
बिलासपुर. होम आइसोलेशन वाले मरीजों को अब स्वास्थ्य विभाग अस्पताल बुला रहा है। दलील यह दी जा रही है किे होम आइसोलेशन के अधिकांश मरीज ठीक नहीं हो पा रहे हैं उनका बेहतर उपचार अस्पताल में ही हो सकेगा। अब सवाल यह उठ रहा है कि विभाग कोरोना से होने वाली मौत के आंकड़ों को रोकना चाहता है या फिर अस्पताल के खाली बिस्तरों को भरना चाहता है।
बहरहाल कहा जा रहा है कि संक्रमितों को घर में सही उपचार नहीं मिल पा रहा है और अचानक उनकी तबीयत बिगड़ जा रही है और मौत हो जा रही है। जिले में कोरोना से 284 की मौत हो चुकी है। वर्तमान में लगभग एक हजार से अधिक कोरोना संक्रमित होम आइसोलेशन में हैं। इसमें से 12 से 13 प्रतिशत में कोरोना का लक्षण नहीं मिले हैं, लेकिन पॉजिटिव होने की वजह से इनका इलाज घर में चलता है।
वहीं 11 प्रतिशत ऐसे हैं जो 60 वर्ष के ऊपर के मरीज हैं जिसमे कोरोना लक्षण हैं, लक्षण वाले संक्रमित का ध्यान ज्यादा रखना है, लेकिन होम आइसोलेट रहने से संक्रमितों का उपचार सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। घर में अस्पताल की तरह इलाज नहीं मिल पा रहा है। तबीयत घर में ज्यादा बिगडऩे पर अस्पताल ले जाते हैं और उनकी मौत हो जाती है। इधर स्वास्थ्य विभाग अब मरीज के परिजनों से अपील कर रहा है कि अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराएं।
क्या कहता है विभाग
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की माने तो होम आइसोलेट रहने वाले जिला अस्पताल के पूर्व आरएमओ और वन विभाग के पशु चिकित्सक का मामला सामने आया। जब उनके कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि की गई तो वह पूरी तरह से स्वस्थ थे। ऐसे में उन्होंने होम आइसोलेट किया गया। होम आइसोलेशन में ही फिर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। अंत में उन्हें गंभीर दशा में अस्पताल में भर्ती किया गया और उनकी मौत हो गई।
Published on:
08 Dec 2020 11:37 pm
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