scriptFIR against ormer ministers Lakhma-Bhagat in coal-liquor scam | कोल-शराब घोटाले में पूर्व मंत्री लखमा-भगत सहित 100 पर FIR, IAS व कई कांग्रेसी नेता भी शिकंजे में | Patrika News

कोल-शराब घोटाले में पूर्व मंत्री लखमा-भगत सहित 100 पर FIR, IAS व कई कांग्रेसी नेता भी शिकंजे में

locationरायपुरPublished: Jan 27, 2024 12:45:28 pm

CG coal-liquor scam: 100 लोगों में छत्तीसगढ़ में पूर्व मंत्री लखमा-भगत सहित पूर्व मुख्य सचिव, दो निलंबित आईएएस, एक रिटायर्ड आईएएस और प्रभावशाली कांग्रेस नेताओं के नाम शालिम है

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CG coal-liquor scam: छत्तीसगढ़ में कोल-शराब स्कैम मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने लगभग 100 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इन 100 लोगों में छत्तीसगढ़ में पूर्व मंत्री लखमा-भगत सहित पूर्व मुख्य सचिव, दो निलंबित आईएएस, एक रिटायर्ड आईएएस और प्रभावशाली कांग्रेस नेताओं के नाम शालिम है। बता दें कि किसी घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी की ओर से यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। देखना होगा कि अब आगे क्या कुछ होता है।

ACB में जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है उनमें पूर्व मंत्री कवासी लखमा, अमरजीत भगत, पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, जेल में बंद निलंबित IAS रानू साहू, समीर बिश्नोई, अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा, कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, पूर्व कांग्रेसी विधायक शिशुपाल सोरी, चंद्रदेव राय, बृहस्पत सिंह, यूडी मिंज, गुलाब कमरो के नाम भी शामिल हैं. इसके अलावा एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी मित्र विजय भाटिया का नाम भी एफआईआर में दर्ज है।
कोल ट्रांसपोर्टेशन में लेवी वसूलने का है मामला

तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान कोयला ट्रांसपोर्टेशन में लेवी वसूलने और सिंडिकेट बनाकर शराब में अवैध उगाही के मामले की जांच ईडी कर रही है। ED ने कोयला घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव रही सौम्या चौरसिया, निलंबित आईएएस समीर बिश्नोई, रानू साहू, सूर्यकांत तिवारी, लक्ष्मीकांत तिवारी, सुनील अग्रवाल, निखिल चंद्राकर जेल में बंद हैं. शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि शराब घोटाले में 2,161 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है, जो 2019 में सूबे के वरिष्ठ नौकरशाहों, राजनेताओं, उनके सहयोगियों की मिलीभगत का परिणाम है।
सरकार चला रहे नेताओं के पास पैसे जाने का आरोप

आरोप यह भी लगा कि शराब की बिक्री पर प्रदेश को मिलने वाली ड्यूटी की इस बड़ी लूट का हिस्सा राज्य में सरकार चला रहे नेताओं के पास भी जाता था। छत्तीसगढ़ में प्राइवेट प्लेयर्स को अनुमति नहीं है और आठ सौ आउटलेट से ही शराब बेचा जाता है. इससे बेचे जाने वाले शराब की बिक्री पर प्रदेश को ड्यूटी मिलती है, लेकिन एक सिंडिकेट किए गए फर्जीवाड़े से सरकार को मिलने वाले 2,161 करोड़ रुपये लूट लिए गए।
ईडी की जांच में यह बात भी सामने आई थी कि छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा राज्य में शराब का प्रबंधन और मॉनिटरिंग की जाती है. महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर ने प्रदेश के आठ सौ आउटलेट पर अपने लोगों को तैनात करवाकर इन लोगों की मदद से डुप्लीकेट होलोग्राम बनाया और उससे अवैध देशी और विदेशी शराब बेची गई। जांच एजेंसी के अनुसार अनवर ढेबर अपने लिए कमीशन का 15 प्रतिशत रखता था और बाकी सत्तासीन राजनेताओं को चला जाता था।

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