
Ganesh Chaturthi 2022:दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ मान्यताओं का गढ़ होने के साथ-साथ कई देवी देवताओं का घर भी है। चाहे बात दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी माँ का हो या डोंगरगढ़ की बम्लेश्वरी का, लोग छत्तीसगढ़ में विब्भिन्न संस्कृतियों के साथ इन् देवी देवताओं के भी दर्शन करते ही हैं। भारत देश में कई गणेश मंदिर हैं, लेकिन घने जंगल के बीच में एक पहाड़ी के ऊपर स्थित एक छोटे, रहस्यमय मंदिर की कल्पना ही कुछ और है। छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर से लगभग 350 किमी दूर दंतेवाड़ा जिले में ढोलकल नामक पहाड़ पर ऐसा मंदिर वास्तव में मौजूद है। यह समुद्र तल से 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, और 2012 में एक आर्किओलॉजिस्ट द्वारा इसे फिर से खोजे जाने तक सदियों तक छिपा रहा।
ढोलकल को खास बनाने वाली कहानी
स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार, बहुत समय पहले ढोलकल पहाड़ी पर भगवान गणेश और ऋषि परशुराम के बीच युद्ध हुआ था। यह एक भयंकर युद्ध था जिसमें परशुराम ने अपने फरसा या कुल्हाड़ी से गणेश पर हमला किया था। इस तरह पहाड़ी की तलहटी में बसा गाँव फरसापाल कहलाया। दोनों शख्सियतों के बीच की लड़ाई किसने जीती, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।
1000 सालों से भी पुराना है ये मंदिर
परशुराम और गणेश के बीच युद्ध की याद में, चिंदक नागवंशी वंश के राजाओं ने 11 वीं शताब्दी में पहाड़ी की चोटी पर भगवान गणेश की एक पत्थर की मूर्ति स्थापित की थी। 2.5 से 3 फीट की मूर्ति को ढोलक के आकार में उकेरा गयी, जो आमतौर पर शास्त्रीय संगीत में इस्तेमाल किया जाने वाला संगीत वाद्ययंत्र है; इसलिए, पहाड़ी का नाम ढोलकल रखा गया है। मूर्ति में गणेश को उनके विशिष्ट ललितासन या चंचल और सहज मुद्रा में बैठे हुए दिखाया गया है। स्थानीय निवासी पूरे वर्ष गणेश की मूर्ति की पूजा करते हैं, और जनवरी-फरवरी के बीच माघ के महीने में इस स्थल पर एक विशेष मेला आयोजित किया जाता है।
गणेश चतुर्थी भी होती है ख़ास
स्थानीय लोगों द्वारा गणेश चतुर्थी के अवसर पर हर वर्ष इस जगह एक पूजा का आयोजन किया जाता है। वहाँ की परंपरा के मुताबिक़ गणेश की प्रतिमा तक स्थानीय लोग पहुंच कर भगवन के दर्शन करते हैं और पूजा करते हैं। आस पास के लोग भी गणेश उत्सव में ढोलकल पहाड़ी तक ट्रेक कर के चढ़ते हैं और गणपति की पूजा कर वापस लौटते हैं।
Published on:
28 Aug 2022 04:13 pm
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