
Chhattisgarh Foundation Day; छत्तीसगढ़ मना रहा है 22वां स्थापना दिवस, जानिए कौशल राज्य की लोक संस्कृति और पर्यटन स्थल के बारे में कुछ ख़ास...
Chhattisgarh Foundation Day; आज छत्तीसगढ़(chhattisgarh) अपना 23वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। 1 नवंबर 2000 यानी आज ही के दिन छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई थी। साल 2000 में जुलाई माह में लोकसभा और अगस्त में राज्यसभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। हर वर्ष राज्य के स्थापना दिवस पर कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है। हर वर्ष की भांति इस साल भी साइंस कॉलेज मैदान में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा है। राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव में भाग लेने के लिए विभिन्न देशों के कलाकार राजधानी रायपुर पहुंच चुके हैं।
जानिए छत्तीसगढ़ का इतिहास
1 नवंबर सन 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई थी। मालूम हो कि साल 2000 में जुलाई में लोकसभा और अगस्त में राज्यसभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रस्ताव पर मुहर लगी। इसके बाद 4 सितंबर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन किया गया। इसके उपरांत छत्तीसगढ़ 1 नवंबर 2000 को देश के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्त्व में आया। क्षेत्रफल के हिसाब से छत्तीसगढ़ देश का नौवां बड़ा राज्य है।
क्यों पड़ा छत्तीसगढ़ नाम
छत्तीसगढ़ राज्य का पौराणिक नाम कौशल राज्य है। कौशल राज्य को भगवान श्रीराम की ननिहाल कहा जाता है। लगभग 300 साल पहले यहां गोंड जनजाति का शासन हुआ करता था। इस दौरान ही राज्य का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा था। वैसे तो छत्तीसगढ़ के नाम को लेकर बहुत सी कहानियां प्रचलित हैं, मगर इसकी असली वजह थी गोंड राजाओं का 36 किला। इसे किलों को गढ़ भी कहा जाता था। यही कारन था कि इस क्षेत्र का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा।
ज्यादातर इतिहासकार यह मानते हैं कि कल्चुरी राजाओं ने 36 किले या कई गांवों को मिलाकर गढ़ बनाया था। इस इलाके को कोसल या दक्षिण कोसल के रूप में जाना जाता था। कल्चुरी राजाओं के शासनकाल में छत्तीसगढ़ की राजधानी आज के समय के बिलासपुर के पास स्थित शहर रतनपुर, हुआ करता था। शिवनाथ नदी के उत्तर में कल्चुरियों की रतनपुर शाखा के तहत 18 गढ़ और दक्षिण में रायपुर शाखा के अंतर्गत 18 गढ़ बनाए गए थे।
रतनपुर राज्य के अधीनस्थ थे 18 गढ़
रतनपुर, विजयपुर, पंडर भट्टा, पेंड्रा, केन्दा, बिलासपुर, खरौद, मदनपुर (चांपा), कोटगढ़, कोसगई (छुरी), लाफागढ़ (चैतुरगढ़), उपरोड़ागढ़, मातिनगढ़, करकट्टी-कंड्री, मारो, नवागढ़, सेमरिया।
ये हैं राजधानी रायपुर के 18 गढ़ों के नाम
रायपुर, सिमगा, ओमेरा, राजिम, फिंगेश्वर, लवन, पाटन, दुर्ग, सारधा, सिरसा, अकलबाड़ा, मोहंदी, खल्लारी, सिरपुर, सुअरमार, सिंगारपुर, टैंगनागढ़, सिंघनगढ़ थे।
लोक संस्कृति
छत्तीसगढ़ की संस्क़ति ,लोकसंस्कृति और जनजातीय संस्कृति में साफ़ दिखाई देती है। इस राज्य के लोकनृत्य एवं जनजातीय नृत्य पूरी दुनिया में काफी प्रसिद्ध है। वहीं, अगर लोकगीतों की बात करें तो छत्तीसगढ़ में पंडवानी, भरथरी, चंदैनी, ढोलामारू,ददरिया, बांस गीत प्रमुख हैं। यहाँ लोकनृत्यों में सुआ, राउत नाचा, करमा, ककसार, गौर नृत्य काफी ख़ास है।
प्रकृति की अनोखी छटा
छत्तीसगढ़ में जैसे प्रकृति माता की विशेष कृपा है। यहां का कोना-कोना इतना अधिक ख़ूबसूरत है कि देश विदेश से कई सैलानी यहाँ विहार के लिए आते हैं।
छत्तीसगढ़ में तीन राष्ट्रीय उद्यान - गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान है।
यहाँ के प्रमुख पर्यटक स्थल
चित्रकोट वॉटर फॉल्स
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले से करीब 39 किमी दूर इंद्रावती नदी पर चित्रकोट जलप्रपात है, जो हर किसी का मन मोह लेता है। देश विदेश से इस ख़ूबसूरत चित्रकोट को देखने के लिए लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। चूँकि इस जलप्रपात का मुख घोडे़ की नाल के समान है इस वजह से इस जलप्रपात को भारत का निआग्रा भी कहा जाता है।
पुरखौती मुक्तांगन
पुरखौती मुक्तांगन नया रायपुर स्थित एक पर्यटन केंद्र है। मुक्तांगन 200 एकड़ भूमि पर फैला एक तरह का खुला संग्रहालय है, जहाँ पुरखों की समृद्ध संस्कृति को संजोया गया है। यह परिसर बहुत ही सुंदर ढंग से हमें छतीसगढ़ की लोक-संस्कृति से परिचित करता है। वनवासी जीवन शैली और ग्राम्य जीवन के दर्शन भी यहाँ होते हैं।
नंदनवन जंगल सफारी
रायपुर के दक्षिणी छोर पर खंडवा गांव के निकट 'नंदनवन जंगल सफारी' बनाया गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित जंगल सफारी है। यह जंगल सफारी करीब 800 एकड़़ के क्षेत्र में 200 करोड़ रुपए की लागत से बना हुआ है। इस नंदनवन पार्क में घूमने आए सैलानी 'बाघ सफारी' (टाइगर सफारी), भालुओं की 'बीयर सफारी' और 'लायन सफारी' को देख सकते हैं।
राजिम
राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। महानदी, पैरी नदी तथा सोंढुर नदी का संगम होने के कारण इसे छत्तीसगढ़ का त्रिवेणी संगम कहा जाता है। प्रतिवर्ष यहाँ पर माघ पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक एक विशाल मेला लगता है। छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां राजीव लोचन भगवान का प्रसिद्ध मंदिर भी है।
भोरमदेव मंदिर
छत्तीसगढ़ के कवर्धा शहर में स्थित भोरमदेव मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। भोरमदेव मंदिर में खजुराहो मंदिर की झलक दिखाई देती है, इसलिए इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है।
डोंगरगढ़
डोंगरगढ़ को छत्तीसगढ़ का शीर्ष तीर्थस्थल माना जाता है। यह माता बम्लेश्वरी का प्रमुख धाम है। यहां माता रानी के दर्शन करने देशभर से हर साल लाखों लोग आते हैं। यह मंदिर लगभग 1,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां बड़ी बम्लेश्वरी और छोटी बमलेश्वरी का मंदिर है।
दंतेश्वरी माता मंदिर
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी माता मंदिर को 52वां शक्तिपीठ भी गिना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती का दांत गिरा था। इसी पर इस इलाके का नाम दंतेवाड़ा पड़ा। मंदिर का निर्माण 14वीं सदी में चालुक्य राजाओं ने दक्षिण भारतीय वास्तुकला से बनावाया था।
ये हैं छत्तीसगढ़ राज्य की प्रमुख नदियां
छत्तीसगढ़ में बहुत सी प्रमुख नदिया हैं। महानदी को छत्तीसगढ़ प्रदेश की जीवन रेखा और छत्तीसगढ़ की गंगा कहा जाता है। शिवनाथ नदी महानदी की सहायक नदी है। इसके अतिरिक्त हसदेव नदी ,अरपा नदी ,रेणुका नदी, मनियारी नदी, इन्द्रावती नदी भी राज्य की प्रमुख नदियां हैं।
Published on:
01 Nov 2022 12:14 pm
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