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गेट के टॉपर को पढ़ाई के दौरान ही मिल गया था 8 लाख का पैकेज

रायपुर के नारायण देवांगन की माइनिंग ब्रांच में देश में आठवीं रैंकिंग, पढ़ाई में डिस्टर्ब न हो इसलिए कॉलेज के हॉस्टल में रह कर की पढ़ाई

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gat topper raipur

ताबीर हुसैन@रायपुर. पिता की किराने की दुकान थी। स्कूल से लौटने के बाद इस बच्चे को वहां बैठना पड़ता था। लेकिन उसे यह काम जरा भी पसंद नहीं था। वह इन सब चीजों से बाहर निकलना चाहता था। वह दूसरे बच्चों की तरह खेलने और घूमने भी नहीं जा पाता था। हालांंकि वह इसके लिए पिता को दोष नहीं देता। उसे मालूम था कि किराने की शॉप चलाना एक व्यक्ति के बस की बात नहीं। वह इसके उपाय भी सोचने लगा। उसे मालूम था कि अगर वह अच्छे से पढ़ गया तो किराने की दुकान से उबर तो जाएगा अपने मुताबिक कॅरियर भी बना पाएगा। जैसे-तैसे आगे बढ़ता गया। आज गेट एग्जाम की ऑल इंडिया रैंकिंग में आठवां स्थान हासिल कर खुद को साबित भी कर दिया। प्रस्तुत है सत्यम विहार कॉलोनी रायपुरा निवासी एनआइटी में माइनिंग ब्रांच के नारायण देवांगन से बातचीत के अंश।

इंजीनियरिंग की तरफ कैसे रुख किया?
दसवीं बोर्ड एग्जाम में 90.96 परसेंट स्कोर किया। इससे पहले सभी एग्जाम में खुद को टॉप 3 तक मेंटेन रखा। मेरे माक्र्स देखकर मामा के बेटे ने एनआइटी या आइआइटी की सलाह दी। इसके बाद मैंने जेइइ की तैयारी शुरू कर दी। इस तरह मेरा सलेक्शन एनआइटी में हो गया और माइनिंग ब्रांच में दाखिला मिला।

फैमिली बैकग्राउंड कैसा है?
पापा की किराना दुकान है। मम्मी हाउस वाइफ। तीन बहनें हैं। बड़ी दीदी की शादी हो गई। मंझली दीदी देल्ही में यूपीएससी की तैयारी कर रही है। छोटी दीदी की इंजीनियरिंग पूरी हो गई है। पापा पढ़ाई के लिए शुरू से सपोर्टिव रहे हैं।

गेट की तैयारी कैसे की?
पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) में जॉब पाना हर किसी का सपना होता है। इस एग्जाम के बारे में मुझे फस्र्ट इयर से जानकारी मिल गई थी। मैंने सारे सबजेक्ट पढ़कर अपना बेस स्ट्रांग कर लिया था। थर्ड इयर से गेट की तैयारी स्टार्ट की। माइनिंग ब्रांच के गेट एग्जाम के लिए कोचिंग अवलेबल नहीं थी तो मैंने सेल्फ स्टडी की। सातवें सेमेस्टर तक मेरा सारा सिलेबस कवर हो गया था। गौरव और नमन सर ने तैयारी के लिए हेल्प की।

आगे का क्या प्लान है?
सातवें सेमेस्टर में मेरा प्लेसमेंट वेदांता रिसोर्सेस में हो गया था। मुझे ८ लाख सालाना का पैकेज मिला। अब गेट में अच्छी पोजिशन है इसलिए एनटीपीसी ज्वाइन करना चाहता हूं। मेरी सफलता के पीछे मेरे परिवार का पूरा सपोर्ट रहा है। गेट की प्रिपे्रशन में डिस्टर्बेंस न हो इसलिए मैंने एनआइटी के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की।