
CG News: पहले बेरोजगार युवाओं को नौकरी देने के नाम पर 45 दिन का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जब बेरोजगार नौकरी के लिए पंचायत पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि उसका मानदेय पीएचई विभाग की ओर से दिया जाएगा। जब छात्र पीएचई विभाग पहुंचे तो अधिकारी अनिल बच्चन ने कहा कि 45 दिन ट्रेनिंग करने के बाद कोई नौकरी थोड़ी मिल जाती है।
यह बातें जल जीवन मिशन अंतर्गत, नल जल मित्र कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके छात्राओं ने कहा। दरअसल मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत लाईवलीहुड कॉलेज में नल जल मित्र कार्यक्रम के तहत 120 छात्र को प्रशिक्षण दिया गया। उनके प्रशिक्षण के आधार पर ही ग्राम पंचायतों में जल वितरण के संचालन और संधारण के कार्य के लिए उनका चयन भी हुआ है।
इनसे मिशन के अंतर्गत मशीन का संचालन रिपेयरिंग समेत अन्य कार्य इनसे कराना था। लेकिन प्रशिक्षण के बाद भी इनको नौकरी नहीं दी गई। जबकि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) ने इसके लिए ग्राम पंचायतों को पत्र भी जारी किया था। जिसमें चयनित युवाओं को पंचायत स्तर पर मानदेय के आधार पर नौकरी पर रखने के लिए अनुशंसा की गई थीं। इसके बावजूद इन युवाओं को अब तक नौकरी नहीं मिल पाई हैं। अब छात्र नौकरी की आस में पंचायत, पीएचई विभाग, कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ के कार्यालयों में भटक रहे हैं।
इन्हें प्रशिक्षण देने के लिए जिले के प्रत्येक पंचायत से एक युवा का चयन किया गया। इन्हें कॉलेज में 45 दिन के लिए प्रशिक्षण दिया गया। अब तक 4 बैच का प्रशिक्षण हो चुका है, प्रत्येक बैच में 30 छात्र शामिल रहे। 5वां बैच चल रहा है। चार बैच के प्रशिक्षार्थी के नौकरी के लिए अब भटक रहे है। वहीं कॉलेज की ओर से अब छात्रों को कह दिया गया कि हमारा काम प्रशिक्षण देना था।
गांव के सरपंच की ओर से युवाओं को डिटेल भेजा गया था। जिसमें उनसे आधार कार्ड, 10-12वीं मार्कशीट की फोटोकॉपी, दो पासपोर्ट साइज फोटो, स्टूडेंट को कॉलेज व हॉस्टल की सुविधा, ट्रेनिंग के बाद नौकरी ग्राम पर ही, मानदेय पीएचई विभाग की ओर से 10-15 हजार तक की बात है। साथ ही सहमति पत्र में सील और सिग्नेचर अनिवार्य रखा गया।
छात्र अपनी समस्या को लेकर पहुंचे थे, उन्हें जल जीवन मिशन के अंतर्गत नल जल मित्र का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्हें पंचायत की ओर से रखा जाएगा।
पता नहीं नौकरी देने की बात किसने की थीं, मुझे इस बारे में नहीं मालूम है। स्किल डेलवपमेंट के लिए प्रशिक्षण दिया गया। उसके बाद ये प्राइवेट काम भी कर सकते हैं, ऐसा नहीं है कि उन्हें नौकरी दी जाएगी। पंचायत उनको रखेगा, कि नहीं मैं नहीं जानता।
अनिल बच्चन, जिला अधिकारी, पीएचई विभाग रायपुर
Published on:
09 Apr 2026 12:19 pm
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