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CG News : भोरमदेव मंदिर एक ओर 10 डिग्री तक झुक चुका , अब इसकी नींव को मजबूत करने विशेषज्ञों की निगरानी में हो रही खुदाई

विश्व प्रसिद्ध कवर्धा जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर (Bhoramdev Temple, Kawardha chhattisgarh) को छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है। एक हजार साल पुराने मंदिर (Bhoramdev Temple, Kawardha chhattisgarh) के संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। यह एक ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ -साथ लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र भी है।

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छत्तीसगढ़ का भोरमदेव मंदिर एक ओर 10 डिग्री तक झुक चुका , अब इसकी नींव को मजबूत करने विशेषज्ञों की निगरानी में हो रही खुदाई

कवर्धा जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर की मजबूती का काम शुरू हो गया है।

रायपुर। दुनिया भर में मशहूर कवर्धा जिले में स्थित धार्मिक और पुरातात्तविक स्थल भोरमदेव मंदिर (Bhoramdev Temple, Kawardha chhattisgarh) को सुरक्षित रखने और उसकी नींव को मजबूत करने के लिए एक बार फिर से काम शुरू हो चुका है। मंदिर एक ओर 10 डिग्री तक झुक चुका है। झुकान और न बढ़े इसके लिए नींव पर कार्य किया जा रहा है।

मंदिर (Bhoramdev Temple, Kawardha chhattisgarh) में इस बार नींव सुदृढ़ीकरण कार्य पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के सब इंजीनियर की देखरेख में हो रहा है। मुख्य रूप से प्रथम चरण में नींव का कार्य ही किया जाएगा। कलेक्टर कबीरधाम जन्मेजय महोबे ने बताया कि पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग की तकनीकी विशेषज्ञ टीम ने भोरमदेव मंदिर (Bhoramdev Temple, Kawardha chhattisgarh) का अवलोकन किया। विभाग प्रमुख से भी हमारी बात हुई कि तकनीकी विशेषज्ञ की देखरेख में ही कार्य कराया जाएगा। जिला प्रशासन की टीम भी इसका लगातार अवलोकन करती रहेगी।

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विशेषज्ञों की टीम
मंदिर (Bhoramdev Temple, Kawardha chhattisgarh) में लगातार हो रहे झुकाव को देखने व इस समस्या को दूर करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम आई हुई है। यह टीम निरीक्षण करने के साथ ही यह भी उपाय तलाशेगी कि मंदिर की नींव को किस प्रकार की मजबूती की जरूरत है ताकि भविष्य में मंदिर का झुकना बंद हो और अपने मूल ढांचे पर खड़ा हो सके।

इसलिए कहा जाता है छत्तीसगढ़ का खजुराहो

बहुचर्चित भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ (Bhoramdev Temple, Kawardha chhattisgarh) के कबीरधाम ज़िले में कवर्धा से 18 कि.मी. दूर तथा रायपुर से 125 कि.मी. दूर चौरागाँव में एक हजार वर्ष पुराना मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसका निर्माण लगभग 7 से 11 वीं शताब्दी तक की अवधि में बनाया गया था। यहाँ मंदिर में खजुराहो मंदिर की झलक दिखाई देती है, इसलिए इस मंदिर को "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" भी कहा जाता है। निर्माण की कला को देखें तो मंदिर का मुख पूर्व की ओर है। मंदिर नागर शैली का एक सुन्दर उदाहरण है।

मंदिर में तीन ओर से प्रवेश किया जा सकता है। मंदिर (Bhoramdev Temple, Kawardha chhattisgarh) एक पाँच फुट ऊंचे चबुतरे पर बनाया गया है। तीनों प्रवेश द्वारों से सीधे मंदिर के मंडप में प्रवेश किया जा सकता है। मंडप की लंबाई 60 फुट है और चौड़ाई 40 फुट है। मंडप के बीच में 4 खंबे हैं तथा किनारे की ओर 12 खम्बे हैं, जिन्होंने मंडप की छत को संभाल रखा है। अब इस मंदिर के रखरखाव को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है ।