23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एम्स में मंथन: बच्चों में अस्थमा, महिलाओं में बढ़ रही फेफड़े की बीमारी

- बदलती लाइफस्टाइल से फूल रही सांसें, उद्योगों, गाड़ियों का धुंआ भी बड़ा कारण

2 min read
Google source verification
एम्स में मंथन: बच्चों में अस्थमा, महिलाओं में बढ़ रही फेफड़े की बीमारी

एम्स में मंथन: बच्चों में अस्थमा, महिलाओं में बढ़ रही फेफड़े की बीमारी

रायपुर@पत्रिका. स्मोकिंग ही नहीं, बदलती जीवनशैली भी अब सांसें फूलने का कारण बन रही है। फिर चाहे जरूरत से ज्यादा तली चीजों का सेवन हो या सड़कों पर घूमने-फिरने का शौक। इसके अलावा उद्योगों और गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ भी श्वसन नली और फेफड़े संबंधी रोगों का बड़ा कारण बनकर उभरा है।

शहरी आबोहवा सुरक्षित नहीं : विशेषज्ञ

रविवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयोजित ‘पल्मोनरी मेडिसिन अपडेड-2023’ में ये बातें सामने आईं। इसमें देश के प्रमुख फेफड़ा रोग विशेषज्ञों ने शिरकत की। डॉक्टरों ने एकमत होकर कहा कि उद्योगों और गाड़ियों से निकलने वाले धुंए के चलते शहरी आबोहवा सुरक्षित नहीं है। यानी शहर में घूमने-फिरने का शौक आपको बीमार बना सकता है। इसके अलावा खान-पान और अनियमित जीवनशैली भी श्वसन रोग बढ़ने का बड़ा कारण है। देश के प्रमुख फेफड़ा रोग विशेषज्ञ पद्मश्री प्रो. डी बेहरा ने कहा, देश में बढ़ते फेफड़ों संबंधी रोगियों के लिए अब विशेषज्ञ कोर्स संचालित करने की जरूरत है। पल्मोनरी मेडिसिन अब एक सुपर स्पेशियलिटी विभाग बनता जा रहा है। बढ़ते वायु प्रदूषण और धूम्रपान के चलते कई गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। इनके इलाज के लिए एक्सपर्ट डॉक्टरों की आवश्यकता है। एम्स के डायरेक्टर प्रो. डॉ. नितिन एम नागरकर ने कहा कि एम्स में पल्मोनरी मेडिसिन के सुपर स्पेशियलिटी कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, ताकि देश में फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का दंश झेल रहे लोगों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हो सकें। टीबी, फेफड़ों के कैंसर और पोस्ट कोविड बीमारियों की वजह से अब पल्मोनरी मेडिसिन को सुपर स्पेशियलिटी विभाग के रूप में विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने इस दिशा में और अधिक शोध व अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्हें भी श्वसन रोग जिन्होंने कभी धूम्रपान किया ही नहीं

संयोजक डॉ. अजॉय बेहरा ने कहा, चतुर्थ सिम्पोजियम की मदद से देश के चिकित्सकों को पल्मोनरी मेडिसिन के विभिन्न विषयों पर संवाद के लिए मंच दिया जा रहा है। सिम्पोजियम के निष्कर्षों को देश के अन्य डॉक्टरों के साथ साझा किया जाएगा। डॉ. बेहरा ने बताया अब ऐसी महिलाएं और बच्चे भी श्वसन रोग से जूझ रहे हैं, जिनके ध्रूमपान का कोई इतिहास नहीं है। इन रोगियों की समय पर पहचान और उपचार चुनौतीपूर्ण है। बच्चों में अस्थमा बढ़ रहा है। उन्होंने इस दिशा में और अधिक शोध की आवश्यकता बताई। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. सजल डे, डीन प्रो. आलोकचंद्र अग्रवाल, डॉ. रंगनाथ टीजी, डॉ. दिबाकर साहू, डॉ. सरोज पति, डॉ. उज्ज्वला गायकवाड़, डॉ. जॉयदीप सामंता, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. विजय हड्डा और डॉ. नवीन दत्त मौजूद रहे।