
कोर्ट फैसला (पत्रिका फाइल फोटो)
CG News: वन विभाग ने बीमा कवर से लैस होने के बाद भी तेंदूपत्ता संग्राहक के परिजनों का क्लेम खारिज कर दिया। साथ ही मौत होने पर 45 दिनों के भीतर कोई दावा प्रकरण पेश नहीं करने का तर्क दिया। इसके आधार पर जिला फोरम ने पीड़ित संग्राहक परिवार का क्लेम खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ किए गए प्रकरण की सुनवाई करते हुए राज्य आयोग ने जिला फोरम के फैसले के खिलाफ आदेश पारित किया।
साथ ही वन विभाग द्वारा समय सीमा में दावा पेश नहीं करने की दलील को खारिज कर दिया। आयोग के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने आदेश पारित करते हुए मृतक तेंदूपत्ता संग्राहक के परिजनों को 6 फीसदी ब्याज के साथ 4 लाख रुपए बीमा क्लेम देने कहा। वहीं 30 हजार रुपए मानसिक कष्ट एवं वाद व्यय देना होगा।
शासन की योजना शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना में सामान्य मृत्यु होने पर पर 2 लाख और दुर्घटनात्मक मृत्यु होने पर 2 लाख रुपए अतिरिक्त प्रदान किये जाने का उल्लेख है। इसे देखते हुए बीमा क्लेम दिए जाने का फैसला सुनाया। बता दें कि शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्रहण योजना के तहत संग्राहक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान किया जाना है। उक्त दोनों राज्य सरकार द्वारा कराए गए बीमा नियमों के तहत आता है।
राज्य सरकार के निर्देश पर वन विभाग द्वारा तेंदूपत्ता तोड़ाई करने वालों का शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत बीमा कराया गया था। खैरागढ़-छुईखदान स्थित वनोपज समिति साल्हेवारा के फड ग्राम गोपालटोला का कोमल पटेल पंजीकृत सदस्य था। 2019 से 2021 के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण किया गया।
11 अक्टूबर 2021 को कंरट के कोमल पटेल की मौत हो गई। इसकी सूचना मृतक की पत्नी संतोषी पटेल द्वारा थाना साल्हेवारा में दी गई। साथ ही वनोपज समिति साल्हेवारा के समक्ष घटना से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य सहित आवेदन जमा किया। लेकिन वनोपज समिति ने विलंब से आवेदन करने का हवाला देेते हुए उसे खारिज कर दिया।
क्लेम नहीं देने पर पीड़िता ने जिला उपभोक्ता फोरम राजनांदगांव के समक्ष तेंदूपत्ता संग्रहण, पारिश्रमिक कार्ड, बैंक पास बुक, आधार कार्ड सहित आवेदन देकर क्षतिपूर्ति राशि दिलाए जाने का अनुरोध किया। प्रकरण की सुनवाई के दौरान वनोपज समिति ने बचाव करते हुए 45 दिनों के भीतर कोई दावा प्रकरण पेश नहीं करने का हवाला दिया।
वहीं प्रबंध संचालक वनमंडलाधिकारी जिला सहकारी यूनियन ने शहीद महेन्द्र कर्मा योजना के तहत नियमानुसार 90 दिन के भीतर वनोपज समिति के समक्ष आवेदन करने की बात कही। जबकि क्लेम 2 जुलाई 2022 को 8 महीने बाद पेश करना बताया। इसके चलते क्लेम नहीं देने की बात कही।
जिला फोरम ने निर्धारित नियमो का पालन नहीं करने पर आवेदन को खारिज कर दिया। इस आदेश के खिलाफ पीड़िता ने राज्य आयोग में अपील की। जहां राज्य आयोग के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति ने आवेदन की जांच में पाया कि तेंदूपत्ता संग्राहक पारिश्रमिक कार्ड में तेंदुपत्ता संग्राहको एवं उनके परिवार के सदस्यों के लिए बीमा योजनाएं उल्लेखित हैं।
Updated on:
4 Jun 2025, 9:52 AM IST
Published on:
4 Jun 2025, 9:52 AM IST
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