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छत्तीसगढ़ में बारिश का अजीब ट्रेंड! कहीं झमाझम तो कहीं सूखे जैसे हालात, जानें रैनशेडो का असर

Chhattisgarh Rainfall: छत्तीसगढ़ में मानसून के बीच बारिश का असमान पैटर्न देखने को मिल रहा है। सरगुजा समेत कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी इलाकों में Rain Shadow Effect इसकी एक वजह हो सकता है।
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Chhattisgarh Weather Update

Chhattisgarh Weather Update: 8 जिलों में सामान्य से कम बारिश(photo-patrika)

Chhattisgarh Weather Update: छत्तीसगढ़ में मानसून के बीच बारिश का पैटर्न एक जैसा नहीं है। प्रदेश के कुछ जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। खास बात यह है कि कम बारिश वाले अधिकांश जिले जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों के आसपास स्थित हैं। सरगुजा में अब तक सबसे कम बारिश हुई है। यहां 502.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश से 42 फीसदी कम है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी भौगोलिक संरचना और मानसूनी हवाओं की दिशा के कारण कुछ इलाकों में रैनशेडो इफेक्ट बन सकता है।

Rain Shadow Effect: 8 जिलों में सामान्य से कम बारिश

बारिश के आंकड़ों के मुताबिक सरगुजा, बेमेतरा, कांकेर, जशपुर, बस्तर, कवर्धा, कोंडागांव और सुकमा में सामान्य से कम बारिश हुई है। इनमें बेमेतरा में 41 फीसदी, कांकेर में 40 फीसदी, जशपुर में 34 फीसदी, बस्तर में 27 फीसदी और कवर्धा व कोंडागांव में 23-23 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। सुकमा में भी सामान्य से 20 फीसदी कम बारिश हुई है।

जिला अब तक बारिश सामान्य बारिश कमी

  • सरगुजा 502.1 मिमी 872.3 मिमी 42%
  • बेमेतरा 457.7 मिमी 772 मिमी 41%
  • कांकेर 598.9 मिमी 991.7 मिमी 40%
  • जशपुर 657.5 मिमी 999.5 मिमी 34%
  • बस्तर 633.1 मिमी 861.8 मिमी 27%
  • कवर्धा 464.5 मिमी 603.2 मिमी 23%
  • कोंडागांव 656.3 मिमी 853.1 मिमी 23%
  • सुकमा 701 मिमी 875.1 मिमी 20%

क्या है रैनशेडो इफेक्ट?

जब नम हवाएं समुद्र या किसी बड़े जलस्रोत से चलकर पहाड़ों से टकराती हैं, तो हवा ऊपर उठती है। ऊंचाई पर तापमान कम होने से बादल बनते हैं और पहाड़ के सामने वाले हिस्से में ज्यादा बारिश होती है। इसके बाद जब हवा पहाड़ को पार कर दूसरी ओर नीचे उतरती है, तो वह गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क हो जाती है। इस कारण पहाड़ के दूसरी तरफ बारिश कम होती है। इसी क्षेत्र को रैनशेडो जोन कहा जाता है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के कुछ पहाड़ी और पठारी इलाकों में इसी तरह की भौगोलिक स्थिति बारिश के वितरण को प्रभावित कर सकती है।

सरगुजा-जशपुर में पहाड़ों का असर

सरगुजा और जशपुर उत्तर छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और वन क्षेत्रों में आते हैं। दोनों इलाके छोटानागपुर पठार के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं। बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं का यहां भौगोलिक परिस्थितियों से सामना होता है। पहाड़ी संरचना के कारण कुछ क्षेत्रों में बारिश का वितरण असमान हो सकता है।

बस्तर और कांकेर में घाटियों का प्रभाव

बस्तर और कांकेर प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में स्थित हैं। यहां पूर्वी घाट और आसपास की पहाड़ी संरचना का असर देखने को मिलता है। पहाड़ों और घाटियों के कारण कुछ क्षेत्रों में बारिश अधिक तो कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत कम हो सकती है। कांकेर में मैकाल रेंज की भौगोलिक स्थिति भी मानसूनी हवाओं को प्रभावित कर सकती है।

कवर्धा में दो तरफ से पहाड़ी प्रभाव

कवर्धा मैकाल रेंज और सतपुड़ा क्षेत्र के बीच स्थित है। पश्चिम से आने वाली अरब सागर की हवाएं यहां तक पहुंचते-पहुंचते कमजोर हो सकती हैं। वहीं बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं को भी पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में जिले के कुछ हिस्सों में आसपास के क्षेत्रों की तुलना में बारिश कम होने की संभावना रहती है।

बेमेतरा में भी बारिश का असमान वितरण

बेमेतरा मध्य छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्र में है, लेकिन इसके आसपास मैकाल, सतपुड़ा और पूर्वी घाट की भौगोलिक संरचनाएं मानसूनी हवाओं को प्रभावित कर सकती हैं। अलग-अलग दिशाओं से आने वाली हवाओं में नमी कम होने पर यहां बारिश अपेक्षाकृत कम हो सकती है। इस सीजन में बेमेतरा में सामान्य से 41 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।

सुकमा-कोंडागांव में पठारी क्षेत्र का असर

सुकमा और कोंडागांव बस्तर संभाग के हिस्से हैं। यहां पूर्वी घाट और दंडकारण्य पठार की भौगोलिक संरचना मौजूद है। पहाड़ी क्षेत्रों से गुजरने वाली मानसूनी हवाओं के कारण कुछ इलाकों में बारिश की मात्रा प्रभावित हो सकती है।

अगले 7 दिन भारी से अतिभारी बारिश के आसार

मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों में प्रदेश के मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में भारी से अतिभारी बारिश होने की संभावना है। इससे फिलहाल कम बारिश वाले कुछ जिलों को राहत मिल सकती है। मानसून सक्रिय रहने के कारण आने वाले दिनों में बारिश के आंकड़ों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

पिछले 24 घंटे में कई इलाकों में बारिश

पिछले 24 घंटे के दौरान रामचंद्रपुर में 5 सेमी, पेंड्रारोड और अंतागढ़ में 4-4 सेमी बारिश दर्ज की गई। रेंगाखारकला, पखांजूर और मरवाही में 3-3 सेमी पानी गिरा। सकोला, मनोरा, कोटाडोल, पोंडी बचरा और पोड़ी उपरोड़ा में 2-2 सेमी बारिश हुई। पसान, कोरिया, फरसगांव, दुर्ग, औंधी और गंगालूर में भी बारिश दर्ज की गई। राजधानी रायपुर में करीब 3 सेमी बारिश हुई।

बारिश से गिरा तापमान

रायपुर में सुबह से दोपहर तक रुक-रुककर बारिश होने से तापमान में भी गिरावट आई। शनिवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस रहा। दोनों ही तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किए गए।

विशेषज्ञ बोले- रैनशेडो हो सकता है एक कारण

पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल, मौसम विभाग एमएल साहू के अनुसार प्रदेश के कुछ जिले रैनशेडो वाले क्षेत्रों में आते हैं, जहां सामान्य से कम बारिश होती है। हालांकि बारिश के लिए कई अन्य मौसम संबंधी कारक भी जिम्मेदार होते हैं। इस सीजन में सरगुजा, बेमेतरा, कांकेर, जशपुर, बस्तर और कवर्धा में कम बारिश होने के पीछे रैनशेडो एक संभावित कारण हो सकता है।