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Exclusive interview: माउंट एवरेस्ट फतह करके लौटने पर याशी जैन ने कहा- पर्वतारोहियों को रोजगार देने के लिए पॉलिसी बनाने की जरूरत…वीडियो भी देखें

छत्तीसगढ़ की बेटी याशी जैन ने दुनिया की दो सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8516मीटर) और माउंट लोत्से को रेकॉर्ड 26 घंटे में फतह करने की उपलब्धि हासिल की है।

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Interview: माउंट एवरेस्ट में तिरंगा फहराकर रायपुर वापस आने पर याशी जैन ने कहा- पर्वतारोहियों को रोजगार और आर्थिक मदद देने के लिए पॉलिसी बनाने की जरूरत....वीडियो भी देखें

दिनेश कुमार @ रायपुर. छत्तीसगढ़ की बेटी याशी जैन ने दुनिया की दो सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8516मीटर) और माउंट लोत्से को रेकॉर्ड 26 घंटे में फतह करने की उपलब्धि हासिल की है। एवरेस्ट फतह करके शनिवार को रायपुर वापसी पर याशी जैन ने पत्रिका से विशेष बातचीत के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को पर्वतारोहण को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी बनाने की जरूरत है, जिसमें उन्हें रोजगार और आर्थिक मदद देने का प्रावधान हो।

Q- एक पर्वतारोही को क्या-क्या परेशानियों का सामना करना पड़ता है?
A- पर्वतारोही को सबसे बड़ी दिक्कत फंड को एकत्रित करने की होती है। क्योंकि माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई में एक पर्वतारोही को 28-30 लाख रुपए की जरूरत होती है। इतना अधिक बजट सामान्य परिवार के लिए एकत्रित करना कठित होता है। इसके लिए सरकार व प्रशासन के सहयोग बहुत जरूरी होता है। मैं अपने शहर के लोगों और शासन-प्रशासन के सहयोग से ही अपना सपना पूरा करने में सफल रही।

Q- छत्तीसगढ़ सरकार को पर्वतारोहण को बढ़ावा देने के लिए कैसी योजना बनाने की जरूरत है?
A- छत्तीसगढ़ सरकार को पर्वतारोहण को एडवेंचर स्पोट्र्स की जगह स्पोट्र्स की कैटेगरी में शामिल करना चाहिए और पर्वतारोहियों की मदद के लिए अलग से पॉलिसी बनाने की जरूरत है, जिससे उन्हें अपने अभियान को पूरा करने के लिए आर्थिक मदद मिल सके। साथ ही उनको रोजगार देने की योजना बननी चाहिए।

Q- आपने माउंट एवरेस्ट का सफर कब शुरू और खत्म किया ?
A- माउंट एवरेस्ट की यात्रा मैंने रायगढ़ से 1 अप्रैल को शुरू की थी और 17 मई की सुबह 5.45 बजे एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया। मैं दूसरी बार में माउंट एवरेस्ट चढऩे का अभियान पूरा कर सकी हूं। इससे पहले मैं 2021 में माउंट एवरेस्ट के प्रथम अभियान के दौरान कैंप.4 (8000मीटर) की चढ़ाई तक पहुंच चुकी थी।

Q- पर्वतारोहण को कॅरियर के रूप में चुनने के पीछे आपका उद्देश्य क्या है?
A- पर्वतारोहण जैसे खतरनाक व एडवेंचर स्पोट्र्स में पुरुषों का वर्चस्व है। ऐसे में मेरे मन में एडवेंचर स्पोट्र्स में बेटियों को प्रोत्साहित करने का इच्छा हुई। इसके लिए मैंने इसी खेल में कॅरियर बनाने का निर्णय लिया। परिवार ने इसमें मेरा पूरा सहयोग दिया, जिसके कारण ही मैं पर्वतारोहण में यह उपलब्धि हासिल कर सकी।

Q- आपका आगे क्या प्लान है?
A- वर्ष 2015 में मैंने पर्वतारोहण की यात्रा शुरू की। छत्तीसगढ़ में बेटियां हर फील्ड में आगे हैं। फिर पर्वतारोहण में क्यों पीछे रहें। आगे मैं बचे तीन महाद्वीपों की ऊंची चोटियों पर छत्तीसगढ़ के कदम पहुंचाना चाहती हूं।