16 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विदेशी स्ट्रॉबेरी की खेती छत्तीसगढ़ में… किसान उगाकर कमा रहे लाखें रूपए, 30 दिनों में ही हो रहा तैयार

Foreigner strawberries in chhattisgarh : नई राजधानी में अब विदेशी स्ट्रॉबेरी की मिठास, सुगंध फैलने लगी है।

3 min read
Google source verification
strawbery_.jpg

Foreigner strawberries in chhattisgarh : नई राजधानी में अब विदेशी स्ट्रॉबेरी की मिठास, सुगंध फैलने लगी है। यहां उगाई जाने वाली स्ट्राॅबेरी की गुणवत्ता महाबलेश्वर में पैदा होने वाली स्ट्रॉबेरी से भी ज्यादा बेहतर बताई जा रही है। लोगों के ताने सुननेे के बाद भी एक युवा ने अपनी जिद से राजधानी के गर्म मौसम में पहाड़ों की ठंड में उगने वाले स्ट्राॅबेरी की खेती करके दिखा दिया है।
राजधानी में तीन किस्मों की स्ट्रॉबेरी की फसल ली जा रही है। महज 4 माह की मेहनत में रायपुर के युवा अच्छी कमाई कर रहे हैं। प्रभात त्रिपाठी, जो कि स्वयं एक कृषि सलाहकार हैं वे पहले कई कृषि उत्पादों से संबंधित मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर दे चुके हैं।

यह भी पढ़ें : छुप-छिपाकर औरत कर रही थी गंदा काम, पुलिस ने पकड़ा रंगे हाथों, फिर जो हुआ...

नई सोच के साथ उन्होंने स्ट्रॉबेरी और अंग्रेजी सब्जियों की खेती का रायपुर में ही उत्पादन करने का बीड़ा उठाया। एकदम नया प्रयोग था इसलिए पहले उन्हें कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। एक साल पहले फसल लगाई, लेकिन नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार प्रयास से उन्होंने रायपुर में स्ट्रॉबेरी की खेती को सफल करके दिखा दिया। प्रभात का मानना है कि भविष्य में रायपुर विदेशी फलों और विदेशी सब्जियों के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर ना रहें। इसके लिए और किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।

नई किस्म पर चल रहा है प्रयोग

किसान अब अगली फसल कैलिफोर्निया स्ट्राॅबेरी उगाने पर काम कर रहे हैं। सिर्फ 30 दिन में स्ट्राॅबेरी की फसल तैयार हो जाती है। इसकी फसल दो चार दिन नहीं बल्कि पूरे पांच महीने तक चलेगी।

तीन किस्म की स्ट्रॉबेरी

रायपुर में स्ट्रॉबेरी की तीन किस्में उगाई गई हैं। विदेशी स्ट्रॉबेरी की किस्मों के पौधे भी प्रभात त्रिपाठी ने राजधानी के वातावरण में ही विकसित किए। उनके द्वारा उगाई गई विंटर डॉन, पल्मारितास और ब्रिलिएंस स्ट्रॉबेरी की सबसे मीठी किस्म हैं। विंटर डॉन भरपूर उपज देने वाली और फूड प्रोसेसिंग के उद्देश्य से उगाई जा रही है।

किसानों को किया प्रेरित

राज्य की जलवायु एवं मृदा के अनुकूल और उनकी बेहतर एग्रोनॉमी को समझने के बाद प्रभात ने स्वयं और कुछ उत्पादक किसानों के साथ मिलकर लगभग 10 एकड़ में इसकी प्रारंभिक खेती शुरू की थी, जिसका बेहतरीन परिणाम देखने को मिल रहा है। प्रभात त्रिपाठी और उनके साथी मिलकर किसानों के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ में ही इनके उत्पादन की योजना पर कार्य कर रहा है।

नहीं ली शासन से कोई मदद

अहम बात यह है की कृषि विभाग एवं हॉर्टिकल्चर विभाग से इन्होंने किसी भी तरह की कोई सरकारी मदद नहीं ली। अपने स्वयं के खर्चे से स्ट्रॉबेरी फसल की सबसे रिस्की खेती को इन्होंने सफल करके अन्य किसानों को भी इसका लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

विंटर डाउन किस्म के 1 पौधे में लगते हैं 70 से 150 फल

प्रभात ने दो एकड़ से ज्यादा में स्ट्रॉबेरी की विंटर डाउन किस्म लगाई है। इस वैरायटी के फल खट्टे-मीठे होते हैं। अनुकूल मौसम में एक पौधे पर 70 से 150 तक फल लगते हैं। इनका वजन 150 से 570 ग्राम तक रहता है। पौधे में फल आने के बाद स्ट्रॉबेरी पकने में 25 से 30 दिन लगते हैं।

यह भी पढ़ें : Ayodhya Ram Mandir : रामलला को भोग लगाने छत्तीसगढ़ के राइस मिलर्स अयोध्या भेज रहे चावल... प्रभु के लिए बनेगी खीर

नमी युक्त मिट्टी

वैसे तो स्ट्राॅबेरी की खेती के लिए कोई मिट्टी तय नहीं है, लेकिन फिर भी अच्छी उपज के लिए बलुई दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना गया है। बलुई दोमट मिट्टी में स्ट्राॅबेरी का पौधा अच्छे से चलता है और उपज भी अधिक होने की संभावना रहती है। कछारी मिट्टी में पौधे लगाने से स्ट्राॅबेरी अधिक मीठी होती है और स्वादिष्ट लगती है।

बेड तैयार करना

स्ट्राबेरी के पौधे लगाने के लिए खेत में दो फीट चौड़ा बेड बनाए और बेड से बेड की दूरी करीब डेढ़ फीट रखे। बेड की पॉलीथिन में 20 से 30 सेंटीमीटर के अंतराल पर छेद करके उसमें पौधे लगाने के लिए जगह करें। अक्टूबर, नवंबर की शुरूआत में आपकी फसल लगाई जाती है। नवंबर में बोवनी करते हैं तो दिसंबर में फसल मिल जाती है।