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काम अलग, पहचान एक.. दिल में बसती कविता! इंजीनियर, डॉक्टर, पुलिस… सबके दिल में कवि

World Poetry Day: कोई इंजीनियर है कोई पुलिस में तैनात तो कोई डॉक्टर या व्यवसाय से जुड़ा, लेकिन सभी के दिल में शब्दों की एक अलग दुनिया बसती है।

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काम अलग, पहचान एक.. दिल में बसती कविता! इंजीनियर, डॉक्टर, पुलिस… सबके दिल में कवि(photo-patrika)

काम अलग, पहचान एक.. दिल में बसती कविता! इंजीनियर, डॉक्टर, पुलिस… सबके दिल में कवि(photo-patrika)

World Poetry Day:ताबीर हुसैन। जिंदगी की तेज रफ्तार और जिम्मेदारियों के बीच भी कुछ लोग अपने भीतर के कवि को जिंदा रखे हुए हैं। कोई इंजीनियर है कोई पुलिस में तैनात तो कोई डॉक्टर या व्यवसाय से जुड़ा, लेकिन सभी के दिल में शब्दों की एक अलग दुनिया बसती है।

विश्व कविता दिवस के मौके पर इन रचनाकारों ने साझा किया कि कविता उनके लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि सुकून, अभिव्यक्ति और आत्मबल का जरिया है। जीवन के उतार-चढ़ाव, संघर्ष और भावनाओं को शब्दों में ढालकर उन्होंने खुद को संवारने के साथ समाज को भी नई सोच देने की कोशिश की है।

World Poetry Day: इंजीनियरिंग के बीच शब्दों की साधना

पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता संतोष गुप्ता पिछले 5 वर्षों से कविता लिख रहे हैं। हिंदी के अच्छे विद्यार्थी रहे संतोष की अब तक 2 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। व्यस्त नौकरी के बावजूद लेखन उनका जुनून बना हुआ है, जिससे उन्हें नई पहचान और संतोष मिलता है।

वर्दी में संवेदनाएं, कविता में अभिव्यक्ति

सीजी पुलिस में कांस्टेबल पूजा देवांगन 2007 से लेखन कर रही हैं। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता ‘भिक्षुक’ से प्रेरित होकर उन्होंने शुरुआत की। पहले सामाजिक मुद्दों पर लिखा, अब भावनाओं को भी शब्द देती हैं। व्यस्तता के बीच जब भी भाव आते हैं, उन्हें तुरंत कागज पर उतार देती हैं।

कारोबार के साथ शब्दों का सफर

व्यवसायी राकेश अग्रवाल ने 1988 में कक्षा 11वीं से लेखन शुरू किया। बीच में विराम के बाद पिछले 6 वर्षों से फिर सक्रिय हैं। गीत, गजल और विभिन्न छंदों में लिखते हैं। सामाजिक विसंगतियां और जीवन के संघर्ष उनकी रचनाओं की प्रेरणा हैं। उनकी रचनाएं साझा संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं।

चिकित्सा के साथ सृजन की धारा

डॉक्टर सारिका सिंघानिया पिछले 7 वर्षों से गद्य और पद्य दोनों में सक्रिय हैं। कविता, कहानी, व्यंग्य, लेख, गजल, गीत और मुक्तक लिखती हैं। उनका एक एकल और दो संयुक्त संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। उनके लेखन की प्रेरणा उनके अंतर्मन से आती है।

असफलता से उपजा रचनात्मक जुनून

दूरसंचार विभाग में लेखाधिकारी भरत द्विवेदी 11 वर्षों से लेखन से जुड़े हैं। पिछले 4-5 वर्षों से मंचीय और व्यावसायिक लेखन कर रहे हैं। सीए फाइनल में असफलता के बाद उन्होंने कविता का सहारा लिया। अब शृंगार रस और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं, उनकी पहली किताब प्रक्रिया में है।

विज्ञान के बीच गजल की नजाकत

फोरेंसिक साइंस लैब में संयुक्त संचालक आर.डी. अहिरवार 15 वर्षों से लेखन कर रहे हैं और पिछले 8 वर्षों से गजल पर केंद्रित हैं। बशीर बद्र से प्रेरित होकर उन्होंने गजल की बारीकियां सीखी हैं। उनकी कोई किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई, लेकिन लेखन का सिलसिला लगातार जारी है।

प्रशासन और लेखन साथ-साथ

भागवत जायसवाल प्रशासनिक अधिकारी हैं।वे 2019 से लगातार लेखन कर रहे हैं। उनकी लेखन विधा में पौराणिक इतिहास, ग्रामीण जीवन और प्रेरणास्पद कहानियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। अब तक उनके 8 पुस्तक, सीरीज और उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें लेखन की प्रेरणा प्रेमचंद की सादगी भरी कहानियों से मिली। प्रशासनिक सेवा में अपर कलेक्टर के पद पर रहते हुए भी उन्होंने लेखन जारी रखा। उनकी प्रमुख कृतियों में तैयारी जीत की, बहादुर कलारिन, कलचुरी गाथा, वैदिक गाथा और ग्रामीण जीवन पर आधारित कोटवार तथा झुमरी तलैया का रहस्य शामिल हैं।

43 साल वकालत, जीवनभर कविता

राममूरत शुक्ला पेशे से वकील हैं और पूर्व में पत्रकारिता से भी जुड़े रहे हैं। वे सन् 1979-80 से कविता लिख रहे हैं, हालांकि उनका कोई संग्रह प्रकाशित नहीं हो पाया। प्रांतीय और अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में उन्होंने ओज की कविताएं मंच से प्रस्तुत कीं और हरिओम पंवार, गोपाल दास नीरज, बाल कवि बैरागी सहित कई राष्ट्रीय स्तर के कवियों के साथ मंच साझा किया। वे 43 वर्षों से वकालत के पेशे में हैं। अब 72 वर्ष की आयु में समयाभाव के कारण बाहर कम जाते हैं, लेकिन स्थानीय काव्य गोष्ठियों में भाग लेकर समसामयिक विषयों पर लेखन करते रहते हैं।