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एक सदस्य की KYC नहीं तो पूरा परिवार भूखा! 12 लाख लोगों का रोका गया राशन, जानें क्या है वजह..?

Ration Blocked in CG: रायपुर में खाद्य विभाग की लापरवाही और नियमों की गलत व्याख्या ने प्रदेश के गरीब परिवारों को भारी संकट में डाल दिया है।

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एक सदस्य की KYC नहीं तो पूरा परिवार भूखा(photo-AI)

एक सदस्य की KYC नहीं तो पूरा परिवार भूखा(photo-AI)

Ration Blocked in CG: छत्तीसगढ़ के रायपुर में खाद्य विभाग की लापरवाही और नियमों की गलत व्याख्या ने प्रदेश के गरीब परिवारों को भारी संकट में डाल दिया है। जिन राशन कार्डों में चार या उससे अधिक सदस्य दर्ज हैं और उनमें से एक की भी केवाईसी अपडेट नहीं है, उनका पूरा चावल आवंटन रोक दिया गया है। इससे हजारों परिवारों की थाली से अनाज गायब हो गया है।

Ration Blocked in CG: नियम कुछ और, कार्रवाई कुछ और

सरकारी नियमों के अनुसार, जिस सदस्य की केवाईसी अपडेट नहीं है, केवल उसी सदस्य का खाद्यान्न रोका जाना चाहिए। इसके बावजूद विभाग ने नियमों को दरकिनार करते हुए पूरे परिवार का राशन बंद कर दिया। हैरानी की बात यह है कि जिन राशन कार्डों में तीन सदस्य दर्ज हैं, वहां केवाईसी अधूरी होने के बावजूद राशन वितरण जारी रखा गया है।

करीब 12 लाख लोग प्रभावित

इस फैसले का सीधा असर प्रदेशभर के करीब 12 लाख लोगों पर पड़ा है। राजधानी रायपुर में ही ऐसे प्रभावित सदस्यों की संख्या लगभग 13 हजार बताई जा रही है। गरीब, मजदूर, बुजुर्ग और बीमार लोग महीनों से राशन के लिए भटक रहे हैं।

कुष्ठ रोगियों तक को नहीं मिल रहा चावल

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के एक हजार से अधिक कुष्ठ रोगियों को पिछले तीन महीनों से चावल नहीं मिला है। केवाईसी अपडेट न होने का हवाला देकर गंभीर बीमारी से जूझ रहे जरूरतमंदों को भी राशन से वंचित किया जा रहा है।

पीडीएस स्टॉक पर उठे सवाल

पीडीएस स्टॉक का नियमित भौतिक सत्यापन नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सहकारी समितियों और शासकीय उचित मूल्य दुकानों में चावल वितरण को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।

चावल घोटाले के आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गरीबों के हक का चावल घोटाले के जरिए दूसरे राज्यों में बेचा जा रहा है। पार्टी का दावा है कि केवाईसी के नाम पर राशन रोककर कालाबाजारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

गरीबों की थाली पर सीधा वार

केवाईसी जैसी तकनीकी प्रक्रिया को आधार बनाकर पूरे परिवार का राशन रोकना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि खाद्य सुरक्षा कानून की मूल भावना के भी खिलाफ है। जरूरतमंदों को राहत देने के बजाय विभागीय मनमानी ने संकट और बढ़ा दिया है।