
पानी में लोहे की मात्रा अधिक से ग्रामीण हो रहे बीमार, 4 लोग किरंदुल अस्पताल में भर्ती, बोले- हमें कुछ नहीं चाहिए, कैंप लगवा दीजिए ताकि बच सके जान
किरन्दुल। बैलाडिला की लाल पहाडिय़ों के पीछे तराई में बसा लोहा गांव जहा के आदिवासी आज भी बद से बदतर जीवन जीने को मजबूर है। इनके पास ना पीने का साफ पानी है ना स्वास्थ्य सुविधाएं ना स्कूलए ना बिजली और ना सडक़। शासन की कोई भी मूलभूत सुविधा इन तक नहीं पहुंच रही। ऐसा ही मामला पत्रिका टीम के संज्ञान में आया जब लोहा गांव के मुखिया छन्नू कुंंजाम से किरंदुल परियोजना अस्पताल में मुलाकात हुई उसने अपनी आप बीती बताते हुए कहा कि हमारे गांव में लाल गंदा पानी पीने के कारण बहुत लोग बीमार है चार लोगों को में कैसे कैसे जंगल. पहाड़ी .नदी .नाला पैदल पार कर अस्पताल पहुचाया। छन्नू ने कहा कि बैलाडीला एनएमडीसी की लौह अयस्क की खदान 11सी और 11 बी से जो बारिश में लौह चूर्ण बह के आता है उसके हमारे गांव में बहने वाली नदी का पानी लाल हो गया है। और ग्रामीण मजबूरी में उस लाल नदी के बगल में चुआ खोद कर उस पानी से अपनी प्यास बुझाते है। कई लोग बीमारी से ग्रसित हो गए हैं। जानवर भी उसी लाल पानी को पी कर मर रहे है।
मेडिकल कैम्प लगने का इंतजार
गांव के मुखिया छन्नू कुंंजाम ने बताया कि साहब, हम जैसे तैसे जी लेंगे हमको कुछ नहीं चाहिए सिर्फ गांव में स्वास्थ्य कैम्प लगा दीजिए कौन.कौन किस बीमारी से मर रहा है हमको पता रहे जो बाकी लोग हैं उनका इलाज हो सके। छन्नू ने कहा कि हो सके तो पीने का साफ पानी की व्यवस्था करवा दीजिए गांव में बहुत लोग लाल पानी पीने से बीमार हं।ै जिन चार लोगों की हालत ज्यादा खराब थी अस्पताल आया मौत हो गई बात करते.करते वो मर गया।
सुखमती ने कहा कि मेरे पेट, छाती में बहुत दर्द है गंदा पानी पीने से ये सब हो रहा है पैदल बीमारी हालात में इतनी दूर अस्पताल आये हमको पीने का साफ पानी और दवाई मिल जाये हम ओर कुछ उमीद नहीं करते।
आजादी के बाद पहली बार 16 जून 2022 को लगा था कैंप
हिरोली के आश्रित ग्राम लोहा में आजादी के बाद पहली बार 16 जून 2022 को स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची थी और वह मेडिकल कैम्प लगाया गया था। वाकई में काबिले तारीफ था उनका काम। उसके बाद जिला प्रशासन ने खूब वाह.वाही लूटी जैसे लगा प्रशासन चंदा पर पहुंच गया और लगा कि अब लोहा गांव की तस्वीर बदलेगी। गांव के लोगों मे उम्मीद जगी। लेकिन उसके बाद कोई नहीं गया उनको उनके हाल में मरने के लिए छोड़ दिया गया।
बस्तर के संयुक्त संचालक स्वास्थ बी आर पुजारी ने बताया कि हम जल्द कैंप लगाएंगे और गांव के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराएंगे हमारी टीम तैयार है। लौह गांव में पहुंचना बड़ी चुनौती है, क्योंकि वह पैदल ही जाया जा सकता है । हमने पिछले वर्ष भी कैम्प किया था। और अभी फिर से हमारा स्टाफ तैयार है वह जा कर कैम्प करने के लिए।
Published on:
23 May 2023 02:32 pm
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