ऐसे में रेलवे को यह ट्रेन भारी पड़ रही है। क्योंकि, इस ट्रेन के चलने को लेकर यात्रियों में कोई खास उत्साह नहीं दिख रहा। बड़ी वजह महंगा किराया है। ऐसे में दोनों तरफ से वंदे भारत खाली-खाली ही दौड़ रही। रेलवे सूत्रों के अनुसार अभी दशहरा-दिवाली पर्व पर तक देखेंगे कि वंदे भारत ट्रेन को कितने यात्री मिल सकते हैं। वरना बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत ट्रेन का जिस तरह से 8 कोच कम करने पड़े हैं, वैसा ही दुर्ग-विशाखापट्टनम वंदेभारत का भी करना पड़ेगा। 1128 सीटों वाली इस ट्रेन में हर दिन 150 से 160 यात्री ही इस ट्रेन में बैठ रहे हैं।