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पर्यावरण विभाग बना रहा 37 करोड़ की लागत से एडवांस लैब, खाद्य पदार्थ सहित 138 प्रकार की होगी जांच

पानी प्रदूषण की 70 से ज्यादा, मिट्टी की गुणवत्ता की 30 से अधिक, एयर क्वालिटी की जांच के लिए 15 से ज्यादा टेस्ट हो सकेंगे। इसके अलावा हवा, मिट्टी, पानी में घुलने वाले हैवी लौह कणों की जांच भी हो पाएगी।

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पर्यावरण विभाग बना रहा 37 करोड़ की लागत से एडवांस लैब, खाद्य पदार्थ सहित 138 प्रकार की होगी जांच

पर्यावरण विभाग बना रहा 37 करोड़ की लागत से एडवांस लैब, खाद्य पदार्थ सहित 138 प्रकार की होगी जांच

अभी प्रदेश में हवा, पानी, मिट्टी, ध्वनि प्रदूषण, सॉलिड वेस्ट प्रदूषण, बैक्टीरियोलॉजिकल प्रदूषण, वाहनों के धुएं, टॉक्सीसिटी और मिट्टी से खाद्य पदार्थों तक जाने वाले विषैले तत्वों की जांच अगले साल तक शुरू हो जाएगी। पर्यावरण संरक्षण मंडल अगले साल 5 जून को इसका लोकार्पण करेगा। अभी तक प्रदेश इस तरह की जांच के लिए दूसरे राज्यों पर आश्रित है।

पर्यावरण संरक्षण मंडल की यह लैब नवा रायपुर में बनाई जा रही है। 37 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक केंद्रीय पर्यावरण लैब बनाई जा रही है, जिसमें हवा, पानी और मिट्टी की ऐसी 138 एडवांस जांच हो सकेगी। केंद्रीय पर्यावरण लैब से प्रदेश की आबोहवा को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इस अत्याधुनिक लैब में करीब 27 करोड़ से अधिक की 40 प्रकार की आधुनिक मशीनें स्थापित की जाए़गी।

यह जांच हो पाएगी
पानी प्रदूषण की 70 से ज्यादा, मिट्टी की गुणवत्ता की 30 से अधिक, एयर क्वालिटी की जांच के लिए 15 से ज्यादा टेस्ट हो सकेंगे। इसके अलावा हवा, मिट्टी, पानी में घुलने वाले हैवी लौह कणों की जांच भी हो पाएगी। उद्योगों से निकलने वाले जहरीले धुएं और पानी की 15 प्रकार की जांच होगी। मिट्टी, पानी और हवा में मिलने वाले लिचेट (टीसीएलबी), मेटल, पेस्टिसाइड, कोरियोसिटी, रिएक्टिविटी और टॉक्सीसिटी जैसे खतरनाक अपशिष्टों की जांच भी हो सकेगी।

फैक्ट फाइल
हवा में लौह कण, घातक तत्व और गैसें, ऑर्गेनिक कार्बन की जांच
मिट्टी से अनाज-सब्जियों में मिलने वाले कीटनाशक, लिचेट, मेटल की जांच
पानी में तेल, मैटल, घातक तत्व, हैक्जावेलेंट क्रोमियम की जांच
138 एडवांस जांच
37 करोड़ रुपए की लागत

लैब भवन की बिजली सोलर एनर्जी से
नवा रायपुर के सेक्टर-19 में बन रही दो मंजिला सेंट्रल पर्यावरण लैब तकरीबन 4776 वर्गमीटर में बनाया जा रहा है। फर्स्ट फ्लोर का काम पूरा हो चुका है। यह भवन इको फ्रेंडली और ग्रीन बिल्डिंग सिस्टम से बनाई जा रही है। भवन की बिजली सोलर एनर्जी से जलेगी। ग्राउंड फ्लोर पर शहर व गांवों की मॉनिटरिंग का सेंटर रहेगा। 1225 वर्गमीटर के पहले फ्लोर पर एडवांस लैब का पूरा सेटअप लगाया जाएगा। पर्यावरण वैज्ञानिक और छात्र-छात्राओं के लिए रिसर्च के संसाधन उपलब्ध रहेंगे। भवन 12 करोड़ रुपए में तैयार होगा।

एडवांस लैब के प्रथम तल का काम पूरा हो चुका है। अगले साल 5 जून को इसका लोकार्पण कर दिया जाएगा। लैब में पर्यावरण सें संबंधित रिसर्च और स्टडी की जाएगी। पर्यावरण, मिट्टी, हवा और पानी की जांच की आधुनिक सुविधा रहेगी।
- आरपी तिवारी, सदस्य सचिव, पर्यावरण संरक्षण मंडल