3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कन्फर्म टिकट के बाद भी नहीं दिया बोर्डिंग पास, कंपनी पर 25,000 का जुर्माना, जिला फोरम का फैसला

Consumer Forum: जिला उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में जेट एयरवेज को सेवा में कमी का दोषी पाया है। जिस पर फैसला सुनाते हुए 25,000 का जुर्माना लगाया है..
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Chandu Nirmalkar

•

Updated: 26 Apr 2026, 10:58 AM IST

District Consumer Forum

कन्फर्म टिकट के बाद भी नहीं दिया बोर्डिंग पास ( Photo - AI)

Consumer Forum: क्या हवाई जहाज, बस या ट्रेन की तरह है, जहां सीटों की क्षमता से अधिक टिकट बेचे जा सकते हैं? इस गंभीर सवाल पर जिला उपभोक्ता फोरम ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जेट एयरवेज को सेवा में कमी का दोषी पाया है। (CG News ) कन्फर्म टिकट होने के बावजूद यात्री को सफर से रोकने और उसकी सीट किसी अन्य को आवंटित करने के मामले में फोरम ने विमानन कंपनी पर 25,000 रुपए का हर्जाना लगाया है।

Consumer Forum: ब्याज सहित मुआवजे के भुगतान का आदेश

जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष डाकेश्वर प्रसाद शर्मा, सदस्य निरूपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि हवाई जहाज में उपलब्ध सीटों और तकनीकी क्षमता के अनुरूप ही टिकटों का विक्रय किया जाना चाहिए। फोरम ने कहा कि तय क्षमता से ज्यादा टिकट बेचना न केवल सेवा में निम्नता है, बल्कि यह एक अनुचित व्यापार व्यवहार भी है। फोरम ने आदेश दिया है कि जेट एयरवेज 45 दिनों के भीतर पीड़ित यात्री को मुआवजे की राशि का भुगतान करे। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया, तो कंपनी को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

एयरपोर्ट पर हुआ था जमकर हंगामा

मामला सिविल लाइन, पंचशील नगर निवासी अमित मसीह से जुड़ा है। वे 11 जून 2016 को पारिवारिक कार्य से मुंबई गए थे। वापसी के लिए उन्होंने 12 जून की फ्लाइट में 8,910 रुपए का भुगतान कर कन्फर्म टिकट लिया था। जब अमित मसीह मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पहुंचे, तो एयरलाइन स्टाफ ने उन्हें बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया। पूछताछ करने पर पता चला कि विमान ओवर बुक (क्षमता से अधिक बुकिंग) था और अमित की कन्फर्म सीट किसी अन्य यात्री को अलॉट कर दी गई थी।

विवाद बढ़ने पर कंपनी ने उन्हें अगले दिन की टिकट और होटल में रुकने के लिए 3,000 रुपए का प्रस्ताव दिया, जिसे यात्री ने अपनी गरिमा और समय का नुकसान बताते हुए ठुकरा दिया। कन्फर्म टिकट होने के बाद भी यात्री को सुरक्षा जांच क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया गया, जिससे एयरपोर्ट पर काफी देर तक हंगामा चलता रहा।

कंपनी का आरोप-यात्री विलंब से एयरपोर्ट पहुंचा थाविमानन कंपनी ने जिला फोरम में अपना बचाव करते हुए नागर विमानन महानिदेशालय के पैरा 3.2 का हवाला दिया। कंपनी का तर्क था कि अक्सर कई यात्री टिकट बुक कराने के बाद भी यात्रा नहीं करते, जिससे विमान खाली जाने का डर रहता है। विमान को घाटे से बचाने के लिए ओवरबुकिंग का प्रावधान है। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि यात्री विलंब से एयरपोर्ट पहुंचा था।

फोरम ने कंपनी के तर्क किए खारिज

फोरम ने कंपनी के इन तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि यात्री के पास कन्फर्म टिकट था और उसे बिना सूचना दिए उसकी सीट दूसरे को बेचना किसी भी नियम के तहत जायज नहीं है।

यात्री का सवाल: क्या फ्लाइट में खड़े होकर सफर करेंगे?

सुनवाई के दौरान अमित मसीह ने तल्ख सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फ्लाइट कोई बस या लोकल ट्रेन नहीं है, जहां अतिरिक्त टिकट बेचने पर यात्री खड़े होकर या टेबल पर बैठकर सफर कर सके। यह एयरलाइंस की जिम्मेदारी है कि वह अपनी सीटों के अनुसार ही बुकिंग ले। इस फैसले ने उन हजारों हवाई यात्रियों के लिए उम्मीद जगाई है जो अक्सर एयरलाइंस की मनमानी और ओवरबुकिंग की नीति के कारण मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलते हैं।