ताबीर हुसैन @ रायपुर. वो दौर अलग था जब कंपनियों के जरिए ही म्यूजिक रिलीज हुआ करता था। दूसरा कोई ऑप्शन था ही नहीं। मम्मी (अनुराधा पौडवाल) टी-सीरीज के साथ इसलिए जुड़ी क्योंकि वे जो काम करना चाहती थीं, किसी और कंपनी में हिम्मत नहीं थी। एक तरह से लाइब्रेरी खोल दी। टी-सीरीज को भी उस कॉन्सेप्ट पर विश्वास था। आज किसी एक कंपनी से जुडऩे की बात रही नहीं। सब कुछ ओपन प्लेटफॉर्म है। अगर आप खुद लिखते हैं, संगीत देते हैं और खुद रिकॉर्ड करते हैं तो कई रास्ते खुले हैं। कई बार ऐसा होता है कि अगर आपके पास रिसोर्स नहीं है और कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो कॉरपोरेट बैकअप मिले तो फर्क पड़ता है लेकिन मुझे नहीं लगता कि आजकल के कलाकार उस चीज के मोहताज हैं। म्यूजिक के ओपन प्लेटफॉर्म ने यंगस्टर्स की राह आसान कर दी है। यह कहा भजन सिंगर कविता पौडवाल ने । वे पत्रिका की ओर से सीजी फिल्म इंडस्ट्री के संगीतकारों के सवालों का जवाब दे रही थीं।
खेलने की उम्र में आपने फिल्म में गाना गा लिया था, कैसा अनुभव था?
मेरे लिए वह किसी खेल की तरह था। क्योंकि मैं मम्मी से मिलने स्टूडियो गई थी। उस वक्त जुनून की रिकॉर्डिंग चल रही थी। मुझे श्रवणजी ने पूछा, एक गाना है तुम गाओगी? मैंने कहा हां। क्योंकि संगीत मेरे लिए कोई नई चीज नहीं थी। बचपन से घर में माहौल था। इसलिए उनके एक बार कहने पर ही मैंने तू मेरा मेहरबां … गा लिया।
पढ़ाई के लिए आप अमरीका गईं, लौटने पर क्या बदलाव देखा?
जब मैं वापस आई तो रियलिटी शोज शुरू हो चुके थे। उसमें से भी कई सिंगर उभरकर आ रहे थे। भीड़ बहुत हो गई थी। जब मैंने भजन गाने शुरू किए तो लोगों ने बहुत एप्रिशिएट किया। क्योंकि उस वक्त भजन में कोई यंग सिंगर नहीं था। मुझे इसका एडवांटेज मिला। जब मैं अमरीका थी तब अच्छी तरह समझ लिया था कि अब्रॉड में लोग अपने देश से कैसे जुड़ते हैं। फिल्में तो नॉर्थ और साउथ में डिवाइड हो जाती है लेकिन डिवोशनल म्यूजिक एक ऐसी चीज है जो लोगों को बांधकर रखती हैं। आप भीड़ में भागो या ऐसी जगह मकाम बनाओ जहां भीड़ नहीं है और आप खुद को साबित कर सकें।
लाइव कंसर्ट कभी कोई मिस्टेक हो तौ कैसे संभालती है?
लाइव म्यूजिक में होने वाली गलतियों को संभाला जा सकता है। वो मैच्योरिटी से आएगा। परिपक्वता सिर्फ उम्र की नहीं बल्कि यह कि आप कितने परफॉर्मेंस देते रहते हैं। धीरे-धीरे एक दौर ऐसा आता है जब आप चीजों को हैंडल करना सीख जाते हैं।
प्लेबैक सिंगर की तरफ बहुत ज्यादा नहीं जाने का कोई विशेष कारण ?
ये हर कलाकार की अपनी च्वाइस होती है कि वो क्या करे? आज भी लोग भजन को वानप्रस्थ आश्रम वाला कॉन्सेप्ट समझते हैं। मेरे दिमाग में कभी यह बात नहीं आई। लोगों को अच्छा लगा कि यंग वाइस है। जो लोग कुछ और काम कर रहे हैं और म्यूजिक उनका पैशन है। तो वे बेहत आउटपुट दे सकते हैं। अगर आप कोई भी क्रिएटिव फील्ड पर हो रोजी-रोटी के लिए म्यूजिक पर डिपेंड नहीं है तो अच्छा काम कर सकते हैं।
इन्होंने पूछे सवाल- सुनील सोनी, नितिन दुबे, अनुराग शर्मा, मोनिका वर्मा और तुषांत कुमार