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प्रणय के जज्बे को सलाम! हादसे में गंवाया एक पैर, 14 मेजर सर्जरी के दर्द से गुजरे, अब व्हीलचेयर पर ली डिग्री

Chhattisgarh IIIT convocation: ट्रिपलआईटी के दीक्षांत समारोह में गरियाबंद निवासी प्रणय देसई व्हीलचेयर पर अपनी डिग्री लेने पहुंचे। उस वक्त हर आंख नम हो गई और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा..

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Chhattisgarh IIIT convocation

प्रणय ने व्हीलचेयर पर ली डिग्री ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh IIIT convocation: ताबीर हुसैन. ट्रिपलआईटी के दीक्षांत समारोह में उस वक्त हर आंख नम हो गई और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जब 2023 बैच के छात्र प्रणय देसई व्हीलचेयर पर अपनी डिग्री लेने पहुंचे। प्रणय के संघर्ष और हौसले को देख मुख्य अतिथियों ने मंच की औपचारिकताएं किनारे कर दीं और खुद नीचे आकर उन्हें स्नातक की उपाधि सौंपी। गरियाबंद निवासी प्रणय के लिए यह सफर कांटों भरा रहा है। चार महीने पहले राजधानी रायपुर में हुए एक भीषण सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।

Chhattisgarh IIIT convocation: टांके भी नहीं कटे

इस दुर्घटना में प्रणय ने अपना एक पैर खो दिया। अब तक वे 14 मेजर सर्जरी के दर्द से गुजर चुके हैं और फिलहाल उनके टांके भी नहीं कटे हैं। शरीर में असहनीय दर्द और भविष्य की धुंधली तस्वीरों के बीच प्रणय ने दीक्षांत समारोह में आकर साबित कर दिया कि मंजिलें पैरों से नहीं, इरादों से फतह की जाती हैं।

पैरेंट्स की खुशी के लिए व्हीलचेयर को बनाया ढाल

डेटा साइंस के मेधावी छात्र प्रणय बताते हैं कि सच कहूं तो मैं आना नहीं चाहता था। व्हीलचेयर पर इस हाल में खुद को देखना और लोगों का सामना करना मुझे कचोट रहा था। लेकिन मेरे माता-पिता की आंखों में मुझे गाउन पहने देखने की जो चमक थी, वही मेरी सबसे बड़ी ताकत बन गई। पुणे में एक प्रतिष्ठित नौकरी कर रहे प्रणय फिलहाल डॉक्टरों की सलाह पर आराम कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह डिग्री उनके पुनर्वास और नई शुरुआत की पहली जीत है।

22 में से 18 स्वर्ण लडक़ों के खाते में

नया रायपुर स्थित ट्रिपलआईटी का चौथा दीक्षांत समारोह बुधवार को कैंपस स्थित ऑडिटोरियम में हुआ। इसमें तीन बैच 2023, 2024 और 2025 के लिए 21 पीएचडी, 25 एमटेक, 1 एमएस (रिसर्च) और 506 बीटेक स्टूडेंट्स को उपाधि दी गई। इसमें ब्वॉयज को सबसे ज्यादा 9 गोल्ड और 4 सिल्वर मेडल मिले। वहीं कुल 9 सिल्वर मेडल लडक़ों को ही मिले, जबकि गल्र्स ने चार मेडल प्राप्त किए। मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष प्रो. उमेश वी. वाघमारे रहे। इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में किरण देशपांडे, को फाउंडर - मोजो नेटवर्क्स और टेक महिंद्रा के पूर्व सीईओ, बीओजी चेयरमैन प्रो. धनंजय पांडेय, डायरेक्टर प्रो. ओपी व्यास सहित अन्य अतिथि मौजूद थे।

डेटा ही नई संपत्ति: प्रो. वाघमारे

मुख्य अतिथि प्रो. वाघमारे कि, आज डेटा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकें तेजी से दुनिया को बदल रही हैं और युवाओं के सामने अपार अवसर हैं। डेटा ही नई संपत्ति है और इसे सही दिशा में उपयोग करना युवाओं के हाथ में है। अपने कॅरियर का चयन अपनी रुचि और जुनून के आधार पर करें। असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीखते हुए आगे बढऩा ही सफलता का रास्ता है। कोई भी उपलब्धि अंतिम नहीं होती और हर व्यक्ति में अपनी अलग क्षमता होती है, जिसे पहचानना जरूरी है। टीमवर्क, संवाद और सहयोग, आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। सच्ची सफलता वही है, जब व्यक्ति समाज को कुछ लौटाए और अपने ज्ञान से दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए।

सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती

किरण देशपांडे ने कहा कि, सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। हाल ही में मैंने 10 दिन पहले इकोलॉजी में एक कोर्स पूरा किया। सफलता में परिवार, शिक्षक और संस्थान की बड़ी भूमिका होती है, इसलिए उन्हें हमेशा याद रखें। इंटेलिजेंस अब सामान्य हो रही है, लेकिन विजडम यानी सही निर्णय लेने की क्षमता इंसानों के हाथ में है।

बेसिक फाउंडेशन से मास्टर चेंज की ओर

आगरा के यशवर्धन गौतम को इंस्टीट्यूड गोल्ड मेडल फॉर ऑल राउंड परफॉरमेंस इन बीटेक 2025 और इंस्टीट्यूट सिल्वर मेडल फॉर ओवरऑल हाइएस्ट जीपीए इन डिग्री इन डाटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में मिला। उन्होंने बताया कि मैंने 12वीं के बाद एक साल का गेप लेकर जेईई की तैयारी की। मैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही करना चाहता था और पिता ने भी उस कोर्स पर जोर दिया। अभी तो मैं सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में बेसिक फाउंडेशन बिल्ड करना चाहता हूं। आगे मास्टर्स इन एमएल करूंगा।

दो दोस्त: एक को सिल्वर दूसरे को गोल्ड

दीक्षांत समारोह में एक ही एंट कॉलोनी के दो दोस्तों में एक को गोल्ड तो दूसरे को सिल्वर मेडल मिला। दुर्ग के तुषार रूसिया (ईसीई) को सिल्वर मेडल, जबकि शिकोहाबाद के क्षितिज चौहान (सीएसई) ने गोल्ड मेडल जीता। दोनों की दोस्ती कॉलेज के हॉस्टल में बनी, जहां रामानुजन हॉस्टल के ग्राउंड फ्लोर पर उनका ग्रुप एंट कॉलोनी के नाम से जाना जाता था। कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई ने शुरुआत को मुश्किल जरूर बनाया, लेकिन ऑफलाइन आते ही यह दोस्ती उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।

बेटा अमरीका में, पिता पहुंचे गोल्ड लेने

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग ब्रांच के आकाश अग्रवाल को ऑलराउंड परफॉरमेंस के िलए गोल्ड मेडल मिला। मेरठ से आए पिता ने बताया कि आकाश अमरीका में पीएचडी कर रहे हैं इसलिए मेडल लेने कॉलेज नहीं पहुंछ पाए। आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण बैंक और रिश्तेदारों से लोन लेकर मैंने बच्चों को पढ़ाया। 2019 में सबसे आखिर में आकाश ने एडमिशन लिया था, वहीं आज फस्र्ट है।