
Electricity bill, false billing, energy minister pradhumn sing tomar
दिवाली के त्योहार में अपनी जेब हल्की करके बैठे लोगों को बिजली कंपनी बिल में अतिरिक्त सुरक्षा निधि जोड़कर झटका दे रही है। अतिरिक्त सुरक्षा निधि जुड़ने से उपभोक्ताओं का बिल हर माह की अपेक्षा औसत ज्यादा आया है। बिजली कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी अक्टूबर माह में हर साल सुरक्षा निधि रिवाइस करती है। उपभोक्ता का औसत वार्षिक बिल निकालकर सुरक्षा निधि में रखे पैसे से उसकी तुलना की जाती है। सुरक्षा निधि में पैसा कम होता है, तो अतिरिक्त सुरक्षा निधि के रुप में उपभोक्ता से एडवांस पैसा लिया जाता है। उपभोक्ता का औसत बिल सुरक्षा निधि से कम होता है, तो उपभोक्ता के बिल से इस राशि को माइनस कर दिया जाता है।
अपनी बिल सुधरवाने के लिए उपभोक्ता कार्यालय पहुंच रहे हैं, तो उन्होंने नियम बताकर कंपनी के अधिकारी बिल भरने का निर्देश जारी कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिल आने पर भुगतान कर रहे हैं, तो अतिरिक्त सुरक्षा निधि क्यों जोड़ा जा रहा है? उपभोक्ताओं के इन सवालों पर अधिकारियों का कहना है कि औसत बिल को देखकर भविष्य में उपभोक्ता को बिजली उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा निधि का चार्ज लगाया जाता है। उपभोक्ता के औसत बिल के हिसाब से अतिरिक्त सुरक्षा निधि साल में एक से दो बार तक कंपनी चार्ज करती है।
यहां दर्ज करें अपनी शिकायत
बिजली कंपनी के अधिकारियों ने बताया, कि ग्रामीण इलाके के उपभोक्ता अपने क्षेत्र के एई और जेई को और शहरी इलाके के उपभोक्ता जोन कार्यालय जाकर वहां के अधिकारियों से अपनी समस्या का समाधान करवा सकते है। उपभोक्ता बिजली बल से संबंधित शिकायत मोर बिजली ऐप के माध्यम से भी कर सकते है।
इस तरह समझें अधिक भार का गणित
यदि एक उपभोक्ता का कनेक्टेड लोड 280 वाट है और इस साल की औसत खपत यूनिट 280 है। तदानुसार बिलिंग राशि रुपए 1426 होगी, जिस पर गणना के आधार पर 490 रुपये की अतिरिक्त सुरक्षा निधि राशि की देयता बनती है, जो बिलिंग राशि का कुल 34 प्रतिशत है। यह प्रतिशत खपत के आधार पर अलग-अलग उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग होगी। आपको बता दे कि बिजली की आपूर्ति पहले की जाती है एवं माह भर में उपयोग किए गए बिजली का बिल का भुगतान अगले माह की जाती है। अत: वार्षिक औसत खपत का न्यूनतम दो माह की सुरक्षा निधि प्रावधानित है।
स्थायी निर्देशों के तहत निधि लेने का प्रावधान
बिजली वितरण कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग एक स्थायी निर्देशों के तहत सुरक्षा निधि लेने का प्राविधान है। हर वर्ष बीते 12 महीने के उपयोग किए गए बिजली की औसत खपत की गणना कर अक्टूबर में अतिरिक्त सुरक्षा निधि के अंतर की राशि ली जाती है। इसकी गणना प्रचलित टैरिफ के आधार पर नियमानुसार पहले से जमा सुरक्षा निधि को घटाकर की जाती है। जितनी राशि का अंतर होता है, उतनी अतिरिक्त सुरक्षा निधि की देयता बनती है।
अक्टूबर माह में सुरक्षा निधि रिवाइस की जाती है। जिन उपभोक्ताओं की वार्षिक खपत ज्यादा निकलती है, उनके अकाउंट पर अतिरिक्त सुरक्षा निधि चार्ज की जाती है। जिन उपभोक्ताओं को बिल को लेकर समस्या है, वो जोन कार्यालय या स्थानीय एई-जेई से संपर्क करके अपनी समस्या का समाधान करा सकते हैं।
- मनोज खरे, एमडी, बिजली कंपनी
Published on:
05 Nov 2022 06:19 pm
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