
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रमुख अजीत जोगी का यू टर्न, भाजपा के साथ जाने के संकेत का किया खंडन
रायपुर. छत्तीसगढ़ के सियासी संग्राम में नई तरह की राजनीति का दौर चल रहा है। कोई हाथ में गंगाजल लेकर कसम खा रहा है तो कोई सभी धर्मों-संप्रदायों के ग्रंथों की। पूर्व मुख्यमंत्री व जकांछ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत जोगी ने शनिवार को पवित्र धार्मिक ग्रंथों पर हाथ रखकर कसम खाई कि ‘मैं मर जाऊंगा, सूली पर लटक जाऊंगा लेकिन भाजपा से न कभी समर्थन लूंगा और न ही दूंगा।’ जोगी ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में बहुमत नहीं मिलने की सूरत में भाजपा के साथ जाने की संभावना जताई थी।
जोगी ने सिविल लाइन स्थित अपने आवास पर संवाददाताओं के सामने विभिन्न धर्म-सम्प्रदायों के आठ पवित्र ग्रंथों को हाथ में लेकर कसमें खाईं। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि जकांछ-बसपा और सीपीआइ का गठबंधन अपने दम पर प्रदेश में बहुमत की सरकार बनाने जा रहा है। उन्हें किसी को समर्थन देने अथवा लेने की जरूरत ही नहीं पडऩे वाली। इस घोषणा के समय जोगी के साथ उनके पुत्र अमित जोगी, जकांछ महासचिव अब्दुल हमीद हयात आदि भी थे।
मायावती-जोगी आ गए थे आमने-सामने
भाजपा को समर्थन देने के संकेतों के बाद जकांछ प्रमुख अजीत जोगी और बसपा प्रमुख मायावती आमने-सामने आ गए थे। बताया जा रहा है कि भाजपा को समर्थन के बयान के बाद मायावती ने जोगी से अपनी नाराजगी जताई थी। साथ ही मायावती ने शुक्रवार को रायपुर जिले के आरंग में चुनावी सभा में भी कहा था कि बहुमत नहीं मिलने की सूरत में उनका गठबंधन विपक्ष में बैठना पसंद करेगा, पर भाजपा अथवा कांग्रेस के साथ नहीं जाएगा।
कोर कमेटी के गुलाब सिंह कांग्रेस में वापस
पूर्व विधायक और जकांछ कोर कमेटी सदस्य गुलाब सिंह भी शनिवार को कांग्रेस में वापस लौट गए। उन्होंने राहुल गांधी के सामने कोरिया में फिर से कांग्रेस की सदस्यता ले ली। जकांछ ने उन्हें भरतपुर-सोनहत से उम्मीदवार बनाया था। बाद में यह सीट बसपा के खाते में चली गई और बसपा ने वहां से त्रिशला प्रसाद चेरवा को खड़ा किया।
Updated on:
18 Nov 2018 10:48 am
Published on:
18 Nov 2018 10:48 am
