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छत्तीसगढ़ में कारोबारियों को बड़ी राहत! शहर बदलने पर नहीं बदलेगी License Fees, 43 श्रेणियों को छूट का प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ में व्यापार लाइसेंस फीस को एक समान करने की तैयारी है। ‘एक राज्य-एक नियम’ के तहत प्रस्ताव मंजूर होने पर शहर बदलने पर अलग-अलग शुल्क नहीं देना होगा और 43 श्रेणियों को छूट मिल सकती है।
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Chhattisgarh Business License

Chhattisgarh Business License: छत्तीसगढ़ में कारोबारियों को बड़ी राहत!(photo-patrika)

Chhattisgarh Business License: छत्तीसगढ़ में कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए लाइसेंस फीस को लेकर बड़ी राहत मिल सकती है। नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के अलग-अलग नगरीय निकायों में लागू व्यापार लाइसेंस शुल्क में एकरूपता लाने के लिए ‘एक राज्य-एक नियम’ के तहत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद शहर और निकाय बदलने पर एक ही कारोबार के लिए अलग-अलग लाइसेंस फीस देने की व्यवस्था खत्म हो सकती है।

Chhattisgarh Government: 20 से 40 गुना तक है शुल्क में अंतर

फिलहाल रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, बिरगांव समेत प्रदेश के अलग-अलग नगरीय निकायों में व्यापार लाइसेंस की दरें अलग-अलग हैं। एक ही श्रेणी के कारोबार के लिए कुछ निकायों में शुल्क काफी कम, तो कुछ जगह कई गुना अधिक है। कई मामलों में यह अंतर 20 से 40 गुना तक बताया गया है।उदाहरण के तौर पर अस्पताल श्रेणी में कोरबा में वार्षिक लाइसेंस शुल्क 2,500 रुपये है, जबकि रायपुर में इसी श्रेणी के लिए 12,500 रुपये शुल्क निर्धारित है। इसी तरह छोटे दुकानदारों और अन्य कारोबारियों को भी निकाय के हिसाब से अलग-अलग शुल्क देना पड़ता है।

कारोबार की श्रेणी के आधार पर तय होगा शुल्क

नगरीय प्रशासन विभाग के प्रस्ताव में कारोबार की श्रेणी के आधार पर पूरे प्रदेश में समान लाइसेंस शुल्क तय करने का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य व्यापारियों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना है।

प्रस्ताव में छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए रियायती शुल्क रखने की बात भी कही गई है। इसके अलावा 43 श्रेणियों के व्यापार और व्यवसायों को लाइसेंस शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव शामिल है।

व्यापारी संगठनों की मांग के बाद तैयार हुआ प्रस्ताव

व्यापार लाइसेंस शुल्क में एकरूपता की मांग लंबे समय से उठती रही है। व्यापारी संगठन कैट छत्तीसगढ़ की ओर से भी नगरीय प्रशासन विभाग के सामने इस मुद्दे को रखा गया था।

इसके बाद विभाग ने अलग-अलग नगरीय निकायों में लागू लाइसेंस फीस की समीक्षा की और एक समान व्यवस्था लागू करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया। अब शासन की मंजूरी के बाद इसे प्रदेशभर के नगरीय निकायों में लागू किया जा सकता है।

ऑनलाइन होगी लाइसेंस प्रक्रिया

प्रस्ताव में व्यापार अनुज्ञापन यानी ट्रेड लाइसेंस की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन, शुल्क भुगतान और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की व्यवस्था की जा सकती है। कैट के नेशनल वाइस चेयरमैन अमर पारवानी के मुताबिक, व्यापार अनुज्ञापन प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शासन के समक्ष प्रस्ताव रखा गया था।

छोटे कारोबारियों को ज्यादा राहत की उम्मीद

प्रस्तावित दरों में गुमटी, ठेला और कच्ची दुकान जैसे छोटे कारोबार के लिए शुल्क कम रखने का प्रावधान किया गया है। इससे छोटे दुकानदारों और स्वरोजगार करने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रस्ताव के अनुसार गुमटी, ठेला और कच्ची दुकान के लिए नई दर 100 से 500 रुपये, जबकि छोटी दुकान और कार्यालय के लिए 200 से 1,000 रुपये तक हो सकती है।

मेडिकल, होटल और बड़े कारोबार की भी प्रस्तावित दरें

मेडिकल स्टोर, होटल, रेस्टोरेंट और नर्सिंग होम जैसी श्रेणियों के लिए प्रस्तावित वार्षिक लाइसेंस शुल्क 5,000 से 10,000 रुपये के बीच रखा गया है। वहीं मॉल, सुपरमार्केट और बड़े प्रतिष्ठानों के लिए प्रस्तावित शुल्क 5,000 रुपये बताया गया है। ऑटो और अन्य वाहन आधारित कारोबार के लिए भी शुल्क को 100 से 500 रुपये के दायरे में रखने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित शुल्क एक नजर में

  • कारोबार की श्रेणी प्रस्तावित नई दर
  • गुमटी, ठेला, कच्ची दुकान ₹100–₹500
  • छोटी दुकान, कार्यालय ₹200–₹1,000
  • मेडिकल, होटल, रेस्टोरेंट, नर्सिंग होम ₹5,000–₹10,000
  • मॉल, सुपरमार्केट, बड़े प्रतिष्ठान ₹5,000
  • ऑटो, वाहन आधारित कारोबार ₹100–₹500

मंजूरी के बाद पूरे प्रदेश में लागू हो सकता है नियम

यदि शासन प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो प्रदेश के नगरीय निकायों में व्यापार लाइसेंस शुल्क की अलग-अलग व्यवस्था समाप्त हो सकती है। इससे कारोबारियों को शहर बदलने पर अलग शुल्क और नियमों की जानकारी जुटाने की परेशानी कम होगी। साथ ही डिजिटल प्रक्रिया लागू होने से लाइसेंस लेने की प्रक्रिया भी अधिक सरल और पारदर्शी होने की उम्मीद है।