
Chhattisgarh Foundation Day: 21 बरस का छत्तीसगढ़, जानिए इनका इतिहास और खास बातें
रायपुर. Chhattisgarh Foundation Day: 1 नवंबर साल 2000, यह वह तारीख है जब मध्यप्रदेश से विभाजित होकर छत्तीसगढ़ का निर्माण हुआ। अपनी अलग संस्कृति, अपनी अलग बोली-भाषा, अपना अलग रहन-सहन, खान-पान, अपनी अलग भौगोलिक परिस्थितियों और अपनी अलग चुनौतियों का सामना करते हुए विश्व पटल पर छत्तीसगढ़ अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहा है। आज हमारा अपना राज्य 21 बरस का होने जा रहा है।
बीते 21 सालों के पन्नों को पलटकर देखें तो राज्य के हर व्यक्ति ने इसकी नींव को मजबूत करने में अपना योगदान दिया। अब इस नींव पर मजबूत इमारत बनाने की जरुरत है। इसके लिए हम सबको एकजुट होकर, एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढऩा है। क्योंकि चुनौती कई हैं। अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, नौकरी के अवसर, उन्नत खेती और किसानों को उसके दाम, कलाकारों को सम्मान, उद्योगों का विकास और नक्सलवाद का समूलनाश। आओ बेहतर कल के लिए आज से जुटें...।
चिकित्सा व्यवस्था: ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल खोलने मिलेगी ताकत
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने के लिए सरकार निजी क्षेत्र की सेवाएं लेने जा रही है। अस्पताल निर्माण के लिए निजी क्षेत्रों को राज्य सरकार द्वारा अनुदान देगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर उद्योग विभाग उसका प्लान तैयार कर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए अनेक कार्य हुए मगर छोटे जिला मुख्यालयों एवं विकासखंड मुख्यालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता चुनौती बनी हुई है। यह उसी दिशा में बढ़ाया गया कदम है, ताकि स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार हो।
गोधन न्याय योजना: तीन गोठनों में गोबर से बनाएंगे बिजली
गोबर खरीदी के लिए बने गोधन न्याय योजना अब देश के लिए मॉडल बनती जा रही है। इससे ग्रामीणों की न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि हमने बिजली के मामले में आत्मनिर्भर होने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
आय में इजाफा: वनोपज से बदल रहा आदिवासियों का जीवन
राज्य सरकार इस समय 52 प्रकार की लघु वनोपज की खरीदी कर रही है। जबकि पहले मात्र सात प्रकार के वनोंपजों की खरीदी होती थी। इससे आदिवासियों और वनवासियों को रोजगार के साथ ही आय में इजाफा हो रहा है। वनोपज प्रसंस्करण कर विदेशों तक इसकी आपूर्ति की जा रही है।
राजकीय गीत मिला: छत्तीसगढ़ की संस्कृति को मिली नई पहचान
छत्तीसगढ़ के युवा होने के साथ ही छत्तीसगढ़ी कला और संस्कृति को नई पहचान मिल रही है। विकास के इस छत्तीसगढ़ी मॉडल की चर्चा सभी जगह हो रही है। छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहारों पर छुट्टी घोषित हुई। प्रदेश को राजकीय गीत मिला। मुख्यमंत्री निवास में तीजा-पोरा के आयोजनों की शुरुआत हुई। स्कूली पाठ्यक्रमों को छत्तीसगढ़ी भाषा की झलक दिखाई देनी शुरू हुई।
छत्तीसगढ़ी मॉडल: भूमिहीन मजदूरों को भी मिलेगा न्याय
राज्य सरकार ने भूमिहीन मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर ना योजना शुरू करने जा रही है। इसके लिए 30 नवंबर तक पंजीयन होगा। इसमें चिन्हांकित हितग्राही परिवार के मुखिया को 6 हजार रुपए की अनुदान सहायता राशि प्रतिवर्ष दी जाएगी। इसमें एक चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पुरोहित जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक तथा राज्य शासन द्वारा समय-समय पर नियत अन्य वर्ग भी पात्र होंगे, यदि उस परिवार के पास कृषि भूमि नहीं है।
Published on:
01 Nov 2021 11:56 am
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