
मोहित सिंह सेंगर, रायपुर। Chhattisagarh Kusum Bhaji : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने कुसुम भाजी (Chhattisagarh Kusum Bhaji ) की नई किस्म तैयार की है। वैज्ञानिकों का कहना है, कि कुसुम भाजी के बीज से तैयार होने वाले तेल में ऐसे तत्व मिले है। जो दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने का काम करते हैं। विवि में परीक्षण के बाद भारतीय तिलहन अनुसंधान केन्द्र हैदराबाद में भी किए परीक्षण में विकसित की गई नई किस्म में से एक में 80 प्रतिशत तक संतृप्त व असंतृप्त वसा होना पाया गया है। इसमें विटामिन एफ जो असंतृप्त वसी अम्ल ओमेगा 3 व ओमेगा 6 कहलाते हैं की संतुलित मात्रा मिली है। इसमें विटामिन ए, विटामिन ई, टोकोफेराल व विटामिन के की मात्रा भी मिली है। जो मधुमेह समेत अन्य रोगों के रोकथाम में उपयोगी है।
विवि के वैज्ञानिकों ने तैयारी की गई कुसुम भाजी के दो किस्मों के नाम का खुलासा है। विवि के वैज्ञानिक तीसरी किस्म पर अभी काम कर रहे है, उसमें सफल होने के बाद उसके नाम का खुलासा होगा। जिन किस्मों पर भारतीय तिलहन अनुसंधान केन्द्र हैदराबाद ने अधिसूचित कर लिया है उन्हें सीजी कुसुम-1, आईजीकेवी कुसुम नाम दिया गया है।
125 दिन में फसल होगी तैयार
प्रजाति तेल की मात्रा फसल तैयार उत्पादन प्रति होने का समय हेक्टेयर
सीजी कुसुम 1 33% 125 दिन 1740 किलो
आईजीकेवी कुसुम 35% 135 दिन 1800 किलो
तीसरी प्रजाति 35% 145 दिन 1800 किलो
किस्म का ये नाम रखा वैज्ञानिकों ने
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कुसुम की तीन किस्मों को तैयार किया है। ये किस्म इंसान के दिल के लिए फायदेमंद हैं। सूखाग्रस्त इलाके में इस किस्म की अच्छी पैदावार हो सकती है। वर्षों की रिसर्च के बाद इसे तैयार किया गया है।
-डॉ. विवेक त्रिपाठी, संचालक कृषि अनुसंधान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
मार्च 2016 से कर रहे रिसर्च
टीम के वैज्ञानिकों ने बताया, कि छत्तीसगढ़ में बर्रे भाजी जिसे कुसुम या सेफ फ्लावर भी कहते हैं। कुसुम भाजी की नई किस्म तैयार करने के लिए मार्च 2016 से प्रयोग किया जा रहा है। इसका बीज आने वाले दो सालों में प्रदेश के किसानों को मिलेगा।
Updated on:
01 Nov 2022 04:08 pm
Published on:
01 Nov 2022 02:22 pm
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