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गोबर से बिजली बनाने की शुरुआत 2 अक्टूबर से, जलवायु परिवर्तन से फसलों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ के प्रयास सराहनीय

- प्रधानमंत्री ने थपथपाई राज्य सरकार की पीठ, नेशनल इंस्टीट्यूट बायोटेक स्ट्रेस मैनेजमेंट के नये परिसर का लोकार्पण- मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य का सरप्लस चावल लेने के लिए पीएम से किया अनुरोध

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रायपुर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंगलवार को नेशनल इंस्टीट्यूट बायोटेक स्ट्रेस मैनेजमेंट बरौंडा रायपुर के नये परिसर का लोकार्पण किया। साथ ही विशेष गुणों वाली 35 फसलों की किस्में भी राष्ट्र को समर्पित की। प्रधानमंत्री ने इस संस्थान में स्नातकोत्तर कक्षाओं का भी शुभारंभ किया।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से फसलों को बचाने तथा लाभकारी खेती के लिए छत्तीसगढ़ में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने सुराजी गांव योजना के तहत गांव में निर्मित गौठानों में गोधन न्याय योजना के तहत गोबर की खरीदी और उससे जैविक खाद के साथ-साथ अब बिजली उत्पादन की राज्य सरकार की योजना को भी सराहा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी वर्चुअल रूप में शामिल हुए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राज्य का सरप्लस चावल लेने का भी अनुरोध किया। कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

गोबर से बिजली बनाने की शुरुआत 2 अक्टूबर से
मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया। साथ ही बताया कि गोधन न्याय योजना और राजीव गांधी किसान न्याय योजना से खेती-किसानी को समृद्ध बनाने की पहल की गई है। राज्य में गोधन न्याय योजना के तहत गोठानों में गोबर की खरीदी कर उससे जैविक खाद का उत्पादन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब गोबर से बिजली उत्पादन की शुरुआत 2 अक्टूबर से करने जा रहे हैं।