
छत्तीसगढ़ी साहित्य म ‘गांधीजी’
गुलाम भारत ल अजाद कराय बर वो समे किसिम- किसिम के लड़ई अउ आंदोलन होइस। ए अंदोलनमन म एक ले बडक़े एक त्यागी अउ बलिदानी नेता उभरिन। फेर, महत्मा गांधीजी असन कोनो अउ के परभाव देसभर म नइ परे रिहिस। गांधी बबा के बाते कुछु अउ रिहिस।
हमर छत्तीसगढ़ म घलो ए लड़ई अउ आंदोलन के बड़ भारी परभाव परे रिहिस। खास करके गांधी बबा के। संगे-संग छत्तीसगढ़ी भाखा म लिखइया वो समे के कवि-लेखकमन घलो गांधीजी ऊपर एक से एक रचना करिन।
कवि पंडित द्वारिका परसाद तिवारी ‘विप्रजी’ गांधी बबा ल कोनो देवता ल कम नइ समझयं। विप्रजी लिखथें-
‘देवता बन के आये गांधी
देवता बन के आए।
राम किरिस्न अवतार ल जानेन
रावन -कंस ल मारिन।
हमर देस ल राक्छसमन सों
लड़-लड़ दुनो उबारिन।’
ठीक अइसनेच भाव अउ गांधी बबा ल अंगरेजमन के नास करे बर अउतरे हें, एके सोच रखइया पंडित कुंजबिहारी चौबेजी लिखे हवें।
अवतरे धरती में
हवे गांधी देवता
सत के खातिर ओ दाई
घर-बार छोडिक़े
हां, घर-बार छोडिक़े।’
जनवादी कवि चौबेजी कलम अउ करांति के सिपाही रिहिन। आपमन ल ‘आस्था के कवि’ कहे जाथे।इन ल गांधी जी ऊपर अगाध आस्था रिहिस। अजादी देवाय बर अवतरे गांधी ऊपर उंकर आस्था ल ए डांड़ न देखते बनथे.
‘एक दिन जितीहै
ओ गांधी महात्मा
हां गांधी महात्मा।
उड़ही सबो जगहा झंडा सुराजी
जुग-जुग जीयै गांधी महाराज
ओ गांधी महाराज।’
बात-बात म हाना के उल्लेख करइया गांधीवादी विचारधारा के कवि कोदूराम दलितजी छत्तीसगढ़ के लोग-लइकामन म रास्टरीय भावना जगाय खातिर लिखथें।
‘गांधीजी छेरी भइया
में-में नारियाय रे
वोकर दूध पिये ल भइया
बुढ़वा जवान हो जाय रे।’
दलितजी गांधी बबा के बारे म तो एक ले बढक़े एक कविता लिखिन. ‘जागरण गीत’ म देस ल सुराज मिले के बेरा म गांधीजी के योगदान ल बतात कहिथे।
‘अड़बड़ दिन म होइस बिहान।
सुबरन बिखरे के उइस भान।
छिटकिस स्वतंत्रता के अंजोर।
जगमगा उठिस अब देस तोर।
सत अउर अहिंसा रामबान।
मारिस बापूजी तान-तान।।’
अजादी के लड़ई के बेरा म गांधीजी एक बड़ भारी हथियार के पद्भयोग करे रिहिन> चरखा अउ तकली। ऐकर बारे दलितजी लोगनमन ल कहिथें।
‘छोड़व आलस कातव सूत।
भागहि बेगारी के भूत।
भुलव मत बापू के बात।
करव कताई तुम दिन -रात।’
अउ चरखा तकली के महत्तम ल ए डा3ड़ म देखव।
‘चरखा तकली चला चला के
खद्दर पहिने ओढ़े।
धन्य बबा गांधी,
सुराज ल लेये तभे छोड़े।’
खादी टोपी जेला गांधी टोपी घलो कहे जाथे, आजादी के लड़ई के समे ऐला पहिनना गरब के बात रहय। आजो गांधी के रद्दा म चलइयामन ए टोपी ल बड़ गरब के साथ पहिरथें। ऐकर बारे म दलितजी लिखे हें।
‘अब तो तूंहरे राज हे
खादी के उज्जर टोपी ये
गांधीजी के ताज हे।’
ए सबमन तो गांधी जी के समे अउ अजादी के आसपास के कवि रिहिन जेकर कवितामन म गांधीजी स्वभाविक रूप ले बसे हें। फेर, गांधी केवल हाड़. मास के एक इंसाने बस नइ रिहिन, बल्कि एक विचार बन के हमर पीढ़ी दर पीढ़ी के लोगलइका अउ कवि -लेखकमन गांधी के बारे म लिखथें-पढ़थें।
नावा पीढ़ी के कवि रमेस चौहानजी अपन कविता ‘धर गांधी के बात ला’ म हमर छत्तीसगढ़ के लोगनमन ल गांधी बबा के बात ल गुने अउ अपन जिनगी म उतार के घर, गांव अउ समाज ल सुग्घर बनाय बार आह्वान करत हें।
‘धर गांधी के बात ला,
अपने अचरा छोर।
सत्य, अहिंसा के डहर,
रेंगव कोरे-कोर।
दिखय चकाचक गांव हा,
अइसे कर तैं काम।
दूर करवा सब गन्दगी,
होवय जउन तमाम।
साफ- सफाई होय ना,
तन -मन के गा तोर।’
ऐमन तो बस काव्य के थोरकुन उदाहरन हे। लोचन परसाद पांडे, केयूर भूसन जइसे बड़े -बड़े कवि अउ गीतकारमन के रचनामन म गांधी बबा के महत्तम पढ़े बर मिल जही।
काव्य के संगे-संग छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य म घलो गांधीजी रचे- बसे हें। चाहे कहिनी हो, नाटक हो या उपन्यास। बछर 1947 म भारत अजाद होइस। महात्मा गांधी के अनुगूंज गांव-गली, खेत-खार सबो कोती फइले रिहिस। ठीक इही समे बछर 1948 म पंडित मुरलीधर पांडेयजी एक नाटक ‘विस्वास’ के रचना करे रिहिन। एकर दूसर अउ तीसर अध्याय म देस-दुनिया म गांधीजी के परभाव के बरनन मिलथे।
आजादी के पहिली पटवारी, अधिकारी, राजा, महाराजा आम आदमीमन के ऊपर भारी अतियाचार अउ सोसन करें। गांधीजी के परभाव ले वोमन ल थोरकुन राहत मिलिस। एकर बारे म नाटक के एक पात्र समधी कहिथे- गांधी महात्मा के नांव तो हमरो तरफ फइले हवय समधी। हमरोच राज म अब राजामन भेंट बेगारी ल थोरकुन ढील कर देइन हवय। सब ह गांधी के धरम आय।’
जनवादी कवि चौबेजी ल गांधीजी ऊपर अगाध आस्था रिहिस। अजादी देवाय बर अवतरे गांधी ऊपर उंकर आस्था ल ए डांड़ न देखते बनथे.
‘एक दिन जितीहै
ओ गांधी महात्मा
हां गांधी महात्मा।
उड़ही सबो जगहा झंडा सुराजी, जुग-जुग जीयै गांधी महाराज, ओ गांधी महाराज।’
कवि कोदूराम दलितजी छत्तीसगढ़ के लोग-लइकामन म रास्टरीय भावना जगाय खातिर लिखथें।
‘गांधीजी छेरी भइया
में-में नारियाय रे
वोकर दूध पिये ल भइया
बुढ़वा जवान हो जाय रे।’
दलितजी देस ल सुराज मिले के बेरा म गांधीजी के योगदान ल बतात कहिथे।
अड़बड़ दिन म होइस बिहान।
सुबरन बिखरे के उइस भान।
छिटकिस स्वतंत्रता के अंजोर।
जगमगा उठिस अब देस तोर।
सत अउर अहिंसा रामबान।
मारिस बापूजी तान-तान।।’
अजादी के लड़ई के बेरा म गांधीजी एक बड़ भारी हथियार के पद्भयोग करे रिहिन> चरखा अउ तकली। ऐकर बारे दलितजी लोगनमन ल कहिथें।
‘छोड़व आलस कातव सूत।
भागहि बेगारी के भूत।
भुलव मत बापू के बात।
करव कताई तुम दिन -रात।’
अउ चरखा तकली के महत्तम ल ए डा3ड़ म देखव।
‘चरखा तकली चला चला के
खद्दर पहिने ओढ़े।
धन्य बबा गांधी,
सुराज ल लेये तभे छोड़े।’
खादी टोपी जेला गांधी टोपी घलो कहे जाथे, आजादी के लड़ई के समे ऐला पहिनना गरब के बात रहय। आजो गांधी के रद्दा म चलइयामन ए टोपी ल बड़ गरब के साथ पहिरथें। ऐकर बारे म दलितजी लिखे हें।
‘अब तो तूंहरे राज हे
खादी के उज्जर टोपी ये
गांधीजी के ताज हे।’
ए सबमन तो गांधी जी के समे अउ अजादी के आसपास के कवि रिहिन जेकर कवितामन म गांधीजी स्वभाविक रूप ले बसे हें। फेर, गांधी केवल हाड़. मास के एक इंसाने बस नइ रिहिन, बल्कि एक विचार बन के हमर पीढ़ी दर पीढ़ी के लोगलइका अउ कवि -लेखकमन गांधी के बारे म लिखथें-पढ़थें।
नावा पीढ़ी के कवि रमेस चौहानजी अपन कविता ‘धर गांधी के बात ला’ म हमर छत्तीसगढ़ के लोगनमन ल गांधी बबा के बात ल गुने अउ अपन जिनगी म उतार के घर, गांव अउ समाज ल सुग्घर बनाय बार आह्वान करत हें।
‘धर गांधी के बात ला,
अपने अचरा छोर।
सत्य, अहिंसा के डहर,
रेंगव कोरे-कोर।
दिखय चकाचक गांव हा,
अइसे कर तैं काम।
दूर करवा सब गन्दगी,
होवय जउन तमाम।
साफ- सफाई होय ना,
तन -मन के गा तोर।’
ऐमन तो बस काव्य के थोरकुन उदाहरन हे। लोचन परसाद पांडे, केयूर भूसन जइसे बड़े -बड़े कवि अउ गीतकारमन के रचनामन म गांधी बबा के महत्तम पढ़े बर मिल जही।
काव्य के संगे-संग छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य म घलो गांधीजी रचे- बसे हें। चाहे कहिनी हो, नाटक हो या उपन्यास। बछर 1947 म भारत अजाद होइस। महात्मा गांधी के अनुगूंज गांव-गली, खेत-खार सबो कोती फइले रिहिस। ठीक इही समे बछर 1948 म पंडित मुरलीधर पांडेयजी एक नाटक ‘विस्वास’ के रचना करे रिहिन। एकर दूसर अउ तीसर अध्याय म देस-दुनिया म गांधीजी के परभाव के बरनन मिलथे।
आजादी के पहिली पटवारी, अधिकारी, राजा, महाराजा आम आदमीमन के ऊपर भारी अतियाचार अउ सोसन करें। गांधीजी के परभाव ले वोमन ल थोरकुन राहत मिलिस। एकर बारे म नाटक के एक पात्र समधी कहिथे- गांधी महात्मा के नांव तो हमरो तरफ फइले हवय समधी। हमरोच राज म अब राजामन भेंट बेगारी ल थोरकुन ढील कर देइन हवय। सब ह गांधी के धरम आय।’
Published on:
02 Oct 2023 03:48 pm
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