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Chhattisgarh Incident: बंदर का शिकार करने पेड़ पर चढ़ा तेंदुआ, और फिर जो हुआ जानकर आपके उड़ जाएंगे होश

Raipur News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में करंट की चपेट में आए तेंदुए को बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान तेंदुए की मौत हो गई।

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Incident News: रायपुर पांडुका फॉरेस्ट रेंज के सांकरा में रविवार को एक तेंदुए की मौत हो गई। सुबह उसे गांव से लगे मुरही खार में तड़पते हुए पाया गया। पास ही एक पेड़ है, जिस पर 11 केवी बिजली का तार भी लटक रहा था। माना जा रहा है कि तेंदुआ 40-50 फीट ऊंचे इस पेड़ पर बंदरों का शिकार करने चढ़ा होगा। इस दौरान बिजली के तार की चपेट में आने से नीचे गिर गया। रीढ़ की हड्डी टूटने से उसकी मौत हो गई।

बताते हैं कि मृत तेंदुआ मादा है। उसकी उम्र 2 साल के करीब होगी। गांववालों ने सुबह 6 बजे जब तेंदुए को मुरही खार में तड़पता देखा, तो फौरन वन विभाग के जिम्मेदारों को फोन पर सूचना दी। रेस्क्यू के लिए वन विभाग की टीम 9 बजे के आसपास पहुंची। प्राथमिक उपचार के लिए उसे यहां से गजराज वाहन पर लिटाकर पांडुका के पशु चिकित्सालय ले जाया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि अत्यधिक ऊंचाई से गिरने की वजह से रीढ़ की हड्डी टूट गई है। तेंदुए के इलाज के लिए रायपुर के जंगल सफारी से एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम खबर लगने के पूरे 6 घंटे बाद 12 बजे पांडुका पहुंची। इसके बाद करीब साढ़े 6 घंटे तक इलाज का दौर चला। 6.30 बजे तेंदुए की मौत हो गई।

Chhattisgarh Incident: 2 बार सांस टूटी, फिर लौट भी आई इधर, पोस्टमार्टम की हो गई थी तैयारी

पांडुका में जहां तेंदुए का इलाज चल रहा था, पत्रिका टीम भी वहां मौजूद रही। इलाज के दौरान ऐसा भी मौका आया, जब तेंदुए की सांस अचानक टूट गई। डॉक्टर उसे मृत मानकर फटाफट पोस्टमार्टम की तैयारी करने में लग गए। हालांकि, तेंदुए की सांस फिर लौट आई। ऐसा एक नहीं, दो बार हुआ। दोनों बार डॉक्टरों को पोस्टमार्टम की हड़बड़ी थी। कह सकते हैं कि डॉक्टर मरने से पहले ही उसे मृत मान चुके थे।

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यहां दवाई नसीब नहीं, रायपुर रेफर भी नहीं किया, बच सकता था तेंदुआ

रायपुर से एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम आने के बाद तेंदुए का ट्रीटमेंट शुरू हुआ। डॉक्टरों ने इलाज के लिए जिन दवाइयों की जरूरत बताई, उसके लिए अफसरों ने राजिम तक दौड़ लगाई। किसी मेडिकल स्टोर में दवाई नहीं मिली। गरियाबंद से डीएफओ लक्ष्मण सिंह, एसडीओ मनोज चंद्राकर और रेंजर संतोष चौहान भी मौके पर पहुंचे थे। तेंदुए की गंभीर हालत को देखते हुए लोगों ने कहा भी कि उसे रायपुर रेफर कर दें। अफसर नहीं माने। समय पर बेहतर इलाज और दवाइयां मिलती तो संभवत: तेंदुआ बच सकता था।

मादा तेंदुआ की उम्र 2 साल थी। रीढ़ की हड्डी बुरी तरह टूट चुकी थी। शरीर के दूसरे अंगों में भी काफी चोट आई थी। बेहतर इलाज देने की पूरी कोशिश की गई। शाम साढ़े 6 बजे उसकी मौत हो गई।
डॉ. राजेश वर्मा, वन्य प्राणी चिकित्सा अधिकारी

घायल तेंदुए के बारे में हमें सुबह जानकारी मिल गई थी। इलाज के लिए हमने तत्काल रायपुर से टीम बुलाई। ज्यादा घायल होने की वजह से उसके बचने की संभावना कम थी। डॉक्टरों ने अपनी ओर से पूरी कोशिश की।