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जानिए…छत्तीसगढ़ में कितने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के पद है खाली

कार्यकर्ताओं के 3020 और सहायिकाओं के 4086 पद शामिल

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जानिए...छत्तीसगढ़ में कितने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के पद है खाली

जानिए...छत्तीसगढ़ में कितने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के पद है खाली

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ड्रीम प्रोजेक्ट कुपोषण मुक्ति अभियान और बालवाड़ी केंद्रों के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की कमी बीच अपने काम को अंजाम देने का प्रयास कर रहा है। जबकि पर्याप्त संख्या में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के नहीं होने का असर दोनों कार्यक्रम में पडऩे की संभावना है। वर्तमान में मुख्यमंत्री ने पहले चरण में 6536 प्राथमिक शालाओं के साथ बालवाड़ी केंद्र खोलने का ऐलान किया है। इसकी शुरुआत हो जाएगी, लेकिन अगले चरणों में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की कमी का बड़ा असर दिखाई दे सकता है। बता दें कि प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के 7106 पद रिक्त हैं। इसमें कार्यकर्ताओं के 3020 और सहायिकाओं के 4086 पद शामिल हैं। इनकी कमी का असर शासन के अन्य कार्यक्रमों में भी पड़ता है। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंडिय़ा का कहना है कि रिक्त पदों पर भर्ती के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों को गौर करते तो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थिति ङ्क्षचताजनक बनी हुई है। रायपुर जैसे जिले में कार्यकर्ताओं के 78 और सहायिकाओं के 153 पद खाली है। जबकि सबसे ज्यादा खराब स्थिति जशपुर जिले की है। यहां दोनों के लिए 790 पद खाली है। हालांकि सबसे ज्यादा आंगनबाड़ी जशपुर जिले में ही है। इस मामले में नारायणपुर जिला सबसे अच्छी स्थिति में है। यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पांच और सहायिकाओं के चार पद ही रिक्त है। यहां आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या भी सबसे कम है। वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंडिया के गृह जिला बालोद में दोनों के 91 पद रिक्त है।

नर्सरी शिक्षक बनाने का वादा

कांग्रेस ने अपने जन घोषणा पत्र में वादा किया था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का नर्सरी शिक्षक के रूप में उन्नयन किया जाएगा। उन्नयन के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कलेक्टर दर पर भुगतान करने की बात भी कहीं गई थी। घोषणा पत्र के मुताबिक विभाग इसकी कार्रवाई कर रहा है, लेकिन इसकी समय-सीमा तय नहीं है। हालांकि बालवाड़ी केंद्र खोलने की कवायद को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

8 हजार आंगनबाड़ी किराए के भवन में

प्रदेश में करीब आठ हजार आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं, जिनके पास स्वयं का भवन नहीं है। वे किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश में पर्याप्त सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। हालांकि राज्य सरकार राशि की उपलब्धता के आधार पर भवन बनाने की बात कही रही है, लेकिन लंबे समय से यह स्थिति बनी हुई है।

छह बार भेजा पत्र, नहीं मिली स्वीकृति

महिला एवं बाल विकास विभाग लगातार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती के लिए प्रयासरत है। इसके लिए वर्ष 2020 से 2021 तक वित्त विभाग को 6 बार पत्र लिखा गया है, लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी है। हालांकि वित्त विभाग ने 20 जनवरी 2022 को विभाग को पत्र लिखकर आवश्यक पदों का आंकलन करते हुए अति आवश्यक पदों का प्रस्ताव वित्तीय भार की जानकारी के साथ भेजने का आग्रह किया है।