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हार्ट की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थी महिला, Google ने दिखाई उम्मीद की किरण

- सबने ऑपरेशन से किया मना, तब 'गूगल' से मिला रास्ता, रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में पहली बार हृदय के ऑपरेशन में बोवाइन टिश्यू वॉल्व का सफल प्रयोग- हार्ट की दुर्लभ बीमारी एब्सटिन एनोमली से पीड़ित थी महिला

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हार्ट की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थी महिला, Google ने दिखाई उम्मीद की किरण

हार्ट की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थी महिला, Google ने दिखाई उम्मीद की किरण

Rare Heart Disease Ebstein Anomaly: रायपुर. हार्ट की दुर्लभ बीमारी एब्सटिन एनोमली से पीड़ित महिला को राजधानी के करीब सभी बड़े निजी अस्पतालों ने ऑपरेशन से मना कर दिया। सब ओर से निराश हो चुकी महिला ने 'गूगल' का सहारा लिया तो उसे उम्मीद की किरण दिखाई दी।

रायपुर के कुशालपुर निवासी विकास शर्मा की 26 वर्षीय पत्नी हार्ट की दुर्लभ बीमारी एब्सटीन एनोमली से पीड़ित थी। विकास शर्मा विगत 6 माह के भीतर पत्नी के ऑपरेशन के लिए राजधानी के सभी बड़े निजी अस्पतालों में पहुंचे लेकिन सभी ने ऑपरेशन करने से मनाकर चेन्नई या मुंबई ले जाने की सलाह दी। आर्थिक रूप से कमजोर विकास इसमें असमर्थ थे। उन्होंने 'गूगल' पर हार्ट के स्पेशलिस्ट डॉक्टर को सर्च किया तो उन्हें डॉ. कृष्णकांत साहू के बारे में जानकारी मिली।

पत्नी को लेकर वह आंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. साहू के पास पहुंचे। डॉ. साहू ऑपरेशन करने को तैयार हो गए। ऑपरेशन के बाद अब महिला पूरी तरह स्वस्थ है और डिस्चार्ज होकर घर जाने को तैयार है। डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि यह ऑपरेशन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश में पहली बार हृदय के ऑपरेशन में बोवाइन टिश्यु वॉल्व का प्रयोग किया गया। साथ ही इस ऑपरेशन में मरीज को मरीज का ही खून चढ़ाया गया, जिसको ऑटोलॉगस ब्लड ट्रांसफ्युजन कहा जाता है। यह ऑपरेशन प्रदेश में संभवत: किसी भी शासकीय या निजी संस्थान में पहला है। मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना से नि:शुल्क ऑपरेशन हुआ है। निजी अस्पतालों में मरीज को 8 से 10 लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं।

क्या है एब्सटीन एनोमली
यह हृदय की जन्मजात बीमारी है। जब बच्चा मां के पेट के अंदर होता है, उस समय प्रथम 6 हफ्तों में हृदय का विकास होता है। कुछ बाधा आने पर बच्चे का हृदय असामान्य हो जाता है। इस बीमारी में मरीज के हृदय का ट्राइकस्पिड वॉल्व ठीक से नहीं बन पाता एवं दायां निलय ठीक से विकसित नहीं हो पाता एवं हृदय के ऊपर वाले चैंबर में छेद रहता है, जिसके कारण फेफड़े में शुद्ध होने (ऑक्सीजेनेसन) के लिए पर्याप्त मात्रा में खून नहीं जाता, जिससे शरीर नीला पड़ जाता है। यह बीमारी 2 लाख में से किसी एक को होती है। 13 प्रतिशत बच्चे जन्म लेते ही मर जाते हैं। वहीं 18 प्रतिशत बच्चे 10 साल की उम्र तक जीवित रहते हैं और 20 साल की उम्र तक एक-दो ही जीवित बचते हैं।

ऑपरेशन की सफलता 10 प्रतिशत से भी कम
डॉ. कृष्णकांत साहू ने मरीज के रिश्तेदारों को बताया कि यह बहुत ही दुर्लभ बीमारी (Rare Heart Disease Ebstein Anomaly) है। ऑपरेशन की सफलता 10 प्रतिशत से भी कम है। जबकि, ऑपरेशन नहीं होने पर मरीज के मरने की 100 प्रतिशत संभावना है। डॉ. साहू के साथ ऑपरेशन में हार्ट सर्जन डॉ. निशांत चंदेल, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. तान्या छौड़ा, नर्सिंग स्टॉफ राजेन्द्र साहू, चोवा, मुनेश, एनेस्थेसिया टेक्नीशियन भूपेन्द्र चंद्रा भी शामिल थे।