ठलहा बइठे बर घलो नइ कहेबर सकय। छाती म पखरा लदक के सहर नौकरी करे भेज दिस। बैसाख म इही बछर वोकर बिहाव मढ़ा दीन। सुग्घर रूपस बहू आइस।
सास-ससुर तो खदान म बनिहारी करंय, गोसइया बैंक म नौकरी। बहुरिया ल घर के बुता, बारी-बखरी के साफ -सफई अउ जेवन बनई अतकेच बुता रहय। फेर, सहर के पढ़े-लिखे बहू ल अतको जियान परय। रमेसर के बेटा मोतीराम के तबदीली गांव तीर म हो गे। अब वो घर ले आना-जाना करय। बछर पूरे रहिस बिहाव ल कि बहू ह अपन बर स्कूटी लेय बर कहिस। एकझन बहू के मया म रमेसर घलो कुछ नइ बोल सकिस। आय दिन बहू के सहर जवई म कमला थोकिन नराज होके घर के काम-बुता के बहाना करके दू-चार बात सुना दिस। अब तो बहू के एड़ी के रिस तरवा म चघगे। दूसर दिन मोतीराम ल कहिके बारी के दू चार ठन पेड़ ल कटवाय बर कहिस। काबर कि वो पेड़ के सुक्खा पाना रोज गिरय जेला बाहरे बर कमला ह रोज कहय। तब न रइही पेड़ अउ न गिरही पाना। अइसे कहिके अपन गोसइया ल जिद करदिस।
इतवार के दिन बनिहार आ गे अउ काटेबर धरत रहिस उही बेरा कमला ह बनिहार ल बरजत कहिस कि संसारभर म सब पेड़ लगाय बर अरजी बिनती करत हें अउ इहां पढ़े-लिखेमन पेड़ कटवाय बर रजवाय हे। आमा, जाम, आंवरा, मुनगा ये सब हमर जिनगी के संगवारी आय। ऐला बीस बरस ले बेटी बरोबर पाले-पोसे हन। बाहरे बर कामचोरी करत हे अउ पेड़ कटवाय बर रजवाय हे। हम अप्पड़ हावन, बनिहारिन हन, फेर रूख-राई के महत्तम ल जानथन। इही म दवई-बुटई अउ पुस्टई रहिथे। जउन ये सुक्खा पाना ल बाहरे-बटोरे नइ सकय वो ये घर म झन रहव। अतका ल सुनत बहू के छाती म अंगार बरगे। रतिहा अपन गोसइया मोतीराम ल हबेड़त कहिस कि अब तो ये घर म मय नइच रहंव। मोला मइके भेज, नइते किराया घर म रहिबो।
नौकरी वाला के पढ़े-लिखे बेटी अउ गोसइन होय के अडय़ईपन ह कहां मानतिस। दू तीन दिन म मोतीराम किराया के घर खोज के जायबर तियार होगे। फेर दाई -ददा ल बताय बर हिम्मत नइ कर सकत रहय। मोतीराम ह सनिचर के दिन अपन दाई ल बताइस कि काली हमन सहर म किराया के घर म रहेबर जावत हन। पलंग अउ कुछ बरतन बांसा ला लेगबोन।
ये गोठ ल सुनके कमला ह अकबका गे। बहू ल दू बात सुना देंव तेकरे सेती अइसन करत हे कहिके बहू कर समझाय बर गिस अउ माफी घलो मांगिस। फेर, बहू के तो मुंहू फूले अउ कान म पोनी गोंजाय रहय। इतवार के दिन बिहनिया ले घर मोहाटी म टेक्टर खड़ा होइस अउ सब जिनिस ला जोरत देखिस तब अरोस-परोस के मन सकलागे। फेर, कोनो कुछु कहि नइ सकिन। आज रमेसर अउ कमला ल लागिस कि वोकर बारी के सबो पेड़ के पानामन सूखा के झर गे। पेड़मन कटागे, बारी -बखरी चातर होगे।
Published on:
18 May 2020 04:57 pm
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