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पनामा पेपर्स में छत्तीसगढ़ के 4 खातों की पुष्टि, निवेशकों से पूछताछ में सामने आई ये सच्चाई

दुनिया को हिलाकर रख देने वाले पनामा पेपर मामले में छत्तीसगढ़ के 4 खातों की पुष्टि हुई है, जिसमें तीन लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

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पनामा पेपर्स में छत्तीसगढ़ के 4 खातों की पुष्टि, निवेशकों से पूछताछ में सामने आई ये सच्चाई

आवेश तिवारी/रायपुर. दुनिया को हिलाकर रख देने वाले पनामा पेपर मामले में छत्तीसगढ़ के तीन लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। भिलाई के व्यापारी चेतन संगानी ने खुद के साथ हुई पूछताछ की पुष्टि करते हुए खुद को पाक साफ बताया है। 'पत्रिका' से बातचीत में चेतन संगानी ने कहा है मेरा नाम गलती से इस सूची में आ गया है, मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। चेतन पर 2009 के दौरान शाइनलाईट इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड नाम की फर्म के निदेशक के तौर पर ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड में निवेश करने का आरोप है।

यह है मामला
पनामा पेपर्स की पहली लिस्ट 2016 में आई थी, इसमें 426 कारोबारियों का नाम लिया गया था। इसमें से एजेंसियों ने जांच करके 352 लगों को क्लीन चिट दी थी। कुल 62 केसों में कार्रवाई हुई। इससे सरकार को विदेश में 1140 करोड़ की बेनामी संपत्ति का पता चला, तो 16 केसों का मामला अब कोर्ट के सामने है।

सामने आए नए दस्तावेज
उधर, दो दिनों पूर्व पनामा स्थित दुनिया की सबसे बड़ी कानूनी सलाहकार कंपनी मोसेक फोंसेका के 12 लाख से अधिक दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया है। जिसमें उन नामों की पुष्टि की गई है, जिन्हें 2016 में सार्वजनिक किया गया था। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ से पनामा पेपर्स में चेतन संगानी, अनिश अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल और अभिषाक सिंह का नाम सामने आया था।

चेतन संगानी ने कहा
चेतन संगानी की एनवान टेक्नोलॉजी नाम की एक फर्म है। चेतन संगानी द्वारा 'पत्रिकाÓ को बताया गया कि मेरा नाम भूल से पनामा की सूची में आ गया था। जिसके बाद इनकम टैक्स वाले आए थे। मुझसे सम्बंधित जो भी दस्तावेज मांगे गए थे, मैंने वो इनकम टैक्स विभाग और सीबीडीटी को सौंप दिए थे। मेरा केस क्लोज कर दिया गया। चेतन संगानी से जब यह पूछा गया कि इस मामले से आपसे क्या गलती हुई थी, तो उन्होंने कहा, क्या गलती हुई थी, यह भी मुझे पता है, मेरे वकीलों ने सारे दस्तावेज उपलब्ध करा दिए थे। सरकार पूरी तरह से दस्तावेजों से संतुष्ट है। जहां तक मेरे काम का सवाल है हम देश-दुनिया में इक्विपमेंट की सप्लाई किया करते हैं।

मोसेक फोंसेका के खुलासे से गरमाया
लॉ फर्म मोसैक फोंसेका के दस्तावेजों में छत्तीसगढ़ से आए चार नामों की पुष्टि की है। पनामा के दस्तावेजों से पता चलता है कि अनिश अग्रवाल और अनिल कुमार अग्रवाल ने रोअरिंग वेंचर ग्रुप लिमिटेड के निदेशक के तौर पर ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड में निवेश किया था। दस्तावेजों में इनका पता 46 मोती लाल नेहरु मार्ग भिलाई है। छत्तीसगढ़ से पनामा पेपर में आए चारों नामों का 'पार्टीकुलस ट्रस्ट नेट' नामक फर्म से सीधा नाता है।

पनामा पेपर्स का खुलासा करने आइसीआइजे मानता है कि कुक आइसलैंड की यह कंपनी ओफशोर खातों (टैक्स चोरी के धन से जुड़े खाते) को खोलने में मदद करती है। अनिश अग्रवाल, सुनील कुमार अग्रवाल ने शेयर कॉर्प लिमिटेड नाम की एक फर्म को अपना शेयर नॉमिनी नियुक्त किया था। दिलचस्प यह है कि अभिषाक सिंह की फर्म क्वेस्ट हाईट लिमिटेड में भी शेयर कॉर्प ही शेयर नॉमिनी था। रोअरिंग वेंचर में सिंगापुर के जेपी मार्गन बैंक ने भी अनिश अग्रवाल और सुनील कुमार अग्रवाल की इन खातों को खोलने में मदद की थी। यह बैंक दुनिया के सर्वाधिक बड़े बैंकों में से एक है। रोअरिंग वेंचर्स के अलावा 6 अन्य ऑफशोर खातों में भी इसका नाम आया है।

छत्तीसगढ़ नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि मामले को हम विधानसभा में उठाएंगे। इसमें तत्काल जुर्म दर्ज करनी चाहिए। सरकार को इसके लिए पहल करनी चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि सीएम साहब ने मामले की जांच से कभी इनकार नहीं किया है। जो नाम हैं, उनकी जांच की जानी चाहिए।