31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बुनियादी सुविधा न मिलने के कारण गांववालों ने किया चुनाव का बहिष्कार, वोट डालने गए लोगों पर लगेगा हर्जाना

बिंद्रानवागढ़ विधानसभा के भेरिगुड़ा के ग्रामीणों ने लिया बैठक में चुनाव के बहिष्कार का सामूहिक निर्णय
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Deepak Sahu

•

Updated: 6 Nov 2018, 12:56 PM IST

CGNews

बुनियादी सुविधा न मिलने के कारण गांववालों ने किया चुनाव का बहिष्कार, वोट डालने गए लोगों पर लगेगा हर्जाना

मैनपुर. बिंद्रानवागढ़ विधानसभा के देवभोग के अंतर्गत भेरिगुड़ा के ग्रामीणों ने इस बार चुनाव का बहिष्कार कर दिया है। उनका कहना है कि गांव में बुनियादी सुविधाएं कोसों दूर हैं। शिकायत के बावजूद कोई निराकरण नहीं हो रहा है।

कुम्हडई खुर्द पंचायत के आश्रित ग्राम भेरिगुड़ा के करीबन 400 ग्रामीणों ने गांव में सडक़ नही बनने से चुनाव बहिष्कार का सामूहिक निर्णय लेकर 200 से भी अधिक लोगों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन को एसडीएम और जनपद सीइओ को सौंपने के अलावा कलक्टर को दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि 15 साल से जनप्रतिनिधि का नाम और सरकार के द्वारा चलाए गए सुराज अभियान में कई बार आवेदन देने के बाद भी उनकी मांगें पूरी नही करने का जिक्र कर आगामी विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की जानकारी दिया है। मामले में जनपद सीईओ मोहनीश देवांगन ने बताया कि पूर्व में कई मर्तबे सडक़ निर्माण के लिए प्रयास किए गए सडक़ के दायरे में आने वाले लगानी जमीन देने के लिए ग्रामीणों की सहमति नही हो पाती, जिसके कारण सडक़ कार्य प्रभावित है। भेरिगुड़ा से करलागुड़ा पहुंच मार्ग पर पीएम योजना से सडक़ बनाने पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया है। ज्ञापन मिलने के बाद आरईएस एसडीओ को मौके पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।

वोट देने पर 5 हजार व 21 हजार रुपए जुर्माना
समिति प्रमुख रायधर ने बताया कि सभी के सहमति से चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया गया है। यह भी तय हुआ है कि शासन से मदद नही मिली तो ग्रामीण अपने बलबूते से आने वाले समय मे सडक़ निर्माण करेंगे। ऐसे में कोई प्रलोभन में आकर मतदान करने गया तो उसे हर्जाने भरने का प्रावधान किया गया गया है और निर्णय के मुताबिक एक व्यक्ति को 5 हजार और परिवार मतदान किया तो 21 हजार रुपये का हर्जाना ग्राम समिति को देना होगा। इस रकम का उपयोग सडक़ बनाने के लिये किया जाएगा।

ग्रामीणों का दर्द
बहिष्कार के बाद बनाए गए ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष रायधर यादव, सोमवरू, बेनूराम ने बताया कि सडक़ नही होने के कारण यहां तक सरकार की कोई इमरजेंसी सेवा का लाभ नही मिलता। उल्टी दश्त और गर्भावस्था में समय पर इलाज नही मिलने के कारण पिछले 10 सालों में 20 से भी ज्यादा ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। निजी डॉक्टर भी यहां आने के लिये कतराते हैं, ऐसे में मरीजों को मुर्दे की भांति खाट में डालकर ले जाना पड़ता है।

8 किमी का सफर भी महंगा पड़ जाता है। पंचायत मुख्यालय वैसे तो 2 किमी है, जहां नदी रपटा पारकर पैदल ही आना जाना करना होता है। दूहिया से आने जाने के लिए करलागुड़ा होते हुए 8 किमी का सफर तय करना होता है। शुरू के 4 किमी के सडक़ में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हंै।

15 दिन पहले 32 वर्षीय बसंत इस मार्ग में आवाजाही के दरमयान गिर गया और उसके जांघ की हड्डी टूटने से अब वे बैठ भी नही सकते। घर का इकलौता कमाऊ लकड़ी के सहारे चलने को मजबूर है। स्कूली बच्चे भी आए दिन दुर्घटना के शिकार होते रहते हैं। लोगों ने दुपहिया वाहन का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है।