
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती... और छत्तीसगढ़ की बेटी रेखा बनीं डिप्टी कलेक्टर
ताबीर हुसैन @ रायपुर। कहते हैं कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता का यह अंश किसी भी निराश व्यक्ति में ऊर्जा का संचार भरने के लिए काफी है। नगरी-सिहावा की रेखा चंद्रा भी इसे फॉलो करती रही। पीएससी में तीन बार असफल होने के बाद चौथी दफे सफलता का स्वाद चखने वाली रेखा का डिप्टी कलेक्टर बनना इतना आसान भी नहीं था। रेखा ने बताया, मैं कक्षा पांचवीं की छात्रा थी। हमारे स्कूल में कलेक्टर साबिहा इशिता राय आईं थीं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर कई बातें की। उनके बातचीत का लहजा और बदलाव की सोच से मैं काफी प्रभावित हुई। तभी से मैं सिविल सर्विसेस के बारे में सोचने लगी थी। मैं घर में आकर पापा को भी बताया। पापा ने मुझे शाबाशी देते हुए प्रोत्साहित किया। वक्त गुजरता गया। मैंने कोशिश शुरू की। 3 बार असफलता मिली। लगता था मंजिल तक पहुंचना आसान नहीं था लेकिन कोई एक चीज थी जो मुझे बांधी रखती थी। विश्वास खुद पर। यकीन मेहनत पर।
सुनाई देना बंद हो गया
रेखा ने बताया कि कक्षा 12वीं में अचानक उन्हें सुनाई देना बंद हो गया। ये समय मेरे लिए बड़ी चुनौती था। लगता था मेरे अरमान अधूरे रह जाएंगे। जिस सपने को लेकर मैं जिया करती थी वह वक्त से पहले ही मुरझा गए थे। मुझे कोई राह दिखाई नहीं दे रही थी। आर्टिफिशली मशीन का यूज किया और मंजिल की ओर कदम बढ़़ाए। मैंने आईएएस की प्रिप्रेरशन शुरू की थी लेकिन तबीयत के चलते दिल्ली से लौटना पड़ा। यहां आकर पीएससी की तैयारी शुरू की।
नाकामयाबी से सीखा
असफलता को सफलता की सीढ़ी कहा जाता है। इसलिए मैंने हर नाकामयाबी से कुछ न कुछ सीखा। 3 बार सक्सेस को फिसलते देखा। पीएससी चौथे अटेंप्ड में क्लियर किया। अभी पोस्टिंग कवर्धा में हुई है जहां दो साल की ट्रेनिंग है। यूपीएससी और पीएससी एग्जाम में आंसर राइटिंग का काफी महत्व होता है। इंटरव्यू में लीडरशिप से जुड़े सवाल पूछे गए। इंटरव्यू के दौरान आपका नॉलेज नहीं देखा जाता, क्योंकि ज्ञान के जरिए तो आप यहां तक पहुंचे होते हैं। इसमें आपको एटिट्यूड और चीजों को कैसे सरल तरीके से हैंडल कर सकते हैं यह परखा जाता है।
Published on:
27 Dec 2019 12:10 am

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