24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Bageshwar Dham: बागेश्वर धाम सरकार के दरबार में लगी घर वापसी की अर्जी, 4 ईसाई और 1 मुस्लिम बने हिंदू

Bageshwar Dham: बागेश्वर धाम सरकार के दरबार में उत्साह से गूंज उठा जय-जय श्रीराम... Bageshwar Baba Dhirendra Shastri

3 min read
Google source verification
Bageshwar Dham

Bageshwar Dham

Bageshwar Dham: रायपुर के गुढ़ियारी का दही हांडी लूट मैदान। शनिवार को आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) के दिव्य दरबार का यहां दूसरा दिन था। आचार्य बारी-बारी भक्तों का नाम लेकर उन्हें मंच पर बुलाते और पर्ची पर समस्या के साथ समाधान भी लिख बताते। ये सिलसिला सुबह 10 बजे से लगातार चल रहा था। यह कोई दोपहर 1 बजे होंगे। दरबार समाप्ति की घोषणा होने ही वाली थी कि आचार्य को ओडिशा से आए 4 लोगों के बारे में बताया गया। इन चारों ने क्रिश्चियन धर्म अपना लिया था और अब वे हिंदू धर्म में वापस आना चाहते हैं। इतना सुनना था कि भीड़ के बीच उत्साह से जय-जय श्रीराम गूंज उठा।

आचार्य ने उन्हें मंच पर बुलाकर पूछा, दरबार के किसी कार्यकर्ता ने तुमसे संपर्क किया था? क्या किसी दबाव में आकर हिंदू धर्म अपना रहे हो? उन्होंने जवाब दिया नहीं, तो आचार्य ने सभी के मस्तक पर चंदन लगाकर घर वापसी कराई। श्रीरामकथा के बाद शाम को होने वाली आरती भी इन्हीं से करवाने का ऐलान कर दिया। इसके बाद वे विश्राम के लिए जा ही रहे थे कि एक मुस्लिम महिला भी मंच पर आ गई। उसने अपना नाम सुल्ताना बताया। कहा, मुझे भी हिंदू बनना है। मंच पर ही रोते-बिलखते हुए उसने अपनी सारी समस्या कह डाली। उसने बताया कि वह मूर्ति पूजा करती है, इसलिए उसका घर-परिवार उसे छोड़ चुका है। महाराज ने कहा कि तुम्हारा भी हिंदू धर्म में स्वागत है। चिंता की कोई बात नहीं। इस देश का हर हिंदू तुम्हारा भाई है। कोई हो न हो, मैं तो हूं ही। इस तरह दिव्य दरबार में शनिवार को 5 लोगों की घर वापसी हुई।

आचार्य ने शुक्रवार को दिव्य दरबार की शुरुआत की थी। तब उन्होंने कुछ ही भक्तों की अर्जी सुनी थी और नेशनल मीडिया के सामने दरबार की शक्ति का परीक्षण करवाया। इसके चलते बहुत से भक्तों की अर्जी नहीं सुनी जा सकी। तब उन्होंने कहा था कि शनिवार को चार घंटे का दरबार लगेगा और संभव हुआ तो रविवार को भी दरबार लगेगा। शनिवार को उन्होंने 4 घंटे का दरबार लगाया, लेकिन रविवार को दरबार की मनाही भी कर दी। यानी अब 23 सोमवार तक केवल श्रीरामकथा होगी। आचार्य ने शुक्रवार को दिव्य दरबार की शुरुआत की थी।

तब उन्होंने कुछ ही भक्तों की अर्जी सुनी थी और नेशनल मीडिया के सामने दरबार की शक्ति का परीक्षण करवाया। इसके चलते बहुत से भक्तों की अर्जी नहीं सुनी जा सकी। तब उन्होंने कहा था कि शनिवार को चार घंटे का दरबार लगेगा और संभव हुआ तो रविवार को भी दरबार लगेगा। शनिवार को उन्होंने 4 घंटे का दरबार लगाया, लेकिन रविवार को दरबार की मनाही भी कर दी। यानी अब 23 सोमवार तक केवल श्रीरामकथा होगी।

धर्मांतरण यूं ही नहीं होता, प्रक्रिया लंबी है
शनिवार को दिव्य दरबार में एक मुस्लिम महिला ने मंच से ही धर्म परिवर्तन की करने बात कही। लेकिन, ये इतना आसान भी नहीं है। नियमों के मुताबिक कोई भी धार्मिक पुजारी या कोई भी व्यक्ति जो धर्मांतरण का आयोजन करना चाहता है, उसे उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट को फॉर्म सी में पहले सूचना देनी होगी। जिला मजिस्ट्रेट अगर इस बात से संतुष्ट हैं कि धर्मांतरण मर्जी से किया गया है और बिना किसी गलत बयानी के, बल प्रयोग, धमकी, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन या किसी धोखाधड़ी के माध्यम से या शादी या शादी के लिए किया गया है, तो इस आशय का एक प्रमाण पत्र जारी करेगा। जिलाधिकारी के आदेश पारित करने के बाद यदि किसी को आपत्ति है तो वह 30 दिनों के अंदर मंडलायुक्त से अपील कर सकता है।

आज की कथा में सुल्ताना का होगा हिंदू नामकरण
सुल्ताना ने दरबार में आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अपना भाई बनाने निवेदन कर हर साल राखी बांधने की बात भी कही। आचार्य ने कहा कि रक्षाबंधन का इंतजार क्यों? यहीं राखी लाकर मुझे बांध देना। उन्होंने रविवार की कथा में सुल्ताना का हिंदू रीति-रिवाजों के साथ नामकरण करने की घोषणा भी की।

क्रिश्चियन परिवार बच्चे को ठीक करने कहा, आचार्य बोले- ये मुझ पर नहीं
ओडिशा से आए क्रिश्चियन के साथ एक युवक था। परिवारवालों ने बताया कि वह हमारा बच्चा है। काफी दिनों से बीमार है। उन्होंने आचार्य से विनती की कि उसे ठीक कर दें। इस पर आचार्य ने कहा कि बच्चा ठीक होगा या नहीं? ये तो बालाजी सरकार के ऊपर है। क्या बच्चा ठीक नहीं होगा तो आप हिंदू धर्म फिर छोड़ देंगे? इस पर परिवार ने कहा कि नहीं। हम हिंदू धर्म में ही रहेंगे। इसके बाद एक बार फिर पूरा स्थान जय-जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।