
फूड लैब अपडेट नहीं
Chhattisgarh News: रायपुर। प्रदेश की एकमात्र लैब में अब तक माइक्रोबायोलॉजी लैब नहीं बन पाया है। 4 साल पहले फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया से 4 करोड़ रुपए माइक्रोबायलॉजी जांच के लिए लैब को विकसित करने के लिए मिले थे। संसाधनों की कमी के (Raipur News) कारण छत्तीसगढ़ की लैब को सिर्फ 5 से 6 प्रकार की ही जांच की अनुमति मिल ही पाई है।
प्रदेश के सभी जिलों से लिए जाने वाले 20 प्रकार के सैंपलों की माइक्रोबायोलॉजी जांच के लिए लाखों रुपए हर साल विभाग दूसरे राज्यों की लैब को देना पड़ता है। बता दें कि 20 साल बाद भी तकरीबन 70 फीसदी खाद्य पदार्थों के सैम्पलों की जांच रायपुर में नहीं होती है। इसके लिए पुणे या कोलकाता सैम्पल भेजा जाता है। दरअसल, लैब में जांच मशीनें एफएसएसएआई से आने के बाद भी इंस्टाल तो हुई हैं, लेकिन जांच के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है।
64 में 43 पद अभी भी खाली
ड्रग टेस्टिंग लैब रायपुर में 64 में 43 पद खाली हैं। फूड टेस्टिंग एनालिस्ट सिर्फ एक लैब में फूड टेस्टिंग एनालिस्ट की कमी शुरू से बनी हुई है। यहां सिर्फ एक एनालिस्ट है जो कि लैब टेक्नीशियन के पद से प्रमोट हुए है। जबकि कम से कम पांच एनालिस्ट होने चाहिए।
2025 तक के लिए मान्यता
प्रदेश की 20 साल पुरानी एकमात्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की लैब को 4 जुलाई 2025 तक के लिए मान्यता मिल गई है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी (CG Hindi News) ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने देश भर के 232 लैबों की मान्यता के संबंध में आदेश जारी किया है।
अभी सिर्फ इन उत्पादों की जांच
अभी मिली मान्यता में अनाज और अनाज से बने उत्पाद, नमक, मसाले और वनस्पति, तेल और वसा, इमल्शन, डेयरी उत्पाद और एनालॉग्स की ही जांच शामिल हैं।
लैब को 4 जुलाई 2025 तक के लिए मान्यता मिल गई। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने इस संबंध में आदेश (Raipur News) जारी किया है। - केडी कुंजाम, कंट्रोलर, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग
Published on:
29 Aug 2023 11:36 am
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