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रावणभाठा में रामलीला व रावण वध देखने उमड़े हजारों लोग

बुधवार को विजयादशमी के अवसर पर राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट के द्वारा परंपरागत दशहरा का आयोजन शीतला पारा स्थित रावणभाठा में किया गया। रामलीला व रावण वध देखने हजारों लोग पहुंचे. पूरा रावणभाठा लोगों से खचाखच भरा हुआ था. वहीं नाश्ता, चाट, खिलौने, तीर, धनुष, गदा आदि की दुकानें भी सजी हुई थीं. छोटे-छोटे बच्चे हाथों में तीर-धनुष व गदा लिए खुशी से झूम रहे थे. कुम्हारपारा के रामलीला मंडली द्वारा रामलीला का मंचन किया गया।

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रावणभाठा में रामलीला व रावण वध देखने उमड़े हजारों लोग

रावणभाठा में रामलीला व रावण वध देखने उमड़े हजारों लोग

नवापारा राजिम। बुधवार को विजयादशमी के अवसर पर राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट के द्वारा परंपरागत दशहरा का आयोजन शीतला पारा स्थित रावणभाठा में किया गया। रामलीला व रावण वध देखने हजारों लोग पहुंचे. पूरा रावणभाठा लोगों से खचाखच भरा हुआ था. वहीं नाश्ता, चाट, खिलौने, तीर, धनुष, गदा आदि की दुकानें भी सजी हुई थीं. छोटे-छोटे बच्चे हाथों में तीर-धनुष व गदा लिए खुशी से झूम रहे थे. कुम्हारपारा के रामलीला मंडली द्वारा रामलीला का मंचन किया गया।
रामलीला का प्रारंभ सीताहरण प्रसंग के बाद से किया गया। रावण (चेतन चौहान) से बिना युद्ध किए संधि करके सीता वापसी के लिए राम जिनेंद्र चक्रधारी), लक्ष्मण (भागवत चक्रधारी), सुग्रीव (चंदन चौहान), हनुमान (चिंटु चक्रधारी), अंगद (लोकेश बया) के बीच चर्चा हुई। फिर राम दूत बनकर अंगद रावण के दरबार में आए। पहली मुलाकात रावण के पुत्र अक्षय कुमार से होता है । जिससे दोनों के बीच युद्ध होते हैं और अक्षय कुमार की मृत्यु हो जाती है। फिर अंगद रावण के दरबार में पहुंचता है। रावण के दूत एक (गोपाल मेश्राम, दूत दो (अनिल बया) द्वारा रोककर रावण को सूचना देते हैं कि आपसे मिलने के लिए रामदूत आया है। रावण कहता है उसे स्वागत-आदर से सभा में बुलाया जाए। अंगद के सभा में आने के बाद रावण उसका परिचय पूछते हैं। अंगद कहता है मैं बलि का पुत्र हूं। उसी के साथ अंगद और रावण के बीच सीता वापसी संधि या युद्ध पर संवाद होता है। रावण गरजते हुए कहता है, तुझको यहां ज्ञान नहीं मैं कालजीत मतवाला हूं। मेरे कांटे का मंत्र नहीं, ऐसा भुजंग विष वाला हूं। उक्त बातें सुनकर अंगद भी कहते हैं कि तुम तो जादूगर हो। यदि मेरा धरती पर जमे पैर को किसी ने भी उठा दिया तो मैं समझूंगा कि सीता माता को हार गया। इतना कहते ही रावण के दरबारी अंगद के पैर उठाने में लग जाते हैं और उठा पाने में असफल रहते हैं। तभी रावण स्वयं सिंहासन से उठकर अंगद के पास उसके पैर उठाने जाते हैं तो अंगद अपना पैर स्वयं हटा लेता है और कहते हैं कि मेरा पैर पकडऩे से अच्छा आप भगवान श्रीराम का चरण पकड़े। इसमें आपका उद्धार हो सकता है। इन बातों को सुनकर रावण क्रोधित हो जाता है और युद्ध के लिए घोषणा कर देता है।
रामदल और रावणदल के बीच युद्ध होता है। मेघनाथ (प्रीतम सिंह चौहान) द्वारा शक्ति बाण चलाने से लक्ष्मण मूर्छित हो जाता है। हनुमानजी द्वारा लाई संजीवनी बूटी खाकर लक्ष्मण पुन: युद्ध के लिए तैयार हो जाते हैं। लक्ष्मण व मेघनाथ का युद्ध होता है, जिसमें मेघनाथ मारा जाता है। राम -कुंभकरण युद्ध में कुंभकरण (अजय चक्रधारी) मारा जाता है। राम-रावण युद्ध में राम विजयी होता है। वहीं, हरिहर स्कूल मैदान में 51 फीट के रावण दहन का कार्यक्रम रखा गया था. जिसे देखने दूरदराज के गंावों से भी लोग आए हुए थे.