दिनेश यदु@ रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सिद्ध पीठ मां महामाया मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। इस मंदिर का निर्माण आठवीं शताब्दी के आसपास कराया गया था। हैहयवंशी राजाओं की कुलदेवी मां महामाया हैं. मंदिर पूरी तरह तांत्रिक विधि से निर्माण कराया गया है। प्राचीन काल से यहाँ परंपरा चली आ रही है, चैत्र व कुंवार नवरात्रि में अष्टमी तिथि पर सोमवार सुबह से शाम तक हवन का क्रम चलेगा। अष्टमी तिथि में हवन प्रारंभ होता है, और नवमीं तिथि मेें पूर्णाहुति होता है। महामाया मंदिर के पुजारी पं.मनोज शुक्ला ने बताया कि बुधवार को अष्टमी तिथि में शाम 6 बजे से हवन आरम्भ हुआ, नवमी तिथि रात 9 बजे पूर्णाहुति किया गया। मध्य रात्रि में 12 बजे के बाद ज्योति विसर्जन आरम्भ होगा ।
अष्टमी तिथि पर श्रद्धालु अठवाही यानी रोठ, पूड़ी, खीर, मिठाई अर्पित किया।हवन कुंड में कन्या के हाथों हवन की अग्नि प्रज्वलित कराने के बाद अग्नि देवता, दिगपाल देवता समेत अन्य देवी-देवताओं का आह्वान और श्रीदुर्गा सप्तशती के 700 मंत्रों का उच्चारण करके आहुति देने के साथ 13 अध्याय के मंत्रों से हवन पश्चात मां समलेश्वरी देवी मंदिर के हवन कुंड में अग्नि स्थापना पूजन करके 108 बाहर आहुति के पश्चात पुन: महामाया मंदिर के हवन कुंड में दिगपाल बलि, नवग्रह बलि, क्षेत्रपाल बलि पूजा करके अष्टमी-नवमी की युति में शाम को पूर्णाहुति दी ।