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छत्तीसगढ़ सरकार शराब पर बैन लगाए, संसद में सेंगोल की स्थापना पर भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया बड़ा बयान

Chhattisgarh Hindi news : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सेंगोल न्याय और सुशासन का प्रतीक है। क्या संसद में सेंगोल की स्थापना से देश में न्याय और सुशासन आ जाएगा!

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रायपुर. Shankaracharya in raipur : देश में अभी चहुंओर नए संसद भवन की चर्चा है। यहां लोकसभा स्पीकर की कुर्सी के ठीक ऊपर स्थापित सेंगोल भी काफी सुर्खियां बटोर रहा है। यह एक राजदंड है जिसका इतिहास 5000 साल से ज्यादा पुराना है। जोशीमठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इसे लेकर बड़ा बयान दिया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सेंगोल न्याय और सुशासन का प्रतीक है। क्या संसद में सेंगोल की स्थापना से देश में न्याय और सुशासन आ जाएगा! उन्होंने बताया कि पुराने संसद भवन में भी स्पीकर की कुर्सी के ठीक ऊपर संस्कृत में लिखा था ’यतो धर्मस्ततो जय:’। मतलब जहां धर्म है, वहां विजय है। क्या 75 सालों तक देश इसी सिद्धांत पर चलता रहा? नहीं न! इसका मतलब यही है कि पंक्तियों और प्रतीक चिन्हों को अपनाने से बदलाव नहीं आने वाला है। ऐसा कर हम उन पंक्तियों और प्रतीकों की उपेक्षा करते हैं। अगर वाकई में धर्म, न्याय और सुशासन की स्थापना करनी है तो राजनीतिक दलों में इच्छाशक्ति होनी भी जरूरी है।

शंकराचार्य आश्रम में 64 योगिनियों की स्थापना संपन्न

Shankaracharya in raipur : बोरियाकला के शंकराचार्य आश्रम में जोशीमठ और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य का आगमन चौसठ योगिनी की स्थापना के लिए हुआ था। पहले शतचंडी यज्ञ भी चल रहा था। इस यज्ञ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने आहुतियां डाली।


छत्तीसगढ़ में अपराध का कारण शराब, इस पर बैन लगाए सरकार
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर भी खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अपराध का सबसे बड़ा कारण शराब है। सरकार ने यहां की जनता से शराबबंदी का वादा किया था तो उसे पूरा भी करना चाहिए। इससे समाज की दशा सुधरेगी और राज्य सही दिशा में प्रगति कर पाएगा। आज शराब की वजह से ना जाने कितनी ही परिवार तबाह हो रहे हैं। महिलाओं और बच्चों का बुरा हाल भी इसी वजह से है।
आदिवासियों को हिंदू नहीं बताना धर्म बांटने की राजनीतिक साजिश

छत्तीसगढ़ में इन दिनों जनजातीय समूह खुद को हिंदू मानने से इंकार कर रहे हैं। शंकराचार्य ने इस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि हिंदुओं और आदिवासियों की जड़ें एक समान हैं। दोनों के पूर्वज एक ही थे। हमारी पूजा और जीने के तौर तरीके एक समान हैं। आज अगर दोनों को अलग-अलग बताने की कोशिश की जा रही है तो यह धर्म बांटने की राजनीतिक साजिश है। यह बात वनवासियों को समझनी होगी। यह विभाजन हमें कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।

बेटियों की गिरफ्तारी बर्दाश्त नहीं कुश्ती महासंघ मामले में हो जांच: दिल्ली में प्रदर्शन कर रही महिला पहलवानों की गिरफ्तारी पर भी शंकराचार्य ने एतराज जताया। एक ओर जहां पूरा देश नारी सशक्तिकरण और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बातें कर रहा है, तब अपने अधिकार के लिए लड़ रही बेटियों की गिरफ्तारी किसी हाल में बर्दाश्त नहीं है।

अगर वे कुश्ती महासंघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही हैं तो जांच होनी ही चाहिए। यदि सांसद निर्दोष हैं तो जांच के बाद उन्हें निर्दोष घोषित करने में हर्ज क्या है!