
सालभर में 33 को जिलाबदर करने के प्रस्ताव(photo-patrika)
CG Crime News: छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर में चाकूबाजी, हत्या, गुंडागर्दी, वसूली, नशाखोरी, अवैध कारोबार जैसे अपराधों के पीछे आदतन और सक्रिय हिस्ट्रीशीटरों की बड़ी भूमिका होती है। इनके खिलाफ सख्ती कैसे हो रही है? इसका अंदाजा इन बदमाशों की जिलाबदर की प्रक्रिया से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में पुलिस ने जिलाबदर के लिए 33 गुंडे-बदमाशों का प्रतिवेदन भेजा था, लेकिन इसमें से केवल 5 बदमाशों का ही जिलाबदर हो पाया है।
पूरा साल बीत गया, लेकिन सभी का जिलाबदर नहीं हो पाया है। इस तरह से सक्रिय गुंडे-बदमाशों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। मामला केवल कागजों में चल रहा है। यही वजह है कि आपराधिक गतिविधियों, तस्करी, गुंडागर्दी के मामलों में कमी नहीं आ रही है। कई हिस्ट्रीशीटर बेखौफ घूम रहे हैं और आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं। कोई जुए का अड्डा चला रहा है, तो कोई सट्टे और नशे का कारोबार संचालित कर रहा है।
किसी हिस्ट्रीशीटर को जिलाबदर करने की प्रक्रिया पुलिस और जिला प्रशासन से होती है। पुलिस प्रस्ताव बनाकर देती है, जिस पर जिला प्रशासन में सुनवाई होती है। इसके बाद हिस्ट्रीशीटर को जिलाबदर किया जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में एक-एक साल का समय लग रहा है। जिलाबदर होने पर किसी हिस्ट्रीशीटर को 3 से 6 माह तक को रायपुर जिले से बाहर रहना होता है। बिना अनुमति के वह जिले की सीमा में भी प्रवेश नहीं कर सकता है। अगर प्रवेश करता है, तो उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाता है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में अपराध की तस्वीर काफी गंभीर नजर आती है। सबसे अधिक चोरी के 1442 मामले दर्ज किए गए हैं, जो कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती हैं। इसके बाद नकबजनी के 473 मामले सामने आए हैं, जिससे आमजन की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।
गंभीर अपराधों की बात करें तो मर्डर के 90 और हत्या के प्रयास के 97 मामले दर्ज हुए हैं। वहीं लूट के 71 और डकैती के 7 मामले सामने आए हैं। आर्थिक अपराधों में धोखाधड़ी के 292 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही नारकोटिक एक्ट के तहत 271 मामले सामने आना जिले में नशे के बढ़ते नेटवर्क की ओर इशारा करता है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और सख्त कार्रवाई की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
अपराधियों पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई के तहत जिले में 129 गुंडा-बदमाश चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा 25 निगरानी बदमाशों को पुलिस की सतत निगरानी में रखा गया है, जबकि 3 गैंग हिस्ट्रीशीटर भी सूचीबद्ध हैं। ये आंकड़े कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की सतर्कता और अपराध नियंत्रण की रणनीति को दर्शाते हैं।
जिलाबदर के प्रस्ताव कम बनाए जाते हैं। पुलिस जिलाबदर के लिए जारी अधिकांश नोटिस की तामिली नहीं करा पाती है। इसके चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती है। जेल में बंद गुंडे-बदमाशों का भी जिलाबदर का प्रस्ताव भेज दिया जाता है। कई बार जिला प्रशासन में मामलों की सुनवाई भी समय पर नहीं हो पाती है।
जमीन-मकान में जबरन कब्जा दिलाने और खाली करवाने से लेकर चाकूबाजी, वसूली, नशे के गोरखधंधे, मर्डर, लूटपाट और जुए-सट्टे के संचालन तक—इन आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय तत्व इलाके में खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं। अड्डेबाजी के जरिए संगठित अपराध को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे आम नागरिकों में असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कई मामलों में पुलिस समय पर नोटिस की तामिली नहीं करा पाती है, जिसके चलते प्रक्रिया बाधित होती है। नोटिस तामिल नहीं होने से उन मामलों की सुनवाई समय पर नही हो पाती है। जिला प्रशासन की ओर से जिलाबदर के मामलों में गंभीरता से कार्रवाई की जाती है।
अपराध में नियंत्रण के लिए सक्रिय गुंडे-बदमाशों को जिलाबदर करने का प्रस्ताव भेजा जाता है। इसमें पुलिस और जिला प्रशासन स्तर पर अलग-अलग प्रक्रियाएं रहती हैं। प्रस्तावित जिलाबदर की कार्रवाई किन कारणों से रुकी है? इसका पता लगाया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
15 Jan 2026 01:12 pm
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