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पांच साल बाद भी नहीं बन पाया गोबर गैस प्लांट, निगम ने क्रेडा पर फोड़ा ठीकरा

डेयरी से निकलने वाले गोबर से गैस बनाने यहां गोबर गैस प्लांट लगाने साल 2017-18 में निगम ने जमीन का आबंटन भी किया। इसके लिए क्रेडा ने योजना भी तैयार की, लेकिन अब तक यहां प्लांट नहीं बन पाया।

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पांच साल बाद भी नहीं बन पाया गोबर गैस प्लांट, निगम ने क्रेडा पर फोड़ा ठीकरा

पांच साल बाद भी नहीं बन पाया गोबर गैस प्लांट, निगम ने क्रेडा पर फोड़ा ठीकरा

राजधानी की सड़कों को मवेशियों से मुक्त कराने निगम के जोन क्रमांक-6 में गोकुल नगर बनाया गया। इस स्थान पर शहर में संचालित डेयरी वालों को बसाया गया। डेयरी से निकलने वाले गोबर से गैस बनाने यहां गोबर गैस प्लांट लगाने साल 2017-18 में निगम ने जमीन का आबंटन भी किया। इसके लिए क्रेडा ने योजना भी तैयार की, लेकिन अब तक यहां प्लांट नहीं बन पाया। इस गैस का उपयोग एलपीजी के विकल्प के रूप में करने की योजना थी। प्लांट के लिए जमीन चिन्हांकन के बाद अब निगम प्रशासन क्रेडा के अफसरों पर जिम्मेदारी मढ़ रहे हैं।

गोठान के बगल में बनना था प्लांट
2017-18 में गोकुल नगर तालाब के पास स्थित गोठान के बगल में गोबर गैस प्लांट के लिए जगह का चिन्हांकन किया गया था। यहां गड्ढे भी खोदे गए, लेकिन 5 साल बीत गए प्लांट नहीं बन पाया।

6 करोड़ में बनना था प्लांट
गोकुल नगर में गोबर गैस प्लांट 6 करोड़ में बनना था। प्लांट से उत्पन्न गैस का व्यावसायिक इस्तेमाल करने के लिए बॉटलिंग प्लांट भी लगाया जाना था। ताकि गैस को सुरक्षित तरीके से उसमें भरा जा सके, लेकिन न तो अब तक गोबर गैस प्लांट लग सका न ही बॉटलिंग प्लांट।

अब तक पूरे डेयरी संचालक नहीं हो पाए शिफ्ट
राजधानी के गोकुल नगर में डेयरी संचालकों को जगह आवंटित तो कर दी गई, लेकिन अब भी कई डेयरी शहर के अंदर संचालित हो रहे हैं। अब तक सभी डेयरी वालों को यहां शिफ्ट नहीं किया जा सका है, जिसके चलते आज भी सड़कों पर मवेशियों का तांता लगा रहता है।

निगम द्वारा इसके लिए केवल जगह सुनिश्चित करना था। बाकी का काम क्रेडा का है।
- एस पी त्रिपाठी, कार्यपालन अभियंता, जोन-6