
dead body
भिलाई . भिलाई की एक महिला को सांस लेने में परेशानी हो रही थी तब परिवार उन्हें लेकर भिलाई, दुर्ग और रायपुर के पांच अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा लेकिन कहीं भर्ती नहीं किया गया। आखिर छठे हॉस्पिटल में पहुंचते-पहुंचते बीमार महिला का सिस्टम के आगे दम उखड़ गया। मां बच्चों के सामने ऑक्सीजन नहीं मिलने से तड़प-तड़प कर दुनिया से चली गई। परिवार का दर्द यहीं नहीं खत्म नहीं हुआ। अब शव के लिए उनको पत्राचार में उलझा दिया गया है। 30 घंटे बाद भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। जिला प्रशासन जारी गाइडलाइन का किस तरह से पालन कर रहा है, इसकी पोल इस मामले ने खोलकर रख दी है। मरीज को हॉस्पिटल में दाखिल लेने से हर हॉस्पिटल पहले मना करते रहे। अब जिस हॉस्पिटल के दरवाजे पर आने के बाद मां ने दम तोड़ा, वहां से शव देने के नाम पर परेशान किया जा रहा है। मंगलवार की रात से बुधवार की रात तक परिवार का हर सदस्य बीएसआर हाईटेक हॉस्पिटल के सामने बैठा हुआ है। बार-बार जाकर यहां के जिम्मेदार से पूछने पर कि आखिर शव क्यों नहीं दे रहे हैं, जवाब मिलता है, कोरोना जांच कराने सीएमएचओ को दस्तावेज भेजा है। वहां से होगा तब देंगे। अब रात के 7.30 बज रहे हैं, तब घर लौट रहे हैं। अकेले, मां नहीं है साथ। सुबह शव दिया जाएगा, तब तक घर में जाकर इंतजार किया जाएगा।
मां के दर्द की कहानी बेटी माधुरी निषाद की जुबानी
मां को सांस लेने में परेशानी हो रही थी, बुखार भी धीरे-धीरे बढ़ रहा था। तबीयत अधिक न बिगड़ जाए, यह सोचकर पिता से कहा, एंबुलेंस बुला लो। एंबुलेंस आते ही मां का सिर अपने गोद में रखकर पास के आईएमआई हॉस्पिटल, खुर्सीपार के लिए करीब 3.45 बजे निकले। रास्ते में मां सांस आसानी से नहीं ले पा रही थी। वहां पहुंचते ही डॉक्टर ने कहा कोरोना टेस्ट करवाए हो, हमने कहा-नहीं। वहां जांच किए और 1000 रुपए ले लिए। इसके बाद कहा, यहां बेड और ऑक्सीजन दोनों नहीं है। शंकरा हॉस्पिटल, जुनवानी लेकर चले जाओ। मां की हालत खराब होती देख वे बिना किसी तरह से जिराह किए एंबुलेेस को जुनवानी की ओर घुमवा दिया।
शंकरा से एम्स, मेकाहारा और फिर भिलाई
शंकरा में पहुंचे तो केजुअल्टी में मरीज का टेंप्रेचर देखा गया और कहा कि यहां बेड खाली नहीं है। एम्स, रायपुर लेकर चले जाओ। मां की तकलीफ बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे न मैं, न पापा, इस वजह से एंबुलेंस को लेकर रायपुर की ओर बढ़ गए। एम्स, रायपुर पहुंचे तो वहां भीतर जाकर बताते ही कह दिया गया कि बेड खाली नहीं है। मेकाहारा, रायपुर लेकर चले जाओ। मेकाहारा लेकर गए। तब वहां पर्चा बनाया और बताया गया कि बेड खाली नहीं है। भिलाई लेकर चले जाओ।
कुम्हारी के हॉस्पिटल में नहीं मिला कोई जिम्मेदार
रायपुर से लौटते वक्त कुम्हारी में एक निजी हॉस्पिटल नजर आया। मां को सांस लेने में पहले से अब अधिक तकलीफ हो रही थी। भिलाई की ओर चालक ने एंबुलेंस को बढ़ा दिया। रास्ते में पुराने चिकित्सक जो जामुल में रहते हैं, पिता ने उनसे बात किया। उन्होंने कहा, हाईटेक हॉस्पिटल लेकर जाओ, वहां फोन कर जिम्मेदार को बता देते हैं। तब सीधे एंबुलेंस को लेकर हाई टेक पहुंचे। तब करीब रात के 10 बज रहे थे। वहां चिकित्सक ऑक्सीजन लगाकर कुछ दवा का लिस्ट दिए, दवा लेकर आने से पहले ही सबकुछ खत्म हो चुका था। मां तड़पते-तड़पते दुनिया से चली गई, किसी हॉस्पिटल ने ऑक्सीजन लगाकर थोड़ी राहत नहीं दी।
लाते ही हो गई थी मौत
खुर्सीपार से 54 साल की महिला को मंगलवार की रात में हॉस्पिटल लेकर आए थे। यहां पहुंचते ही चंद मिनटों में उनकी मौत हो गई थी। इससे जुड़े दस्तावेज को दुर्ग के स्वास्थ्य विभाग में भेज दिया है। कोरोना जांच के बाद शव को नगर निगम के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए परिजन के सामने सौंप दिया जाएगा।
संजय सिंघानिया, अधिकारी, बीएसआर हाईटेक हॉस्पिटल, भिलाई
चिन्हित हॉस्पिटल ने लौटाया
आईएमआई के बाद वे शंकराचार्य गए थे, वहां कोविड केयर सेंटर, जुनवानी जिला प्रशासन के पास है। दूसरा निजी हॉस्पिटल है। आईएमआई, खुर्सीपार ने दाखिला क्यों नहीं लिया यह जानकारी ली जाएगी। अंतिम संस्कार के संबंध में मैने सीएचएमओ से कहा है कि तुरंत कार्रवाई करें।
डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, कलेक्टर, दुर्ग
Published on:
11 Sept 2020 12:45 am
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