
Chhattisgarh rajyotsava 2017
रायपुर . छत्तीसगढ़ को अलग पहचान दिलाने वाली उपलब्धियों में से एक यहां का राशन या कहें पीडीएस सिस्टम (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) है। करीब ढाई करोड़ से अधिक की आबादी को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना आसान नहीं है। लेकिन छत्तीसगढ़ में सुव्यवस्थित तरीके से संचालित पीडीएस सिस्टम ने यह कर दिखाया।
कहा जाता है कि यहां के पीडीएस प्रणाली की सफलता अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक रूप से एक रोल मॉडल माना जाता है। राज्य में पीडीएस प्रणाली की सफलता उस राजनीतिक इच्छाशक्ति का बेहतर उदाहरण है, जिसमें जनकल्याण सुनिश्चित करना पहली प्राथमिकता होती है। ऐसे में भ्रष्टाचार मुक्त लॉजिस्टिक चेन बनाया। राशन दुकानों में राशन की उपलब्धता को लेकर जवाबदेही निर्धारित की गई।
पहला राज्य... जिसने दिया सबको भोजन का अधिकार
छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने विधानसभा में कानून बनाकर राज्य के 58 लाख से ज्यादा गरीब परिवारों को भोजन का अधिकार दिया है। छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा कानून के तहत अंत्योदय परिवारों एक रुपए किलो में प्रति माह 35 किलो चावल दिया जा रहा है। अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में इन परिवारों को दो किलो और सामान्य क्षेत्रों में 1 किलो आयोडिनयुक्त नमक मुफ्त दिया जा रहा है। आदिवासी क्षेत्रों में गरीब परिवारों को पांच रुपए किलो की दर से दो किलो चना दिया जा रहा है।
चार बार राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरस्कार
राज्य में किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न तरह की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। राज्य की उत्पादकता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में बीते 6 वर्षों में ही राज्य ने चार बार राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरस्कार हासिल किया है। इनमें से तीन बार धान के सर्वश्रेष्ठ उत्पादन के लिए और एक बार दहलन के सर्वश्रेष्ठ उत्पादन के लिए राज्य को पुरस्कृत किया गया है।
32 नहीं 12 साल में काम
राज्य गठन के बाद से प्रदेश की सिंचाई क्षमता में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सिंचाई क्षमता के विकास में अब तक की पर्याप्त तेजी के बावजूद इस लक्ष्य को प्राप्त करने में 32 वर्षों का समय लग सकता है। लेकिन राज्य में 12 वर्षों में ही शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्णय लिया है।
राज्य बनने के बाद उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि
छत्तीसगढ़ और चावल दोनों का गहरा रिश्ता है। कहा जाता है कि छत्तीसगढिय़ा सबके बिना रह सकता है, लेकिन भात (चावल)के बिना नहीं। अनाज के रूप में छत्तीसगढ़ प्रमुख रूप से चावल उत्पादन पर जोर देता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य गठन के दौरान अब राज्य में कृषि उत्पादन में सकारात्मक बदलाव आया है। राज्य गठन के समय वर्ष 2000 में जहां खरीफ फसल के लिए कृषि भूमि 4636.37 हजार हेक्टेयर से वर्ष 2016 में यह आंकड़ा 4790.51 हजार हेक्टेयर हो चुका है। इसमें धान के कृषि भूमि में भले ही कमी हुई है, लेकिन उत्पादन दोगुना सहित और उत्पादकता में करीब ढाई गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
Updated on:
04 Nov 2017 04:30 pm
Published on:
04 Nov 2017 04:28 pm
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