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तिरंगा के गैंडास्वामी पहुंचे रायपुर, बोले- घरवालों को नहीं दिखाई अपनी फिल्म

दो छत्तीसगढ़ी फिल्मों की शूटिंग के लिए आए थे रायपुर

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तिरंगा के गैंडास्वामी पहुंचे रायपुर, बोले- घरवालों को नहीं दिखाई अपनी फिल्म

रायपुर के मौलश्री विहार में अभिनेता दीपक शिर्के।

ताबीर हुसैन

बॉलीवुड में मेरी किसी से रिश्तेदारी नहीं थी, मैं थिएटर करते-करते फिल्मों तक पहुंचा। सबसे पहले मैंने मराठी थिएटर राजमुकूट किया। इसके बाद धूमधड़ाका और फिर शून्य शून्य। यहां से मुझे पहचान मिली, जिसने मराठी टीवी सीरियल तक पहुंचाया। वह सीरियल इतना हिट हुआ कि मेरे लिए सिल्वर स्क्रीन के रास्ते खुल गए। यह कहा तिरंगा के गेंडा स्वामी यानी दीपक शिर्के ने। वे बिलासपुर और पाटन में शूट हो रही दो छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अभिनय करने आए थे। वे रायपुर के मौलश्री विहार स्थित अभिनेता योगेश अग्रवाल के दफ्तर में कुछ देर के लिए रुके थे। उनके साथ मराठी और छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्देशक जी. विजय और पवन गुप्ता भी थे। उन्होंने कहा, मैंने अपने दौर के लगभग हर बड़े अभिनेताओं के साथ काम किया। सिवाय दिलीप साहब के। उनके साथ काम नहीं करने का अब भी मलाल है। मैंने कभी घर वालों को अपनी फिल्म नहीं दिखाई क्योंकि मैं बहुत बुरा किरदार कर रहा था।

जो पंक्चुअल नहीं हुए, वे बाहर हुए
समय प्रबंधन पर कहा कि एक्टिंग फील्ड में टाइम का पंक्चुअल होना बहुत मायने रखता है। मैंने अमिताभ बच्चन समेत जितने भी अभिनेताओं संग काम किया सभी टाइम के पंक्चुअल थे। मैंने देखा है कि जो पंक्चुअल नहीं हुए, वे बाहर हुए।

राजकुमार ने कहा था गैंडा स्वामी
तिरंगा में मेरा नाम गूंडा स्वामी था लेकिन राजकुमार साहब ने उसे मोडिफाई करते हुए गैंडा स्वामी कर दिया। आज भी लोग मुझे इसी नाम से जानते हैं।

क्लास-1 ऑफिसर बीवी मिली
मैं सिर्फ एक्टिंग करता था जबकि मेरे साथ वाले लोग बैंक में जॉब करते थे। उस वक्त मैं इस बात से चिंतिंत था कि इनकम का और भी जरिया होना चाहिए। भगवान ने मेरी सुनी और मेरी शादी सुपर क्लास-1 ऑफिसर से हुई।

काम करते थे तो पहले से बताते नहीं थे

मैंने जितनी भी फिल्में की है, पहले से किसी को नहीं बताया। रिलीज होने के बाद खुद का काम देखते थे, फिर किसी को बताने की सोचते थे। ऑडियंस का भी बढिय़ा रिस्पांस मिलता था। नहीं बताने का कारण यह था कि एडिटिंग के बाद पता नहीं कितने सीन में हम नजर आएं। कहीं दोस्त मजाक न उड़ाए इसलिए चुप ही रहते थे।

आनंद से काम करो

नई पीढ़ी को दिए मैसेज में कहा कि लगन और मन से काम करो। काम में आनंद लो। आनंद से काम करोगे तो दूसरों को आनंद दे पाओगे