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गणेश चतुर्थी पर बन रहा यह विशेष संयोग, इस समय करें गणपति की मूर्ति स्थापना, जानें पूजा विधि

इस साल गणेश चतुर्थी पर वही शुभ संयोग बन रहा है। आइए जानते थे गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में:

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Ganesh Chaturthi

Ganesh Chaturthi 2019: इस दिन और इस समय करें गणेश जी की स्थापना, इस मुहुर्त में होगी हरितालिका तीज

हर वर्ष भादप्रद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु भक्त अपने घरों में मिट्टी से बने गणेश जी की अस्थाई स्थापना करें। लगातार 10 दिन तक लंबोदर गौरी नंदन गणेश जी पूजा आराधना से पूरी वातावरण भक्तिमय रहेगा। इस साल गणेश चतुर्थी पर वही शुभ संयोग बन रहा है। भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि यानी की शनिवार 22 अगस्त को है, इस बार 11 दिनों तक गणेश महापर्व का उत्सव मनाया जाएगा।आइए जानते थे गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में:

राशि रहेगी। इस अद्भुत संयोग और गणपति की कृपा से पृथ्वी के सभी संकट खत्म होंगे। चतुर्थी शाम 7:57 बजे तक है और हस्त नक्षत्र भी शाम 7:10 बजे तक है।

पीड़ित जातक इस दिन गणपति को लाल फूल के साथ नीले रंग के भी फूल अर्पित करें। शनि दोष दूर होगा। साथ ही प्रभावशाली रवि योग शाम 7:11 बजे तक रहेगा।

यह धन समृद्धि दायक है। गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा कन्या में व गुरु धनु में रहेंगे। इससे ज्योतिष शास्त्र में वर्णित यह शुभ योग निर्मित होगा। जिसके शुभ फल को स्वयं गणेश जी प्रदान करते हैं।

प्रथम देव गणपति बप्पा सभी विघ्नों को हरने वाले देवता है, इसीलिए विघ्न विनाशक कहा जाता है। अर्थात गणेश जी की मंगलमूर्तियां विराजने के लिए चतुर्थी तिथि पर दिनभर शुभ मुहूर्त है।

- गणेश स्थापना के बाद सबसे पहले घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा का संकल्‍प लें। फिर गणेश जी का ध्‍यान करने के बाद उनका आह्वन करें। इसके बाद गणेश को स्‍नान कराएं। सबसे पहले जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) और पुन: शुद्ध जल से स्‍नान कराएं। इसके बाद गणेश जी को वस्‍त्र चढ़ाएं। वस्त्र चढ़ाने के बाद गणेश जी की प्रतिमा पर सिंदूर, चंदन, फूल और फूलों की माला अर्पित करें और धूप-अगरबत्ती लगाएं।

इतना होने के बाद गणेश जी को नैवेद्य चढ़ाएं। नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़ और फल चढ़ाएं। इसके बाद गणपति को नारियल और दक्षिण प्रदान करें। अंत में गणपति की आरती करें। गणेश जी की आरती कपूर के साथ घी में डूबी हुई एक या तीन या इससे अधिक बत्तियां बनाकर की जाती है।