
फूल चौक स्थित होटल में आयोजित कार्यक्रम में शैलजा को सम्मानित करते डॉ. रमन सिंह और बृजमोहन अग्रवाल।
ताबीर हुसैन @ रायपुर. इंग्लिश को स्टेटस सिंबॉल माना जाता है। इंटरनेशनल लैंग्वेज होने के चलते इसकी अहमियत भी है। सफलता के मापदंडों में वैसे तो कोई भी भाषा रुकावट नहीं बनती लेकिन आज आपको एक रोचक कहानी घटना बताने जा रहे हैं। दुर्ग निवासी 27 साल की शैलजा बख्शी एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। रायपुर के फूल चौक स्थित होटल में भाजपा के विभिन्न प्रकोष्ठों की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सोमवार को सम्मानित की गईं। इस दौरान उन्होंने पत्रिका से अपने लेखन के सफर को साझा किया। सुनिए उन्हीं की जुबानी- पिछले 10 साल से यूथ बेस्ड आर्टिकल्स लिख रही हूं। लगातार एक हजार आर्टिकल्स विभिन्न प्लेटफॉर्म में पब्लिश हुए। वल्र्ड बुक रेकॉर्ड ऑफ लंदन में मेरा नाम दर्ज है। मेरी स्कूलिंग से लेकर पीजी हिंदी में हुआ लेकिन मैं लिखती इंग्लिश में हूं। हिंदी में पढ़कर अंग्रेजी में लिखना कितना कठिन है? इस पर कहा कि पिता की सीख है कि लैंग्वेज किसी भी शिक्षा के लिए बैरियर नहीं होती। घर में हम अंग्रेजी में ही बात किया करते थे। मैं अंग्रेजी में ही पढ़ाती हूं। मैं रिसर्च भी कर रही हूँ. उस पर मैंने रिसर्च भी किया है।
17 साल से लिख रही
मैं जब 17 साल की थी, तबसे लिख रही हूं। मेरे विषय यूथ से रिलेटेड रहते हैं। चाहे शिक्षा हो, फैशन, नौकरी, ट्रेंड और सिनेरियो। आज की तारीख में यूथ को सही रास्ता चाहिए क्योंकि कॉन्फिडेंस तो उसके पास है ही। यदि सही मार्गदर्शन मिल जाए तो युवा हर काम कर सकते हैं जिसकी कल्पना उन्होंने कर रखी हो।
मेरा पैशन है टीचिंग
टीचिंग मेरा पैशन है। यह मैं हमेशा करती रहूंगी। इसके अलावा मैं कई तरह के रिसर्च भी कर रही हूं। चूंकि टीचिंग और रिसर्च साथ-साथ किया जा सकता है, इसलिए मेरा इंट्रेस्ट बना रहता है। रही बात मेरी इंग्लिश तो ये मेरे पापा की देन है। वे हमेशा मुझे अंग्रेजी के शब्द बताते रहते थे। मैं एमबीए, बीकॉम और बीबीए के छात्रों को इंग्लिश में पढ़ा रही हूं।
Published on:
07 Jun 2022 01:31 am
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