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सावधान: आपकी इस छोटी सी गलती के कारण हो रही 80 फीसदी ऑनलाइन ठगी, ऐसे बचे

ऑनलाइन ठगी करते समय ठग किसी के बैंक खाते व अन्य जानकारियां लेने के बाद राशि निकालने की ऑनलाइन प्रक्रिया करते हैं। इस दौरान ओटीपी जनरेट होता है। ओटीपी संबंधित बैंक खाते से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर में ही जाता है, जो खाताधारक के पास होता है।

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सावधान: आपकी इस छोटी सी गलती के कारण हो रही 80 फीसदी ऑनलाइन ठगी, ऐसे बचे

सावधान: आपकी इस छोटी सी गलती के कारण हो रही 80 फीसदी ऑनलाइन ठगी, ऐसे बचे

रायपुर. ऑनलाइन ठगी की ज्यादातर घटनाएं केवल अनजान लोगों को ओटीपी(वन टाइम पासवर्ड) बताने से हो रही है। ओटीपी बताते ही बैंक खाते से रकम निकल हो जाते हैं। जनवरी से अगस्त तक रायपुर में 580 ठगी के मामले सामने आए हैं। इनमें से करीब 80 फीसदी मामले ओटीपी नंबर पूछकर ठगी के हैं।

दरअसल ऑनलाइन ठगी करते समय ठग किसी के बैंक खाते व अन्य जानकारियां लेने के बाद राशि निकालने की ऑनलाइन प्रक्रिया करते हैं। इस दौरान ओटीपी जनरेट होता है। ओटीपी संबंधित बैंक खाते से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर में ही जाता है, जो खाताधारक के पास होता है। ठग इसी ओटीपी को पूछते हैं। खाताधारक ओटीपी नंबर बता देता है, तो ठग उनके खाते से राशि निकालने में सफल हो जाते हैं। अगर खाताधारक ओटीपी नंबर नहीं बताएगा, तो ठग राशि निकालने में सफल नहीं हो पाएगा।

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ऐसे करते हैं ठगी

ठग स्वयं को बैंक अधिकारी-कर्मचारी बताते हुए बैंक खाता केवायसी, नया एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड जारी करने, आधार कार्ड, रिवार्ड आदि के नाम पर फोन करते हैं। फिर ओटीपी जनरेट करके पूछते हैं।

580 मामले आ चुके हैं

वर्ष 2021 में जनवरी से अगस्त तक रायपुर जिले में ऑनलाइन ठगी के 580 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से ज्यादातर ठगी ओटीपी नंबर बताने और मोबाइल हैक करके हुई है।

केस-1
बिजली विभाग से रिटायर्ड अभनपुर निवासी अशोक साहू को 17 जून को साइबर ठगों ने बैंक अधिकारी बनकर फोन किया। उनसेउनके बैंक खाता नंबर, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, पैन नंबर आदि की जानकारी लेने के बाद ठग उनसे 15 दिनों तक बातचीत करते रहे। इस दौरान उनके मोबाइल में ओटीपी भेजते रहे। अशोक हर बार ठगों को मोबाइल में आए ओटीपी शेयर कर देते थे। इससे ठग उनके खाते से 50 हजार से लेकर 10 लाख रुपए तक निकाल लेते थे। ठगों ने उनके बैंक खाते से कुल 63 लाख 33 हजार रुपए का आहरण किया था।

केस-2
पंकज मिश्रा एक निजी बैंककर्मी हैं। फरवरी में उन्होंने अपने क्रेडिट कार्ड को बंद करने के लिए गूगल से संबंधित बैंक के कस्टमर केयर का नंबर निकाला और उनसे क्रेडिट कार्ड बंद करने कहा। कस्टमर केयर बनकर साइबर ठग ने उनसे क्रेडिट कार्ड बंद करने की प्रक्रिया पूरा करने कहा। और इस दौरान एक ओटीपी नंबर पंकज के मोबाइल में भेजा। ठग ने उनसे ओटीपी नंबर पूछा। पंकज ने ओटीपी बता दिया। कुछ देर बाद उनके क्रेडिट कार्ड से 2 लाख 27 हजार रुपए की ठगों ने खरीदारी कर ली।

पुलिस ने चलाया जागरूकता कैंपेन

साइबर क्राइम और ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक करने रायपुर पुलिस साइबर संगवारी के नाम से कैंपेन चला रही है। इसमें साइबर एक्सपर्ट की टीम मोहल्लों और कॉलोनियों में जाकर उन्हें जानकारी देते हैं। साइबर क्राइम से बचने के उपाय, इंटरनेट उपयोग के दौरान होने वाली चूक आदि के बारे में बता रहे हैं।

ऐसे बचे ऑनलाइन ठगी से (अभिषेक माहेश्वरी, एएसपी, साइबर-क्राइम, रायपुर)

-किसी भी तरह के रिवार्ड, इनाम के लालच में न आएं।

-किसी भी अनजान व्यक्ति को मोबाइल में आए ओटीपी नंबर शेयर न करें।
-ओटीपी शेयर नहीं करेंगे, तो आपके खाते से रकम निकालने में ठग सफल नहीं हो पाएंगे।

-बैंक अधिकारी-कर्मचारी किसी को फोन करके ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं कराते हैं।
-केवायसी, क्रेडिट कार्ड, एटीएम कार्ड आदि की औपचारिकता संबंधित बैंक के कार्यालय में जाकर ही पूरा करें।

-ऑनलाइन ठगी का शिकार होते ही साइबर हेल्पलाइन नंबर 155260 में कॉल करें। साइबर सेल रायपुर में भी जाकर शिकायत कर सकते हैं।

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