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मेहनत छत्तीसगढ़ के फूल-सब्जी उत्पादकों की, मालामाल हो रहे बेंगलुरु के व्यापारी

छत्तीसगढ़ के किसानों को धान के अलावा फल, फूल और सब्जियों की खेती करने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन तो दिया, लेकिन सीधे निर्यात की कोई व्यवस्था नहीं की। इसका खामियाजा हमारे हजारों उत्पादक उठा रहे हैं। बेंगलूरु के व्यापारी इनसे कौडिय़ों के दाम पर उत्पाद खरीदकर खूब मुनाफा कमा रहे हैं।

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मेहनत छत्तीसगढ़ के फूल-सब्जी उत्पादकों की, मालामाल हो रहे बेंगलुरु के व्यापारी

मेहनत छत्तीसगढ़ के फूल-सब्जी उत्पादकों की, मालामाल हो रहे बेंगलुरु के व्यापारी

रायपुर. अभी तक धान पर निर्भर छत्तीसगढ़ के किसान अब फल, फूल और सब्जियों का उत्पादन बढ़ाने लगे हैं। उसका निर्यात भी हो रहा है, लेकिन यह निर्यात दूसरे राÓयों के भरोसे है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार निर्यात के लिए एकल खिड़की व्यवस्था करे तो उन्हें अ'छा मुनाफा होगा। उद्यानिकी विभाग के मुताबिक सरगुजा, बस्तर, दुर्ग, राजनांदगांव सहित कुछ अन्य जगहों के किसान फूल की खेती से जुड़कर आर्किड और झरबेरा (विदेशी प्रजाति के फूल) और टच गुलाब आदि उगा रहे हैं। कई किसान शिमला मिर्च, हरी मिर्च, छोटी ककड़ी, कुंदरू व परवल की अ'छी खेती कर रहे हैं। इसे देश भर की मंडियों में भेजने के साथ विदेशों को भी निर्यात किया जा रहा है। उत्पादों के निर्यात की कोई सीधी व्यवस्था न होने से उन्हें अपना माल बेंगलूरु के कारोबारियों को बेचना पड़ता है।

इन उत्पादों का निर्यात
प्रदेश में सबसे अधिक शिमला मिर्च, हरी मिर्च (139394 मीट्रिक टन) का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा परवल व कुंदरू का 32701 मीट्रिक टन और ककड़ी का 800 क्विंटल उत्पादन यहां के किसान कर रहे हैं।

किसानों को हो रहा सीधा नुकसान
अखिल भारतीय किसान संगठन के संयोजक राजाराम तिवारी ने बताया, विदेशों में फेयर ट्रेड नाम की संस्था है। यह देखती है कि उत्पादक से विक्रेता तक लाभ के बराबर फायदों की निगरानी करती है। अपने यहां खेती व्यवस्थित हुई है, लेकिन लाभ अव्यवस्थित है। विकासखंड स्तर पर उत्पाद को सुखाने, पैक करने, रखने और परिवहन की व्यवस्था होनी चाहिए। तभी किसान आत्मनिर्भर हो पाएगा।

डॉ. प्रभाकर सिंह संचालक उद्यानिकी का कहना है कि किसानों के उत्पाद को निर्यात करने के लिए योजना बनाई जा रही है। मंडी बोर्ड के सहयोग से एक व्यापारिक सम्मेलन कराने पर भी विचार किया जा रहा है।