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छत्तीसगढ़ के युवा ने बनाया 32 किलो का एग्रीकल्चर ड्रोन

25 लीटर कैपिसिटी का ड्रोन जो 10 मिनट में एक एकड़ खेत में करेगा पेस्टेसाइड का छिड़काव

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छत्तीसगढ़ के युवा ने बनाया 32 किलो का एग्रीकल्चर ड्रोन

बिलासपुर में आयोजित कृषि मेले ड्रोन उड़ाते पराग झा।

ताबीर हुसैन @ रायपुर. भविष्य ड्रोन तकनीक का है। ज्यादा से ज्यादा कार्यों में ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में कृषि में इसका अच्छा प्रयोग किया जा रहा है। सिटी के पराग झा पेस्टीसाइड छिड़काव में ड्रोन की उपयोगिता बढ़ा रहे हैं। बिलासपुर में चल रहे कृषि मेले में पराग ने 25 लीटर पेस्टीसाइड को लेकर उडऩे वाला ड्रोन का डेमो दिखाया। इसका कुल वजन 32 किलो है जिसकी लागत चार से पांच लाख रुपए है। 26 वर्षीय पराग ने बताया, मैं लंबे समय से ड्रोन पर काम कर रहा हूं। इसलिए ड्रोन मेकिंग में ज्यादा समय नहीं लगता। इसे बनाने में करीब 15 दिन लगे। पराग का दावा है कि इस कैपिसिटी का देश में यह पहला एग्रीकल्चर ड्रोन है। एक एकड़ खेती में पेस्टीसाइड का छिड़काव पांच से 10 मिनट के भीतर कर देगा। जबकि किसान अगर मजूदरों से काम ले तो इतने ही खेत में कीटनाशक के छिड़काव में दिनभर का समय लग जाता है। खास बात ये कि खेत के कोने-कोने में सही मात्रा में छिड़काव ड्रोन से ही संभव है। इस तरह किसान का समय और पैसा दोनों की बचत होगी।

राज्य सरकार देगी 80 प्रतिशत सब्सिडी

कृषि मेले में मंत्री रविंद्र चौबे ने घोषणा करते हुए कहा कि एग्रीकल्चर ड्रोन की खरीदी पर राज्य सरकार 80 प्रतिशत छूट देगी। बताते चलें कि बजट में केंद्र सरकार ने भी सब्सिडी की घोषणा की है। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को किसानों के खेतों पर ड्रोन के प्रदर्शन के लिए ड्रोन की खरीद के लिए 75 प्रतिशत की दर से अनुदान प्रदान किया जाता है। ड्रोन इस्तेमाल के माध्यम से कृषि सेवाएं प्रदान करने के लिए, कॉर्पोरेटिव सोसाइटी ऑफ फार्मर्स, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और ग्रामीण उद्यमियों के तहत मौजूदा तथा नए कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) द्वारा ड्रोन खरीद के लिए और उससे जुड़े सामान की मूल लागत का 40 प्रतिशत या 4 लाख रुपए, जो भी कम हो, की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। कृषि से स्नातक करके सीएचसी की स्थापना करने वाले ड्रोन की लागत के 50 प्रतिशत की दर से (अधिकतम 5 लाख रुपए तक की) वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं।