
रायपुर . सरकार ने एक बार फिर शिक्षाकर्मियों को शासकीय सेवक मानने से इनकार कर दिया है। पंचायत विभाग का मानना है कि शिक्षाकर्मियों को वेतन और भत्तों का भुगतान शासन की ओर से अनुदान के रूप में दिया जाता है।
विभाग का यह विचार एेसे समय आया है जब मुख्य सचिव अजय सिंह की अध्यक्षता वाली हाईपॉवर कमेटी के सामने शिक्षाकर्मियों के संविलियन का प्रस्ताव विचाराधीन है। शिक्षाकर्मी संघ के पदाधिकारियों का कहना है, सरकार इस तरह का पत्र जारी कर उनके जख्म में नमक छिड़कने का काम कर रही है।
रायगढ़ जिला पंचायत ने पिछले दिनों संचालनालय को एक पत्र लिखकर शिक्षाकर्मियों के वेतन के लिए खास मदों के उपयोग पर मार्गदर्शन मांगा। जवाब में पंचायत विभाग के संचालक तारण प्रकाश सिन्हा ने कहा है कि जिला पंचायतों की ओर से जारी पत्र से एेसा प्रतीत हो रहा है कि जिन-जिन मांग संख्या की राशि आवंटित की गई है, उन सभी मांग संख्याओं के तहत पंचायतों द्वारा निकासी और भुगतान नहीं किया जा रहा है। चूंकि शिक्षाकर्मी शासकीय सेवक नहीं है। इनके वेतन-भत्तों के भुगतान के लिए शासन की ओर से अनुदान के रूप में सहायता राशि दी जाती है।
अत: निर्देशित किया जाता है कि जिन-जिन मांग संख्याओं में राशि आवंटित की गई है, उन सभी मांग संख्याओं के तहत आहरण और भुगतान किया जाए। इसे लेकर छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय मोर्चा के संयोजक वीरेन्द्र दुबे व संजय शर्मा का कहना है कि शासकीयकरण और संविलियन के लिए दो दशक से संघर्ष कर रहे हैं। अब हाईपावर कमेटी का समय 5 मार्च तक का है। इससे बाद पहल नहीं होने पर नई रणनीति के तहत आंदोलन करेंगे।
आज मुख्य सचिव से मिलेंगे शिक्षाकर्मी
शिक्षाकर्मियों का संगठन सोमवार को मुख्य सचिव अजय सिंह और पंचायत संचालक तारण प्रकाश सिन्हा से मुलाकात करेगा। इस दौरान उनकी 9 मांगों से जुड़े तथ्यात्मक दस्तावेज सौंपे जाएंगे। हाईपॉवर कमेटी के निर्देश पर संचालनालय ने उनसे ये दस्तावेज मांगे थे।
Published on:
19 Feb 2018 07:37 pm
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